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Date of publication : 17/1/2017 17:33
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ईरान का हवाई सिस्टम फार्स की खाड़ी में दुश्मन के जंगी जहाज़ो मिट्टी में मिलाने की ताक़त रखता हैः अमेरिकी थिंकटैंक

वाशिंग्टन के थिंकटैंक ने ईरान की रक्षा क्षमता के बारे में अपनी नवीनतम रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान ने सुरक्षा छावनियों में हवाई सिस्टम लगाकर ध्यान योग्य रूप से उन्हें बेहतर बना लिया है।
विलायत पोर्टलः
वाशिंग्टन के थिंकटैंक ने ईरान की रक्षा क्षमता के बारे में अपनी नवीनतम रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान ने सुरक्षा छावनियों में हवाई सिस्टम लगाकर ध्यान योग्य रूप से उन्हें बेहतर बना लिया है। इस थिंकटैंक ने लिखा है कि हवाई सिस्टम ने ईरान को इस योग्य बना दिया है कि वे फार्स की खाड़ी में दुश्मन के युद्धक विमानों के खतरों के मुकाबले में ईरान को आक्रामक स्थिति में पहुंचा दें और वह क्षेत्र के सैनिक समीकरण को परिवर्तित कर दे। वाशिंग्टन थिंकटैंक ने अपनी रिपोर्ट में 28 दिसंबर को ईरान के हवाई सैन्य अभ्यास और उसमें प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न हवाई रक्षा उपकरणों की ओर संकेत करते हुए लिखा है कि ईरान की हवाई और प्रक्षेपास्त्रिक क्षमता में ध्यानयोग्य विस्तार से यह संभावना उत्पन्न हो गयी है कि वह फार्स की खाड़ी, हुरमुज़ स्ट्रैट और ओमान सागर में स्वतंत्र रुप से की जाने वाली अमेरिकी कार्यवाही को कम कर सकती है और समूचे क्षेत्र में दुश्मन की हवाई छावनियों को अधिक आघात पहुंचा सकती है। इस रिपोर्ट ने जहां ईरान की प्रतिरक्षा क्षमता को स्वीकार किया है वहीं यह दर्शाने की चेष्टा मं है कि फार्स की खाड़ी के जलक्षेत्र में ईरान की उपस्थिति क्षेत्र का एक ख़तरा है जबकि इस्लामी रिपब्लिक वही कार्य करता है जिसे अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए हर देश को अंजाम देना चाहिये। फार्स खाड़ी के बहुत से अरब देश बाहर से आयात की जाने वाली सुरक्षा के समर्थक व पक्षधर हैं और इसी कारण उन्होंने फार्स की खाड़ी को विदेशियों के हस्तक्षेप के क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया है जबकि कुछ विश्लेषक अपने विचारों व दृष्टिकोणों से यह समझाने के प्रयास में हैं कि ईरान का लक्ष्य फार्स की खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रैट के जलमार्ग पर वर्चस्व जमाना है। रोचक बात यह है कि ईरान की नीति सदैव तनावों से दूरी रही है। इस आधार पर फार्स की खाड़ी में हालिया वर्षों में जो दो युद्ध हुए हैं उससे सब पर स्पष्ट हो गया कि ईरान न तो किसी प्रकार के अतिक्रमण और न ही किसी प्रकार के विस्तार का इरादा रखता है परंतु साथ ही उसने सदैव शत्रुओं को यह संदेश भी दिया है कि वह अपनी सक्रिय व शक्तिशाली उपस्थिति के साथ क्षेत्र में सुरक्षा स्थापित करने में सक्षम है। साथ ही उसका मानना है कि क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा को पड़ोसी देशों के मध्य सहकारिता से सुनिश्चित बनाया जाना चाहिये।
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तेहरान रेडियो


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