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Code : 182785
Date of publication : 19/6/2016 23:40
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बहरैनी शासन लगातार अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन कर रही है।

बहरैन के मानवाधिकार संघ ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा कि दराज़ की जामे मस्जिद में जुमे की नमाज़ के आयोजन को रोकना, इस देश के नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन समझा जाता है।

विलायत पोर्टलः बहरैन के मानवाधिकार संघ ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा कि दराज़ की जामे मस्जिद में जुमे की नमाज़ के आयोजन को रोकना, इस देश के नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन समझा जाता है। दराज़ क्षेत्र की जामा मस्जिद, शीया मुसलमानों की सबसे बड़ी जामा मस्जिद समझी जाती है। मानवाधिकार संघ ने अपने बयान में कहा कि बहरैन सरकार की यह कार्यवाही, धार्मिक बैठकों के क़ानूनों के ख़िलाफ़ है। बहरैन के मानवाधिकार संघ के प्रमुख यूसुफ़ रबीअ ने कहा कि इस देश के शीया मुसलमानों को नमाज़े जुमा आयोजित करने से रोकना, पूछताछ के लिए धर्मगुरूओं को तलब करना तथा धार्मिक संगठनों को भंग करना, ग़ैर क़ानूनी फ़ैसले और हिंसक नीतियों का निशान है। बहरैनी जनता ख़ासकर इस देश के शीया मुसलमानों पर आले ख़लीफ़ा शासन की तरफ़ से अलग-अलग तरह की पाबन्दियों, ऐसी स्थिति में हैं कि कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून ने भी अपने बयान में जनता की आस्थाओं और पवित्र चीज़ों के अनादर की निंदा करते हुए ज़ोर दिया था कि लोगों की धार्मिक आस्थाओं, प्रतीकों, इतिहासों और मूल्यों का अनादर ख़त्म होना चाहिए लेकिन आले ख़लीफ़ा शासन का व्यवहार इस बात का साफ़ निशान है कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और अधिकारियों की प्रतिक्रिया को आले ख़लीफ़ा शासन कोई अहमियत नहीं देता। बहरैन का आले ख़लीफ़ा शासन एक अत्याचारी शासन है जिसने जनता के समस्त अधिकारियों का हनन करता है। आले ख़लीफ़ा शासन ने जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के लिए अलग-अलग तरह की दमनात्मक शैलियों को इस्तेमाल करता है लेकिन वह यह भूल गया कि इस तरह की कार्यवाहियों से जनता के मनोबल को नहीं तोड़ा जा सकता।
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तेहरान रेडियो


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