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Date of publication : 5/12/2016 18:0
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आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने की ज़रूरत हैः हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन

भारत के शहर अमृतसर में आयोजित हुए हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के समापन पर एक बयान जारी करके उल्लेख किया गया है कि आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर साझा कोशिशों की ज़रूरत है।
विलायत पोर्टलः भारत के शहर अमृतसर में आयोजित हुए हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के समापन पर एक बयान जारी करके उल्लेख किया गया है कि आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर साझा कोशिशों की ज़रूरत है। इस सम्मेलन की शुरूआत आतंकवाद और युद्ध की मार झेलने वाले अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण के उद्देश्य से इस्तांबूल में सन् 2011 में हुई थी। अमृतसर में छठे हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने पाकिस्तान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण के लिए घोषित राशि को यह कहकर लेने से इनकार कर दिया कि इस्लामाबाद को चरमपंथ और आतंकवाद से लड़ने के लिए इस राशि की अधिक ज़रूरत है। ग़नी ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के समर्थन के लिए पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि उनके देश की सबसे बड़ी मदद यह होगी कि चरमपंथ के समर्थक चरमपंथी गुटों का समर्थन बंद कर दें। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने अफ़ग़ान राष्ट्रपति के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ग़नी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अफ़ग़ानिस्तान को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच प्रभाव की लड़ाई का इस देश की स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। पड़ोसी देशों के बीच गहरे मतभेद अफ़ग़ानिस्तान में शांति व्यवस्था की स्थापना में सबसे बड़ी रुकावट हैं। वास्तविकता यह है कि अफ़ग़ानिस्तान में मादक पदार्थों के उत्पादन का समर्थन और आतंकवादी गुटों का समर्थन न सिर्फ़ इस देश बल्कि पूरे इलाक़े की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि 2016 में अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अब यह बढ़कर 2 लाख 10 हज़ार हेक्टेयर पर फैल गई है। इस बीच, सरताज अज़ीज़ का कहना है कि राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी इस तरह का बयान एक विरोधी देश की धरती पर दे रहे थे और निश्चित रूप से वह वही कह रहे थे जो वे सुनना चाह रहा था। यह सब ऐसी स्थिति में है कि जब अफ़ग़ान जनता को हार्ट ऑफ एशिया जैसे सम्मेलनों और प्रयासों से आशा है कि इससे उनकी समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी और साथ ही पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के साथ मतभेदों का भी समाधान निकलेगा।
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तेहरान रेडियो


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