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Code : 184419
Date of publication : 1/12/2016 17:23
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अमेरीकी जंगी जहाज़ों का सीरियाई सैनिकों के ठिकानों पर हमला।

अमेरीकी रक्षामंत्रालय पेन्टागन की जांच समिति ने सीरिया के दैरिज़्ज़ूर में सीरियाई सैनिकों के ठिकानों पर अमेरीकी युद्धक विमानों के हमले को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है।
विलायत पोर्टलः अमेरीकी रक्षामंत्रालय पेन्टागन की जांच समिति ने सीरिया के दैरिज़्ज़ूर में सीरियाई सैनिकों के ठिकानों पर अमेरीकी युद्धक विमानों के हमले को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। इस संबंध में अमेरीकी रक्षामंत्रालय ने अपनी जांच के परिणाम का ऐलान किया है। इस हमले पर रूस के कड़े विरोध के बाद अमेरीका इस मामले की जांच करने पर मजबूर हुआ और उसने हमले के कारणों का पता लगाने के लिए एक समिति का गठन किया। पेन्टागन की जांच समिति के प्रमुख ने सीरियाई सैनिकों के ठिकानों पर अमेरीकी युद्धक विमानों के हमले के औचित्य में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह हमला ग़लती से हुआ, इसमें शत्रुता का कोई आयाम नहीं था और यह केवल इंसानी ग़लती का परिणाम था। दैरिज़्ज़ूर में सीरियाई सैनिकों के ठिकानों पर अमेरीका के हवाई हमले में इस देश के 62 सैनिक मारे गये थे। कहा जाता है कि सीरियाई सैनिकों पर अमेरीका के युद्धक विमानों का हमला, आईएस द्वारा सीरियाई सेना की छावनी पर नियंत्रण की भूमिका बना और उसके बाद ही आईएस के आतंकियों ने सीरियाई सैनिकों की छावनी पर कंट्रोल कर लिया। इस समाचार से पता चला कि सीरिया में आतंकियों और अमेरीका के मध्य एक प्रकार की साठगांठ है। यह ऐसी स्थिति में है कि अमेरीका, सीरियाई सैनिकों की छावनी पर हमले और इस छावनी में मौजूद सैनिकों के जनसंहार को ग़लती से हुई घटना बताने का प्रयास कर रहा है किन्तु समस्त प्रमाण इस बात को दर्शाते हैं कि यह कार्यवाही आतंकियों के साथ सांठगांठ से पूर्वनियोजित थी जिसके बाद क्षेत्र में आईएस के आतंकियों ने प्रगति की। अमेरीकी सैनिकों के पास इतने आधुनिक उपकरण है जिससे इस प्रकार की ग़लती की संभावना बहुत ही कम हो जाती है और अमेरीकी सरकार ने इन क्षमताओं के बारे में व्यापक स्तर पर प्रोपेगैंडे भी कर रखे हैं। सैन्य छावनी और आतंकियों के ठिकानों में अंतर करना बहुत ही सरल काम है। बहरहाल सीरिया में सक्रिय आतंकियों के अमेरीका और पश्चिमी देशों की ओर से वित्तीय व सामरिक समर्थन से पता चलता है कि सीरिया संकट के आरंभ से ही अमेरीका इन आतंकवादियों का समर्थक रहा है और अब वह अपने अपराधों पर पर्दा डालने के लिए इंसानी ग़लती का सहारा ले रहा है। सऊदी अरब की ओर से यमन में व्यापक जनसंहार के कारण पूरी दुनिया में रियाज़ सरकार की आलोचना हो रही है और विश्व समुदाय ने सऊदी अरब से यमन पर हमले रोकने और इस शासन को हथियारों की सप्लाई बंद करने की मांग की है। इस संबंध में ह्यूमन राइट्स वॉच ने यमन पर सऊदी अरब के ग़ैर क़ानूनी हमलों की ओर इशारा करते हुए मांग की है कि अमेरीका, रियाज़ को हथियार बेचना बंद करे। वाशिंग्टन में ह्यूमन राइट्स वॉच की प्रबंधक सारा मारगोन ने कहा कि अमेरीका ने ऐसी स्थिति में सऊदी अरब को अरबों डॉलर के हथियार देने का आदेश जारी किया है कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के सैनिक यमन में अस्पतालों, घरों, स्कूलों और शोक सभाओं पर हमले कर रहे हैं। मारगोन ने सऊदी अरब को तुरंत हथियारों की सप्लाई रोकने और यमन में गठबंधन के ग़ैर क़ानूनी हवाई हमलों में कई अमेरीकी सैनिकों की भागीदारी की संभावनाओं पर पुनर्विचार करने की मांग की है। विश्व जनमत ने कई बार पश्चिम द्वारा सऊदी अरब को बड़ी मात्रा में हथियार बेचने की ओर से होशियार किया है। अमेरीका ऐसी स्थिति में फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों को हथियार बेचना आरंभ किया है कि इन हथियारों ने शांति व सुरक्षा में विघ्न पैदा कर दिया है। हालिया वर्षों में पश्चिम ख़ासकर अमेरीका के साथ अरबों डॉलर का सैन्य समझौता, क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अशांति फैलाने सहित सैन्य सहयोग, सऊदी अरब और पश्चिमी सरकारों के मध्य सहयोग का परिणाम है। पश्चिम के हथियारों से सऊदी अरब ऐसी स्थिति में लैस हो रहा है कि कि रियाज़ की कार्यवाहियां, पश्चिमी एशिया में शांति और सुरक्ष के विरुद्ध रही हैं और समस्त प्रमाणों से पता चलता है कि सऊदी अरब गुप्त रूप से और खुलकर तकफ़ीरी आतंकवादियों को लैस कर रहा है।
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तेहरान रेडियो


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