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Date of publication : 8/7/2016 23:36
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मुसलमानों के बीच एकता को मज़बूत करने पर सुप्रीम लीडर ने ज़ोर दिया।

इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर ने दुश्मनों के मतभेद फैलाने की साज़िश के मुक़ाबले में होशियार रहने पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस्लामी समुदाय को नुक़सान पहुंचाने के लिए साम्राज्यवादियों और ज़ायोनियों की सबसे प्रमुख प्राथमिकता मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करना है।


विलायत पोर्टलः इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर ने दुश्मनों के मतभेद फैलाने की साज़िश के मुक़ाबले में होशियार रहने पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस्लामी समुदाय को नुक़सान पहुंचाने के लिए साम्राज्यवादियों और ज़ायोनियों की सबसे प्रमुख प्राथमिकता मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करना है। उन्होंने ईद के नमाज़ के अपनी स्पीच में मुसलमानों को ईद की बधाई दी और इस्लामी देशों को कमज़ोर करने के लिए दुश्मनों के साज़िशों को बयान करते हुए कहा कि इस्लामी देश अपने मतभेद भुलाकर तथा अपनी संभावनाओं से भरपूर फ़ायदा उठाकर इस्लामी समाज के विकास और उसकी तरक़्क़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सुप्रीम लीडर हमेशा इस्लामी एकता व आपसी भाई चारे पर ज़ोर देते हैं और कहते हैं कि मुसलमान देशों में समरस्ता की भावना के कमज़ोर हो जाने से मुस्लिम देशों में दुश्मनों के वर्चस्व की भूमिका प्रशस्त होगी। सुप्रीम लीडर के अनुसार, इस्लामी देश अपनी समरस्ता की भावना को मज़बूत करके इलाक़े खासकर फ़िलिस्तीन में दुश्मनों के साज़िशों के असर और उसके क्रियान्वयन को रोक सकते हैं। इस्लामी रीवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर ने अपने बयान में इराक़, तुर्की, बांग्लादेश और कुछ दूसरे देशों में होने वाले धमाकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस साल कुछ देशों में आतंकियों के हाथों जो अपने मालिकों के आदेश के अनुसार असली इस्लाम के स्थान पर जाली इस्लाम फैलाना चाहते हैं, ईद का दिन शोक दिवस में बदल गया और यह अपराधिक कार्यवाही अमेरीका ब्रिटेन और ज़ायोनी शासन की इंटेलीजेन्स एजेंसियों द्वारा पाले गए आतंकियों की करतूत है। इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर ने यह बयान करते हुए कि इलाक़े में युद्ध और अशांति फैलाने के पीछे साम्राज्यवादी शक्तियों के मुख्य लक्ष्य फ़िलिस्तीन के मुद्दे को भुला देना है, कहा कि फ़िलिस्तीन की आज़ादी के लिए संघर्ष एक इस्लामी और सर्वव्यापी संघर्ष है और इस संघर्ष को जारी रखना सभी मुसलमानों का दायित्व है जबकि फ़िलिस्तीन को एक आतंरिक या अरब मामले के रूप में सीमित करना बहुत बड़ी ग़लती है। जैसा कि सुप्रीम लीडर ने कहा कि आंशिक मामलों में मुस्लिम देशों के उलझ जाने की वजह फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के ख़िलाफ़ ज़ायोनियों के अपराधों में वृद्धि हो गई है। यही वजह है कि पिछले एक साल में ज़ायोनी शासन ने सीरिया, इराक़ और यमन संकट से उत्पन्न वातावरण से फ़ायदा उठाते हुए फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ अपराध ज़्यादा कर दिए हैं और इस देश की जनता के ख़िलाफ़ अपनी वर्चवस वादी अपराधों को बढ़ा दिया है, ग़ज़्ज़ा का परिवेष्ठन कड़ा कर दिया है और अक्तूबर से अब तक 225 फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, ज़ायोनियों के लिए हज़ारों घर फ़िलिस्तीनियों की धरती पर तैयार किए जा चुके हैं। यही वजह है कि सुप्रीम लीडर ने मुसलमानों से अपील की है कि वह अपने आपसी मतभेद भुलाकर इस्लामी जगत के ख़ास मुद्दे यानी फ़िलिस्तीन पर अपना ध्यान लगाएं। .....................तेहरान रेडियो  


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