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کد خبر : 181434
تاریخ انتشار : 2/5/2016 17:32
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फिर अमेरिकी दुष्प्रचार का नया चेहरा सामने आया।

परमाणु समझौता लागू हुए तीन महीने से ज़्यादा का समय गुज़र रहा है लेकिन ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की दुष्प्रचार की नीति ने नया रूप धारण कर लिया है।


विलायत पोर्टलः परमाणु समझौता लागू हुए तीन महीने से ज़्यादा का समय गुज़र रहा है लेकिन ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की दुष्प्रचार की नीति ने नया रूप धारण कर लिया है। ईरान को ख़तरा दर्शाना एक ऐसी नीति है जिसका राग अमेरिकी राजनेता अब तक अलाप रहे हैं। ईरान को ख़तरा बताने के एक भाग को अमेरिकी राजनेता अंजाम देते हैं जबकि दूसरे भाग को इस देश की कांग्रेस अंजाम देती है। ईरान के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की ताज़ा गतिविधि में रिपब्लिकन सांसद रैनडी फ़ोबर्स ने अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के अमेरिकी कांग्रेस में पारित हो जाने की स्थिति में फार्स की खाड़ी में ईरानी सैनिकों की उपस्थिति को तनाव पैदा करने वाली कार्यवाही समझा जायेगा। अमेरिकी कांग्रेस में सूचना केन्द्र की रिपोर्ट के आधार पर इस प्रस्ताव में ईरान की इस कारण आलोचना की गई है कि वह समुद्री क़ानून के प्रति कटिबद्ध नहीं है और वह संयुक्त राष्ट्रसंघ की तरफ़ से पारित होने वाले प्रस्तावों पर ध्यान नहीं देता है। इस तरह के माहौल में यह भी दावा किया गया है कि इलाक़े के समुद्री इलाक़ों में ईरान के सैनिक अभ्यास इस तरह होते हैं जिससे तनावों में वृद्धि होती है और वे स्थिरता को आघात पहुंचने और अनचाहे तनाव के ख़तरे में वृद्धि की वजह बने हैं और उससे सीमा के बाहर अमेरिकी सैनिकों के लिए ख़तरा और अधिक हो गया है। रैनडी फ़ोर्बस ने जो प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया है उसके अनुसार अमेरिकी सरकार से मांग की गई है कि वह ईरान की ख़तरनाक कार्यवाहियों का ठोस जवाब दे। इलाक़े में अमेरिका की इन कार्यवाहियों का लक्ष्य ईरानोफोबिया की नीति को जारी रखना और अरब देशों के हाथों हथियारों की बिक्री को जारी रखना है। यह ऐसी स्थिति में है जब अमेरिका इलाक़े में तनाव और सामूहिक अशांति व असुरक्षा का ख़ास वजह है। अमेरिकी सरकार बच्चों के हत्यारे जायोनी शासन की मूल समर्थक है और वह इस अपराधी व आतंकवादी शासन को अपना स्ट्रैटेजिक घटक कहती है। इस तरह की स्थिति में अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने ऐलान किया है कि साल 1983 में बैरूत बम विस्फोट में जो अमेरिकी मारे गए थे उसमें ईरान का हाथ था और अमेरिका में ईरान का जो लगभग दो अरब डालर है उसे विस्फोट में मारे जाने वाले अमेरिकी नौसैनिकों के परिजनों के मध्य बांट दिया जाए। अमेरिकी सरकार इस देश के उच्चतम न्यायालय के फैसले को बुनियाद बनाकर ईरान की सम्पत्ति को हड़पने की चेष्टा में है। ईरान की न्यायपालिका के उपप्रमुख अर्दशीर लारीजानी ने इस बारे में कहा है कि अमेरिकी सरकार के इस व्यवहार की महत्वपूर्ण सीख यह है कि किसी भी तरह से अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ईरानी सांसदों ने भी अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के फैसले को आधारहीन और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था व क़ानूनों के लिए गम्भीर ख़तरा बताया है और ऐलान किया है कि संसद इस विषय के संबंध में कार्यवाही करेगी।
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तेहरान रेडियो


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