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Date of publication : 16/8/2016 22:39
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अल्लामा हिल्ली कौन थे?

अल्लामा हिल्ली र.ह ने अरबी साहित्य, न्यायशास्त्र, उसूल, फ़िक़्ह, हदीस और कलाम की शिक्षा, समय के प्रख्यात शिक्षकों से हासिल की थी और यहां तक कि वह खुद बड़े और नामवर बुद्धिजीवियों में गिने जाने लगे। वह इल्म हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे और अपना ज्यादातर समय लिखने और पढ़ने में लगाते थे




विलायत पोर्टलः हुसैन इब्ने यूसुफ़ इब्ने अली इब्ने मुतह्हर हिल्ली, जिन्हें अल्लामा हिल्ली के नाम से जाना जाता है, इस्लाम और शिया मज़हब के नामवर और मशहूर आलिम थे।
अल्लामा हिल्ली र.ह रमज़ान के महीने में सन 648 हिजरी क़मरी में हिल्ला शहर में पैदा हुए। और मुहर्रम के महीने में सन 726 हिजरी क़मरी में उसी शहर में इस दुनिया से कूच कर गए और नजफ़े अशरफ़ में अमीरुल मोमिनीन अ. के रौज़ा में दफ़्न किए गए। वह इस्लामी दुनिया और शिया मज़हब के एक प्रख्यात आलिमे दीन थे।
उनके पिता, शेख़ शदीदुद्दीन यूसुफ इब्ने अली इब्ने मुतह्हर हिल्ली प्रख्यात उल्मा में से थे और बड़े इल्मी और सामाजिक व्यक्तित्व के मालिक थे।
अल्लामा हिल्ली र.ह ने अरबी साहित्य, न्यायशास्त्र, उसूल, फ़िक़्ह, हदीस और कलाम की शिक्षा, समय के प्रख्यात शिक्षकों से हासिल की थी और यहां तक कि वह खुद बड़े और नामवर बुद्धिजीवियों में गिने जाने लगे। वह इल्म हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे और अपना ज्यादातर समय लिखने और पढ़ने में लगाते थे, यहाँ तक कि जब सुल्तान मोहम्मद ख़ुदाबंद के पास थे तब भी उन्होंने पढ़ाई और लिखाई का अपना काम जारी रखा।
अल्लामा हिल्ली र.ह उलमा-ए-इस्लाम की नज़र में
अल्लामा हिल्ली की इल्मी और आध्यात्मिक शान और महानता के बारे में बहुत से उल्मा की बातें हम तक पहुंची हैं, कि उन सबको बयान करने के लिए अलग से एक किताब लिखने की ज़रूरत है, लेकिन यहां हम उनमें से कुछ उल्मा के विचारों की ओर इशारा करने पर संतोष करते हैः
1.    जब ख्वाजा नसीरुद्दीन तूसी से हिल्ला से लौटने पर हिल्ला के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने अल्लामा हिल्ली की बेमिसाल योग्ता और इल्म की ओर इशारा किया।
2.    इब्ने हजर असक़लानी कहते हैं: इब्ने यूसुफ इब्ने मतह्हर हिल्ली शियों के आलिम और उनके रहनुमा और महान लेखक हैं। वह समझबूझ में अल्लाह की निशानी थे। उन्होंने इब्ने हाजिब की किताब “अलमुख़तसर” की बड़ी ख़ूबसूरत व्याख्या की है। वह बड़े अच्छे व्यहवार और चरित्र के मालिक थे।
3.    सैयद मुस्तफा तफ़रशी कहते हैं: “अल्लामा हिल्ली इतने सदाचार और शान वाले थे कि बेहतर है उनकी तारीफ़ में ज़बान न खोली जाए, क्योंकि उनके बारे में मेरी तारीफ़ें उनकी शान में किसी तरह की बढ़ोत्तरी नहीं कर सकती हैं। उन्होंने 70 से अधिक किताबें लिखी हैं और उनमें से हर किताब उनकी महानता और बेमिसाल व्यक्तित्व की निशानी है।
4.    रौज़ातुल जन्नात के लेखक कहते हैं: ज़माने ने उनकी जैसी हस्ती नहीं देखी है और उनके गुणों को बयान करने से ज़बान असमर्थ है। उनके पहले और उनके बाद वाले उल्मा व बुद्धिजीवियों में कोई उनका जैसा नहीं था और आज तक किसी ने उनकी शान के अनुसार उनकी तारीफ़ नहीं की है।
5.    मुहद्दिस नूरी कहते हैः बुज़ुर्ग और महान शेख, अल्लामा हिल्ली, इल्म का सागर, मार्गदर्शन और मर्यादा के रक्षक, गुमराही की आवाज़ को तोड़ने वाले, धर्म के रक्षक, वह इस्लामी उल्मा और बुद्धिजीवियों में चौदहवीं के चाँद की तरह सितारों में चमकते थे।
6.    सैयद मोहसिन अमीन आमुली कहते हैः “अल्लामा हिल्ली ऐसे इंसान हैं जिनके इल्म को सभी ने स्वीकार किया है और कोई भी उल्मा के बीच उनकी तरह मशहूर नहीं हुआ।


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