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Date of publication : 30/6/2016 18:45
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शैख़ ईसा क़ासिम ने किया बहरैन छोड़ने से इन्कार।

बहरैन के शिया वरिष्ठ धर्म गुरू शैख़ ईसा क़ासिम ने ऐलान किया है कि वह देश से निकलने के लिए आले ख़लीफ़ा शासन के साथ किसी भी तरह की मध्यस्थता के विरोधी हैं। कहते हैं कि बहरैन सरकार ने इस देश के वरिष्ठ धर्म गुरू शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता ख़त्म कर दी है।

विलायत पोर्टलः बहरैन के शिया वरिष्ठ धर्म गुरू शैख़ ईसा क़ासिम ने ऐलान किया है कि वह देश से निकलने के लिए आले ख़लीफ़ा शासन के साथ किसी भी तरह की मध्यस्थता के विरोधी हैं। कहते हैं कि बहरैन सरकार ने इस देश के वरिष्ठ धर्म गुरू शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता ख़त्म कर दी है। आले ख़लीफ़ा शासन की यह कार्यवाही नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन समझी जाती है और इस पर विश्व स्तर पर प्रतिक्रियाएं लागातार आ रही हैं। शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता ख़त्म करने के फ़ैसले के बाद पूरे देश में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। बहरैन के हज़ारों लोगों ने शुक्रवार की रात दराज़ में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने बहरैन सरकार से मांग की है कि वह शैख़ ईसा के बारे में अपने फ़ैसले को वापस ले। यह प्रदर्शन ऐसी स्थिति में आयोजित किए गए कि सुरक्षा बलों ने दराज़ इलाक़े का भीषण परिवेष्टन कर रखा था। प्रदर्शनकारी शैख़ ईसा क़ासिम के घर के सामने एकत्रित हुए और उन्होंने कहा कि वह शैख़ ईसा क़ासिम को किसी भी तरह की हानि नहीं होने देंगे। बहरैन के धर्मगुरूओं ने भी सरकार को होशियार किया है कि वह जनता पर अपने अतिक्रमपणों का क्रम बंद करे। प्रत्येक दशा में बहरैन के हालिया परिवर्तन इस बात के सूचक हैं कि इस देश की स्थिति बहुत ही ज्वलंत हो गई है और शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द करने का फ़ैसला, आग में घी का काम करेगा। यही वजह है कि ईरान और दुनिया के विभिन्न देशों ने आले ख़लीफ़ा सरकार को होशियार किया है कि वह अपने इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करे नहीं तो बहरैन की जनता दूसरा विकल्प चुनने पर मजबूर हो जाएगी जो इलाक़े और इस देश के हित में नहीं होगा।
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तेहरान रेडियो


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