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Code : 185036
Date of publication : 12/1/2017 17:15
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आले सऊद की मानवता विरोधी नीतियों पर संयुक्त राष्ट्रसंघ की चुप्पी, मानवाधिकारों के हनन का कारण है।

सऊदी अरब की सरकार ने नये वर्ष में अपने विरोधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में गति प्रदान कर दी है जिसकी ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशन ने आलोचना की है।

विलायत पोर्टलः
सऊदी अरब की सरकार ने नये वर्ष में अपने विरोधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में गति प्रदान कर दी है जिसकी ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशन ने आलोचना की है। इन दोनों संगठनों ने घोषणा की है कि सऊदी अरब की पुलिस ने एसाम कुशक नाम के व्यक्ति को मक्का में और अहमद अलमुशैखस को दम्माम में पिछले सप्ताह पूछताछ के लिए तलब किया और अभी तक इन दोनों व्यक्तियों को छोड़ा नहीं गया है। एसाम कुशक ने ट्यूटर पर सऊदी अरब में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में लिखा था और उससे इस संबंध में पूछताछ की जा रही है जबकि अहमद अलमुशैखस ने सऊदी अरब के पूर्व में गिरफ्तार किये जाने वालों के बचाव के बारे में लिखा था। प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर सऊदी अरब की जेलों में 30 हज़ार राजनीतिक बंदी हैं और ये जेलें विश्व की बदतरीन जेलों में से हैं। पश्चिमी संगठन व संस्थाएं सदैव आले सऊद सरकार की कार्यवाहियों पर मौन धारण किये रहती हैं पर अब वे भी सऊदी अरब की तानाशाही सरकार की कार्यवाहियों और दृष्टिकोणों पर प्रतिक्रिया दिखाने पर विविश हैं। सऊदी अरब की सरकार अपने विरोधियों के दमन के लिए किसी प्रकार की कोई सीमा नहीं मानती है और व्यवहारिक रूप से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिक अधिकारों के हनन के केन्द्र में परिवर्तित हो गयी है। सऊदी अरब की सरकार जनता की आवाज़ दबाने के लिए जो दमनकारी कार्यवाहियां कर रही है उससे उसकी प्रवृत्ति विश्व वासियों के सामने पहले से अधिक स्पष्ट हो गई है। सऊदी अरब की सरकार का सिस्टम राजशाही है और सरकार के संचालन या कानून बनाने में इस देश के लोगों की कोई भूमिका नहीं है। इसी तरह सऊदी अरब में लोकतांत्रिक चुनाव नहीं होते हैं और समाचार पत्रों को आज़ादी नहीं है। इसी तरह सऊदी अरब में राजनीतिक पार्टी बनाने की भी स्वतंत्रता नहीं है। बहरहाल आले सऊद की मानवता विरोधी नीतियां और संयुक्त राष्ट्रसंघ का इस सरकार का साथ देना, सऊदी अरब में विस्तृत पैमाने पर मानवाधिकारों के हनन का कारण बना है।
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तेहरान रेडियो


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