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Code : 183211
Date of publication : 21/8/2016 13:10
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हज़रत अली अ. की दूसरे सहाबा पर बरतरी एंव श्रेष्ठता।

पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने जनाब फ़ातिमा ज़हरा (अ.) से फ़रमाया: तुम्हारा शौहर मेरी उम्मत में सबसे श्रेष्ठ व अफ़ज़ल है दूसरों से पहले इस्लाम लाया और उसके इल्म व सहनशीलता को दूसरों पर बरतरी हासिल है....................


विलायत पोर्टलः पिछले लेख “पैग़म्बरे इस्लाम स. और अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ. से मोहब्बत” में हमने जिन हदीसों को बयान किया उनसे अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अ. की श्रेष्ठता पूरी तरह से स्पष्ट हो जाती है क्यूँकि हज़रत अली अ. ही पैग़म्बरे इस्लाम स. की निगाह में सबसे अधिक प्रिय थे। रसूले अकरम स. की मोहब्बत या नफ़रत का कारण व्यक्तिगत इच्छाएं या सामयिक भावनाएं नहीं हो सकती हैं बल्कि उसका मौलिक आधार आपके इल्म व कूटनीति पर आधारित है इसलिए आपके निकट हज़रत अली अ. की सबसे अधिक लोकप्रियता का भी केवल यही कारण है, इसके अलावा बहुत ज़्यादा ऐसी हदीसें भी मौजूद हैं जो आपकी श्रेष्ठता को सिद्ध करती हैं जैसा कि खुद आयते मुबाहेला से भी यही साबित होता है क्यूंकि उसमें हज़रत अली अ. को पैग़म्बरे इस्लाम स. की आत्मा बताया गया है। चूँकि पैग़म्बरे इस्लाम स. सारे इंसानों के बीच सबसे सर्वोत्तम व सर्वश्रेष्ठ हैं इसलिए जो आपकी आत्मा होगी उसके अंदर भी यह विशेषता ज़रूर पाई जाएगी।जनाब आएशा से सवाल किया गया: रसूले इस्लाम स. के सहाबा में सबसे सर्वश्रेष्ठ कौन है? उन्होंने कहाः अबू बक्र, उमर, उस्मान، तलहा व ज़ुबैर तो उनसे सवाल किया गया तो फिर अली अ. का क्या स्थान है? उन्होंने ने जवाब दिया तुमने मुझसे पैग़म्बरे इस्लाम स. के सहाबा के बारे में सवाल किया था न कि उसके बारे में कि जो नफ़्से पैग़म्बर अर्थात पैग़म्बर की आत्मा के समान है फिर उन्होंने आयते मुबाहेला पढ़ी और अंत में कहा: पैग़म्बर स. के अस्हाब उसके समान कैसे हो सकते हैं कि जो मानो नफ़्से पैग़म्बर अर्थात पैग़म्बर की आत्मा है।(बैहक़ी की किताब अल-महासिन भाग 1 पृष्ठ 39, अल-इमाम सादिक़ वल मज़ाहिबुल अरबआ भाग 1 पृष्ठ 574)अहमद इब्ने हम्बल के बेटे अब्दुल्लाह ने उनसे पूछाः खलीफ़ाओं की श्रेष्ठता के बारे में आपका क्या ख़्याल है? तो उन्होंने ने कहा: अबू बक्र, उमर, उस्मान, क्रमानुसार एक दूसरे से श्रेष्ठ हैं तो अब्दुल्लाह ने कहा कि फिर अली इब्ने अबी तालिब अ. का स्थान कहाँ हैं?इमाम हम्बल ने जवाब दिया: ऐ मेरे बेटे, अली इब्ने अबी तालिब अ. उस परिवार से सम्बंध रखते हैं जिससे किसी की तुलना नहीं की जा सकती। (तबक़ातुल हनाबेला भाग 2 पृष्ठ 120, अल-इमाम सादिक़ वल मज़ाहिबुल अरबआ भाग 2 पृष्ठ 575)पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने जनाब फ़ातिमा ज़हरा (अ.) से फ़रमाया: तुम्हारा शौहर मेरी उम्मत में सबसे श्रेष्ठ व अफ़ज़ल है दूसरों से पहले इस्लाम लाया और उसके इल्म व सहनशीलता को दूसरों पर बरतरी हासिल है।(अल-मनाक़िब लेख़क ख़तीब ख़्वारज़मी अध्याय 9 हदीस 111 पृष्ठ 106)انّ زوجك خير امّتي اقدمهم اسلاما و اكثرهم علما و افضلهم حلماजब रसूले इस्लाम स. की सेवा में एक भुना हुआ मुर्ग़ा लाया गया तो आपने अल्लाह तआला से यह दुआ की कि अपने सबसे महबूब बंदे को मेरे पास भेज दे ताकि वह इसे मेरे साथ खा सके। उसी समय हज़रत अली अ. आपकी सेवा में पहुँचे।(अल-मनाक़िब हदीस, 113, 114, 107, 108, हदीस के प्रमाण और दलालत के बारे में बहुत चर्चा की गई है इस हदीस के  बारे में और अधिक विस्तार पूर्वक चर्चा अल्लामा मीर हामिद हुसैन हिन्दी की किताब अबक़ातुल अनवार में मौजूद है।)जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी से रिवायत है कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने हज़रत अली (अ.) के बारे में आपसे यह कहाःانّه اوّلكم ايمانا معي، و اوفاكم بعهد اللّه تعالى و اقومكم بامراللّه و اعدلكم في الرعية و اقسمكم بالسويّة و اعظمكم عنداللّه مزيةअली (अ.) तुम लोगों में सबसे पहले मुझ पर ईमान लाने वाले, सबसे ज़्यादा अल्लाह तआला के वचन के प्रति अमल करने वाले, दीन के कामों में सबसे ज़्यादा सुदृढ़, जनता के बीच न्याय एंव निष्पक्षता से काम लेने वाले और बैतुलमाल (इस्लामी कोषागार) में बराबर से बाटने वाले हैं और उनका स्थान व मरतबा अल्लाह तआला के निकट तुम सबसे उच्च व सर्वश्रेष्ठ है।जाबिर उसके बाद कहते हैं कि यह आयतःانّ الذين آمنوا و عملوا الصالحات اولئك هم خير البريّةहज़रत अली अ. के बारे में नाज़िल हुई है, इसी तरह वह कहते हैं: जब कभी भी हज़रत अली (अ.) आते थे तो लोग कहते थे ख़ैरुल बरीयः आ गए। (दूसरे सहाबा पर हज़रत अली अ. की श्रेष्ठता के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चाएं की गई हैं और आपकी श्रेष्ठता का अक़ीदा केवल शियों से विशेष नहीं है बल्कि बहुत से मोतज़ेली उल्मा (विशेष रूप से बग़दाद के मोतज़ेला) का यही दृष्टिकोण है, इब्ने अबिल हदीद ने नह्जुल बलाग़ा की व्याख्या में विभिन्न स्थानों पर विस्तार से रौशनी डाली है। मोतज़ेला की सबसे महत्वपूर्ण हस्ती जिसने इस बारे में चर्चा की है वह अबू जाफ़र इसकाफ़ी हैं, उन्होंने अपनी दो किताबें नक़ज़ो उस्मानियते जाहिज़ (نقض عثمانية جاحظ) और वल मेअयारो वल मुवाज़ेनः (و المعيار و الموازنة)  इसी संदर्भ में लिखा हैं और मज़बूत प्रमाणों के साथ दूसरों पर हज़रत अली अ. की श्रेष्ठता सिद्ध की है।)इस बारे में बहुत सारी हदीसें मौजूद हैं जिनको इस स्थान पर बयान करने की गुंजाईश नहीं है, उल्लिखित बातों के दृष्टिगत यह कहा जा सकता है कि शिया समुदाय की नींव इस्लाम के साथ ही पैग़म्बरे इस्लाम (स.) के शुभ हाथों से रखी गई थी अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम ने तौहीद व नुबूव्वत की घोषणा के साथ इमामत को भी बयान कर दिया था और दूसरी ओर अपने व्यवहार से हज़रत अली (अ.) की महानता को सबकी निगाहों में इस तरह स्पष्ट कर दिया था कि उस ज़माने के कुछ मुसलमान आपकी प्रमुखता व श्रेष्ठता के अनुरागी हो गए थे। ऐसे लोग मुसलमानों के बीच हज़रत अली (अ.) के शियों के रूप में पहचाने जाते थे।इस रूचि में इसलिए भी वृद्धि हो रही थी कि रसूले इस्लाम (स.) खुलेआम हज़रत अली (अ.) के शियों की सराहना करते थे और उन्हें आख़ेरत में कामयाब होने वालों में बताते थे।रसूले अकरम (स.) के देहांत के बाद जब आपकी ख़िलाफ़त और उत्तराधिकार का मुद्दा सामने आया तो जो लोग रसूले इस्लाम स. के ज़माने में आपके प्रति सबसे अधिक निष्ठावान व वफ़ादार थे और आपके शिया समझे जाते थे उन्होंने इमामत के बारे में मौजूद नुसूस और हज़रत अली (अ.) की महानता के आधार पर आपकी बिला फ़स्ल ख़िलाफ़त और इमामत का समर्थन किया और यह लोग दूसरों के शासन व ख़िलाफ़त को अवैध समझते थे, यद्धपि उन्होंने अपने मौला के आज्ञापालन और इस्लाम व मुसलमानों के हितों के अंतर्गत संतोष व सहनशीलता से काम लिया और सहिष्णुता का रास्ता अपनाया और तार्किक शैली से विवेचन के अलावा और कोई काम अंजाम नहीं दिया बल्कि जहाँ तक मुसलमानों और इस्लाम के हितों की बात थी वह खुलफ़ा का सहयोग भी करते थे।


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