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Date of publication : 12/6/2016 18:0
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अमेरीका और सऊदी अरब की मूल नीति, आतंकवाद का समर्थन है।

अमेरीका की केंद्रीय ख़ूफ़िया सेवा सीआईए के प्रमुख जान ब्रेनन ने अमेरीका व सऊदी अरब के संबंधों को सर्वोत्तम स्तर पर हैं ख़ासकर आतंकवाद से संघर्ष के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध बहुत अच्छे हैं।

विलायत पोर्टलः अमेरीका की केंद्रीय ख़ूफ़िया सेवा सीआईए के प्रमुख जान ब्रेनन ने अमेरीका व सऊदी अरब के संबंधों को सर्वोत्तम स्तर पर हैं ख़ासकर आतंकवाद से संघर्ष के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध बहुत अच्छे हैं। उन्होंने आतंकवाद के फैलाव व समर्थन में सऊदी अरब और अमेरीका की संयुक्त भूमिका के बारे में मौजूद ठोस सबूतों के बावजूद दावा किया कि नाइन इलेवन की घटना सहित आतंकवाद से सऊदी अरब का कोई लेना-देना नहीं है। ब्रेनन ने वाशिंग्टन में अलअरबिया टीवी से बात करते हुए कहा कि सऊदी अरब से हमारा बड़ा अच्छा सहयोग है जो सालों से जारी है। सीआईए के चीफ़ ने ऐसी स्थिति में सऊदी अरब को अमेरीका का रणनैतिक साझेदार बताया है कि जब दोनों ही देश आतंकवाद के मुख्य समर्थक हैं। अमेरीका ने अलक़ाएदा को अस्तित्व प्रदान किया जबकि सऊदी अरब ने वहाबियत का प्रचार करके आईएसआईएल को अपने समर्थन में ले रखा है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि वाशिंग्टन और रियाज़ एक दूसरे के रणनैतिक साझेदार हैं लेकिन आतंकवाद से संघर्ष में नहीं बल्कि आतंकवाद के प्रचार प्रसार और उससे राजनैतिक फ़ायदा उठाने में। यह दोहरा रवैया संयुक्त राष्ट्र संघ के अंदर भी पैठ बना चुका है। राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून ने पिछले हफ़्ते यह बात क़बूल की थी कि अमेरीका और सऊदी अरब के दबाव के चलते उन्होंने बाल अधिकारों का हनन करने वालों की ब्लैक लिस्ट से सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठजोड़ का नाम हटा दिया है। उधर अमेरीकी विदेश मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में ईरान नाम आतंकवाद के समर्थक देशों के साथ रखा गया है। साफ़ सी बात है कि अमेरीका, जो आतंकी गुटों से हथकंडे के रूप में फ़ायदा उठाता है और ज़ायोनी शासन की आतंकी कार्यवाहियों का औचित्य दर्शाता है, स्वाभाविक रूप से सऊदी अरब को अपना स्ट्रेटेजिक घटक बताएगा और ईरान का नाम आतंकवाद के समर्थकों की सूचि में रखेगा। यह दोहरा व्यवहार, तथ्यों को बदलने की कोशिश है और इससे पता चलता है कि अमेरीका, आतंकवाद से संघर्ष के संबंध में दोहरे रास्ते अपनाए हुए है।
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 तेहरान रेडियो


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