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Date of publication : 2/2/2017 12:21
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मछली खाने के अद्भुत फ़ायदे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप सप्ताह में कम से कम दो बार अपने ख़ाने में मछली शामिल कर लें तो यह आपके स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। उनका मानना है कि इससे हृदय रोग से होने वाली मृत्यु की दर को कम किया जा सकता है



विलायत पोर्टलः विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप सप्ताह में कम से कम दो बार अपने ख़ाने में मछली शामिल कर लें तो यह आपके स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। उनका मानना है कि इससे हृदय रोग से होने वाली मृत्यु की दर को कम किया जा सकता है।
मछली मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण आहार है, इसमें कुछ ऐसे विटामिंस होते हैं जो किसी और मांस में नहीं पाए जाते, उदाहरण स्वरूप आयोडीन, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, उसकी कमी से शरीर के टांसेल सिस्टम का संतुलन बिगड़ सकता है, गले के प्रमुख टॉंसेल थाईराईड (thyroid) में गड़बड़ी पैदा होकर शारीरिक प्रणाली में बहुत सी ख़राबियां पैदा हो सकती हैं।
कई देशों में समुद्री भोजन का उपयोग कम किया जाता है वहां के निवासी आमतौर पर इन बीमारियों का शिकार रहते हैं, रिसर्च की दुनिया में यह बात अभी चर्चा का विषय है कि मछली के तेल के अतिरिक्त उपयोग से मानव हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता लेकिन इसका अंदाजा लगाया जा चुका है कि मछली के रूप में आहार का उपयोग करने वालों की उम्र लम्बी होती है यहां तक कि वह लोग भी इसके लाभ से वंचित नहीं जो हृदय रोगों से ग्रस्त हैं और आख़री स्टेज पर हैं। आधुनिक अनुसंधान के अनुसार मछली के जिगर का तेल जो काड लीवर आयल (cod Liver oil) कहलाता है, गठिया के लिए उपयोगी है, इसके अलावा इससे रगें भी साफ और खुली रहती हैं जिससे दिल स्वस्थ रहता है।
ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने इसी लाभ के दृष्टिगत राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के सभी अस्पतालों में अब मैगज़िपा (maxepa)नामक मछली के तेल की आपूर्ति का सिलसिला शुरू किया है। यह तेल भी काड लीवर आयल (cod Liver oil) जैसा है इससे विशेषकर रक्त में मोमी या चर्बी युक्त पदार्थों की मात्रा कम रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप सप्ताह में कम से कम दो बार अपने ख़ाने में मछली शामिल कर लें तो यह आपके स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। उनका मानना है कि इससे हृदय रोग से होने वाली मृत्यु की दर को कम किया जा सकता है।
उन तथ्यों को सामने रखकर हाल ही में एक अध्ययन शोध प्रकाशित हुआ, जिसे आधार बनाकर वेल्ज़ में ऐसे 2000 मरीजों पर परीक्षण किया गया जिन पर पहली बार दिल का हमला हुआ था उनमें वह लोग जिन्हें सप्ताह में दो बार मछली खाने की सलाह दी गई, उन पर अगले दो साल तक हृदय रोगों का कोई हमला नहीं हुआ जबकि उन्हीं रोगियों में वह जिन्हें मछली खाने को नहीं कहा गया, उन्हें अगले दो साल के भीतर हृदय रोगों में फिर ग्रस्त होते हुए देखा गया।
मेडिकल स्कूल में निवारक चिकित्सा के अध्यक्ष डॉ अलेक्जेंडर लीफ़ (Dr. Alexander Leaf) मछली के तेल से संकलित होने वाले प्रभावों के विशेषज्ञ माने जाते हैं, उनके शोध के अनुसार परिणाम बहुत प्रेरित हैं, उनकी राय में अनुभवों के आधार पर एक ऐसी बात की पुष्टि हुई है जो दो प्रकार के लोगों के खाद्य पदार्थों पर किए गए निरीक्षणों पर आधारित है।
मछली में ऐसे कई विटामिंस हैं जो केवल मछली के उपयोग से ही शरीर को हासिल होते हैं, सप्ताह में एक बार मछली जरूर खानी चाहिए, अगर इसके बजाय कोई अन्य समुद्री डाइट का उपयोग किया जाए तब भी कोई हरज नहीं है। अलबत्ता झींगें का उपयोग अधिक नहीं करना चाहिए क्योंकि झींगों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है। ठंड से होने वाली खांसी को दूर करने के लिए मछली से अच्छी कोई चीज़ नहीं है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि मछली का सालन पीने से आंतों के घाव ठीक हो सकते हैं, इसका कारण प्राचीन हकीमों ने यह बताया है कि मछली मारक व ऐंटीडोट है, मछली हमेशा ताज़ी खानी चाहिए क्योंकि बासी मछली अक्सर सख़्त ज़हरीली होती है।
मछली का तेल गठिया की दवा है, एक चम्मच सुबह या रात को उपयोग करने से गठिया में लाभ होता है मगर डॉक्टर से परामर्श करना भी ज़रूरी है।
डॉक्टर लीफ़ (Dr. Leaf) का कहना है कि मछली खाना जिस तरह से उपयोगी है उसी तरह से मछली का तेल भी अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो इससे शुरुआती दौर में रक्त वाहिकाओं में जो अवरोध पैदा होने लगता है (जिससे रगों की सख़्ती के कारण हृदय रोगों से पीड़ित होने की आशंका होती है) नजात मिल जाती है, क्योंकि यह बीमारी ख़ून में कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि से होती है, जो इन नालियों के रास्ते को या तो तंग कर देती है या बिल्कुल बंद कर देती है, जिससे दिल की हरकत बंद होकर मौत हो सकती है।
मछली का तेल खून की नसों की दीवारों गढ़ों और बाधाओं से बचाता है क्योंकि उन्हीं स्थानों पर कोलेस्ट्रॉल जमता है और संचार की राह रूकावट बनने लगता है, डॉक्टर लीफ़ का कहना है: रक्त वाहिकाओं में अगर यह परिवर्तन न हो तो कोलेस्ट्रॉल जम ही नहीं पाता जिसके कारण खून की आवाजाही सही और संतुलित रहती है।
मछली को बहुत ज़्यादा पका कर या तेज आंच पर तल कर उपयोग करने से इसकी उपयोगिता और लाभ कम हो जाते हैं, इसके इस्तेमाल का बेहतर तरीका यह है कि हल्के मसाले की मछली बिना तेल के ओवन में पकाई जाए या अगर तलना ज़रूरी हो तो कम से कम, कोलेस्ट्रॉल मुक्त तेल में तली जाए।

(लेख केवल आम जानकारी के लिए है उपरोक्त बातों की पुष्टि के लिए डाक्टर से सलाह लें।)


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