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Code : 184333
Date of publication : 24/11/2016 18:35
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आईएस अफ़गानिस्तान सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है।

आतंकवादी गुट आईएस ने अफ़गानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में हमलों को तेज़ करके इस देश के सुरक्षा तंत्र के समक्ष गम्भीर चुनौती खड़ी कर दी है।
विलायत पोर्टलः आतंकवादी गुट आईएस ने अफ़गानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में हमलों को तेज़ करके इस देश के सुरक्षा तंत्र के समक्ष गम्भीर चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया दिनों में अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर काबुल में होने वाला आतंकवादी हमला इस देश के आम जनमत में सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न होने का कारण बना है। हालिया दिनों में काबुल में बाक़िरुल उलूम मस्जिद और इसी प्रकार हेरात में रेज़ाइया नामक शीया मस्जिदों में आतंकवादी हमले हुए थे जिनमें बड़ी संख्या में लोग हताहत व घायल हुए थे। इन हमलों के संबंध में दो बिन्दु उल्लेखीय हैं। पहला बिन्दु यह है कि यह हमला शीया मुसलमानों पर वह भी इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का शोक मनाने वालों पर किया गया और उसे साम्प्रदायिकता को हवा देने के लक्ष्य से किया गया हमला माना जा रहा है और अफगान अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के हमले मुख्य रूप से देश की सीमाओं से बाहर साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा संचालित किये जाते हैं। आतंकवादी गुट आईएस ने काबुल में होने वाले हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है और उसने अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति की घोषणा भी कर दी है जिसके दृष्टिगत अफगानिस्तान के सुरक्षा तंत्रों और इस देश की सरकार को इस आतंकवादी गुट की अफगानिस्तान में उपस्थिति को हल्के में नहीं लेना और उसकी गतिविधियों से अपनी आंखों को नहीं मूंदना चाहिये। वास्तव में आतंकवादी गुट आईएस ने अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में हमलों को तेज़ करके इस देश के सुरक्षा तंत्र के समक्ष गम्भीर चुनौती खड़ी कर दी है। अफगानिस्तान में होने वाले हालिया हमलों के संबंध में दूसरा ध्यान योग्य बिन्दु सुरक्षा को सुनिश्चित बनाये जाने के संबंध में अफगान सुरक्षा बलों के क्रिया- कलाप हैं। क्योंकि अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों को इस बात की पूरी जानकारी है कि दाइश, लश्के झंगवी और हक्कानी जैसे आतंकवादी गुट इस देश में सक्रिय हैं और वे किसी भी समय आतंकवादी हमले कर सकते हैं। इस आधार पर काबुल की एक बड़ी मस्जिद में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का शोक मनाने वाले शीया मुसलमानों की सुरक्षा को सुनिश्चित न बना पाने को एक प्रकार से अफगान सुरक्षा बलों की कमज़ोरी समझी जा रही है। बहरहाल अफगान जनता की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी है और सरकार की ओर से केवल आतंकवादी हमलों की भर्त्सना काफी नहीं है क्योंकि लोग वर्षों के युद्ध और अतिग्रहण के बाद अपनी और अपनी संतान के लिए शांति व सुरक्षा के इच्छुक हैं।
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तेहरान रेडियो


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