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Code : 184277
Date of publication : 21/11/2016 18:44
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कुवैत के इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य समझौता, अमेरिका से खरीदेगा 10 अरब डॉलर का हथियार।

कुवैत की सरकार ने घोषणा की है कि अपनी सैनिक क्षमता को मजबूत करने के लक्ष्य से उसने अमेरिका से 10 अरब डॉलर मूल्य का समझौता किया है।
विलायत पोर्टलः कुवैत की सरकार ने घोषणा की है कि अपनी सैनिक क्षमता को मजबूत करने के लक्ष्य से उसने अमेरिका से 10 अरब डॉलर मूल्य का समझौता किया है। इस समझौते के अनुसार कुवैत अमेरिका से कुछ F18 युद्धक विमानों को खरीदेगा। कुवैत के इतिहास का यह सबसे बड़ा सैन्य समझौता है। कुवैत की सरकार इससे पहले विस्तृत पैमाने पर सैनिक हथियार व सैन्य संसाधान नहीं खरीदती थी परंतु तेल की कीमत कम होने के बावजूद पिछले एक वर्ष से वह सैनिक उपकरण खरीदने पर ध्यान देने लगी है। कुवैत के उप विदेशमंत्री खालिद जारल्लाह ने घोषणा की है कि यह देश वर्ष 1991 में इराक से फार्स खाड़ी युद्ध के समय से अब तक अमेरिका से 25 अरब डॉलर मूल्य का हथियार ख़रीद चुका है। फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के सदस्य देशों द्वारा अमेरिकी सैनिकों की मेज़बानी का मुख्य कारण इन देशों की सुरक्षा बताया जाता है परंतु इन देशों की सुरक्षा की आपूर्ति से कहीं अधिक अमेरिका फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के सदस्य देशों के साथ सैनिक सहकारिता से लाभ उठाता है। अमेरिकी आय का एक मुख्य स्रोत विभिन्न देशों विशेषकर फार्स खाड़ी के तटवर्ती अरब देशों के हाथों, हथियारों की बिक्री है। वर्ष 2014 में अमेरिका ने 24 अरब डॉलर का हथियार बेचा जो विश्व में कुल हथियारों के निर्यात का एक तिहाई था। इस प्रकार उस वर्ष वह हथियारों की बिक्री करने वाला विश्व का सबसे बड़ा देश था। 24 अरब डॉलर के हथियार में से नौ अरब डॉलर का हथियार केवल फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के सदस्य देशों को बेचा। फार्स खाड़ी के अरब देशों द्वारा हथियारों की खरीदारी के बारे में रिपोर्टें ऐसी स्थिति में प्रकाशित हो रही हैं जब विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं ने घोषणा की है कि तेल से होने वाली आय के कम होने के कारण फार्स खाड़ी के देशों को आर्थिक संकट और अरबों डालर के बजट घाटे का सामना है। इस प्रकार की स्थिति में कुछ टीकाकारों का मानना है कि क्षेत्र के अरब देशों की ओर से हथियारों की खरीदारी पश्चिम विशेषकर अमेरिका को आर्थिक संकट से निकालने और हथियार बनाने वाली कंपनियों को दिवालिया होने से रोकना है। साथ ही इस बिन्दु को भी नहीं भूलना चाहिये कि पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिका फार्स खाड़ी के अरब देशों को हथियार बेचकर उन डालरों को वापस लेने की चेष्टा में हैं जो डॉलर तेल खरीदने के लिए उन्होंने इन देशों को दिया है।
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तेहरान रेडियो


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