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Date of publication : 16/1/2017 20:12
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मुसलमानों के साथ हो रहे भेदभाव पर कंट्रोल किया जाना चाहिएः ब्रिटिश सरकार

ब्रिटिश सरकार ने एक बयान जारी करके कहा है कि काम की तलाश करने वाले मुसलमानों के साथ होने वाले भेदभाव पर नियंत्रण करने की ज़रूरत है।

विलायत पोर्टलः
ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार किया है कि देश में मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जाता है। ब्रिटिश सरकार ने एक बयान जारी करके कहा है कि काम की तलाश करने वाले मुसलमानों के साथ होने वाले भेदभाव पर नियंत्रण करने की ज़रूरत है। ब्रिटिश सरकार की इस रिपोर्ट में आया है कि मुसलमानों के साथ सबसे ज़्यादा रोज़गार देने में भेदभाव किया जाता है और लगभग 30 लाख मुसलमानों ने इसका अनुभव किया है। रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि मुस्लिम कर्मचारियों का वेतन उनके समकक्ष ईसाई कर्मचारियों से कम होता है। यहां यह बात ध्यान योग्य है कि ब्रिटेन और यूरोप में मुसलमानों के साथ होने वाला भेदभाद किसी एक क्षेत्र में सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में क़दम क़दम पर उनके साथ भेदभाव किया जाता है। विशेष रूप से पश्चिमी देशों में इस्लामोफ़ोबिया की लहर के बाद से मुसलमानों के लिए जीवन कठिन हो गया है। ब्रिटिश समाज में इस्लामोफ़ोबिया ने एक सामाजिक संकट का रूप धारण कर लिया है। यूरोपीय संघ से निकलने के लिए होने वाले जनमत संग्रह के बाद से तो इस देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जातिवादी हमलों में काफ़ी वृद्धि हो गई है। इस्लामोफ़ोबिया से मुक़ाबले के लिए कुछ ब्रिटिश और यूरोपीय अधिकारियों के वादों के बावजूद, ब्रिटेन, जर्मनी, फ़्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में मुसमलानों के साथ भेदभाव में वृद्धि हो रही है और उन पर जातिवादी हमले किए जा रहे हैं। पश्चिमी देशों में इस्लामोफ़ोबिया को हवा देने में कट्टरवादी दक्षिणपंथी पार्टियों और विचारधारा की बड़ी भूमिका है। वादों और घोषणाओं से अलग हटकर देखें तो फ़िलहाल यूरोप में इस स्थिति में कोई बदलाव होता नज़र नहीं आ रहा है।
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तेहरान रेडियो


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