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Date of publication : 25/6/2016 18:47
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ईरान से दुश्मनी अमेरीकी की पुरानी नीति है।

अमेरीकी सिनेट में वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य क्रिस्टोफ़र एंड्रयू कून्ज़ ने शुक्रवार को अमेरीकी सिनेट की विदेश संबंध परिषद की एक बैठक में कहा कि ईरान अभी भी क्रान्तिकारी व ख़तरनाक है और कई दशकों तक संभावित परमाणु ख़तरा बना रहेगा।


विलायत पोर्टलः अमेरीकी सिनेट में वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य क्रिस्टोफ़र एंड्रयू कून्ज़ ने शुक्रवार को अमेरीकी सिनेट की विदेश संबंध परिषद की एक बैठक में कहा कि ईरान अभी भी क्रान्तिकारी व ख़तरनाक है और कई दशकों तक संभावित परमाणु ख़तरा बना रहेगा। इस अमेरीकी सिनेटर ने कहा कि जेसीपीओए ईरान के व्यवहार को बदलने के लिए नहीं बल्कि उसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कंट्रोल किया है। अमेरीका इस बहाने से जिसे वह जेसीपीओए की परिधि से बाहर ईरान की भड़काउ गतिविधियों का नाम देता है, ईरान के ख़िलाफ़ नई प्रतिबंध लगाने की कोशिश में है। इस सिलसिले में अमेरीकी वित्त मंत्रालय ने ईरान के ख़िलाफ़ दूसरी पाबंदी लगाई जो परामणु पाबंदियां ख़त्म होने के बावजूद अभी भी जारी है। इसी परिप्रेक्ष्य में अमेरीका में फ़ायनेन्शल एक्शन टास्क फ़ोर्स ने 2008 में ईरान का नाम उन देशों की सूचि में रखा जो वित्तीय दृष्टि से ख़तरनाक समझे जाते हैं और बैंकों को ईरान के साथ लेन-देन करने की तरफ़ से चेतावनी दी। अमेरीका की नज़र में ईरान ज़िम्मेदार सरकार नहीं है। अमेरीकी सिनेटर क्रिस्टोफ़र एंड्रयू कून्ज़ का बयान भी इसी दृष्टिकोण को दर्शाता है। फ़िलिस्तीनी व यमनी राष्ट्र के अधिकारों का समर्थन, इराक़ और सीरिया में आतंकवादी गुटों से मुक़ाबले के लिए इन देशों को फ़ौजी परामर्श देना और ईरान का बलिस्टिक मीज़ाईल कार्यक्रम अमेरीका की नज़र में ईरान को ग़ैर ज़िम्मेदार साबित करता है। ईरान के ख़िलाफ़ माहौल बनाने की कोशिश ऐसी स्थिति में है पिछले एक साल में ईरान ने जेसीपीओए से संबंधित अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है जबकि इस संदर्भ में सामने वाले पक्ष में ख़ास तौर से अमेरीका ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया है। कुछ पाबंदियां हटी हैं जबकि विदेशी बैंकों के साथ ईरान के लेन-देन के रास्ते में अभी भी मुश्किलें मौजूद है। अस्ल बात यह है कि अमेरीका की दुश्मनी सिर्फ़ जेसीपीओए तक सीमित नहीं है। यह दुश्मनी अमेरीकी नेताओं के दृष्टिकोण से आए दिन ज़ाहिर होती है। यह दृष्टिकोण ईरान से अमेरीका की गहरी दुश्मनी को दर्शाता है और सुप्रीम लीडर के शब्दों में यह दुश्मनी इस बात का पता देती है कि अमेरीका की अस्लियत नहीं बदली है और ईरान से मुक़ाबले में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्ज़ में कोई फ़र्क़ नहीं है।
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तेहरान रेडियो


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