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Date of publication : 27/8/2016 20:25
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बाप की ज़िम्मेदारी

एक दिन कुछ बच्चे रास्ते में खेल रहे थे उधर से पैग़म्बरे इस्लाम स. का गुज़र हुआ जैसे ही आपकी निगाह उन बच्चों पर पड़ी तो आपने अपने सहाबा को उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए फ़रमायाः अफ़सोस हो आख़री ज़माने के उन बच्चों पर जिनके बाप उनके प्रशिक्षण पर ध्यान नहीं देंगे....................


विलायत पोर्टलः एक दिन कुछ बच्चे रास्ते में खेल रहे थे उधर से पैग़म्बरे इस्लाम स. का गुज़र हुआ जैसे ही आपकी निगाह उन बच्चों पर पड़ी तो आपने अपने सहाबा को उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए फ़रमायाः अफ़सोस हो आख़री ज़माने के उन बच्चों पर जिनके बाप उनके प्रशिक्षण पर ध्यान नहीं देंगे।
सहाबियों ने यह सोचते हुए कि शायद पैग़म्बर स. की मुराद मुश्रिकों के बच्चे हैं कि जिनके प्रशिक्षण पर उनके बाप ध्यान नहीं देते हैं पैग़म्बर स. से कहाः ऐ अल्लाह के रसूल के आपकी मुराद मुश्रिक हैं? पैग़म्बरे इस्लाम स. ने फ़रमायाः नहीं, मेरी मुराद वह मुसलमान बाप हैं जो अपने बच्चों को दीन की बातें और शरई ज़िम्मेदारी नहीं बताते हैं और अगर उनके बच्चे दीन की कुछ बातें सीखना भी चाहते हैं तो वह उनके रास्ते में रूकावटें खड़ी करते हैं। पैग़म्बर स. के सहाबा यह सुनकर आश्चर्य चकित रह गए कि क्या ऐसे भी बाप हैं।
पैग़म्बर स. ने जब उनके चेहरों पर आश्चर्य के भाव देखे तो बोले कि हां ऐसे बाप भी हैं जो केवल अस बात पर संतुष्ट हैं कि उनके बच्चे बस कुछ माल व दौलत इकट्ठा कर लें। उसके बाद आपने फ़रमायाः मैं ऐसे बापों से बेज़ार हूं और वह मुझसे बेज़ार हैं। (मुस्तदरकुल वसाएल भाग 2 पेज 625)
क्या हमें पता हैं कि?? आज के दौर में भी अधिकतर बच्चों और नौजवानों का दीनी बातों पर ध्यान न देने का कारण मां बाप का इस मसले को महत्व न देना है। अगर हम चाहते हैं कि हमारी गिनती उन बाप में न हो जिन पर पैग़म्बर स. ने धिक्कार की है तो आइये आज से अपने बच्चों को दीन की बताने की क़सम खाएं और हमेशा उस पर अमल करें।


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