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Date of publication : 18/3/2017 23:56
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हज़रते ज़हरा स., पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. की निगाह में

पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. फ़रमाते हैं कि अगर अच्छे संस्कार और अच्छी नैतिकता को बदन का रुप दिया जाए तो वह फ़ातिमा की शक्ल में होगा, बल्कि फ़ातिमा उससे बढ़ कर होंगी, क्योंकि मेरी बेटी शराफ़त, करामत और ख़ानदानी हिसाब से सबसे अच्छी है


विलायत पोर्टलः बाप से बढ़ कर कौन अपनी औलाद को पहचानता और पहचनवा सकता है, ऐसा बाप कि पूरी दुनिया में उसके जैसा कोई नहीं, जिसकी कथनी और करनी, सच्चाई और वास्तविकता की आख़री मंज़िल पर हो, जो कभी ग़लत बात न करता हो, जो दुनिया के रहस्यों को जानता हो, जो इल्म का महासागर हो, जो अल्लाह से संपर्क में हो, ऐसी विशेषताओं वाले बाप से बढ़ कर अपनी बेटी हज़रत जहरा अ. की महानताओं को अच्छी तरह से और कोई नहीं बता सकता।
1.    हज़रते ज़हरा अ. औरतों की सरदार
पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने हज़रत ज़हरा अ. की इस विशेषता को बयान करते हुए फ़रमाया, फ़ातिमा इस उम्मत की औरतों की सरदार हैं।
(हुसैनी फ़िरोज़ाबादी, जिल्द 3, पेज 137)
वास्तव में पैग़म्बर ने इस हदीस द्वारा सारी मुसलमान औरतों में सबसे बेहतर, कामिल और अफ़ज़ल (सर्वश्रेष्ठ) हज़रते ज़हरा अ. को कहा है।
2.    फ़ातिमा अ. एक संपूर्ण व कामिल इंसान
रसूले ख़ुदा स.अ. ने फ़रमाया, मर्दों में बहुत से लोग कमाल तक पहुंचे हैं लेकिन औरतों में केवल 4 लोग ही उस स्थान तक पहुंच पाई हैं, और वह हज़रते आसिया, हज़रते मरयम, हज़रते ख़दीजा और हज़रते ज़हरा अ. हैं।
(सालबी, जिल्द 9, पेज 353)
वास्तव में पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने इन चार औरतों को व्यवहार और नैतिकता के हिसाब से पूरी दुनिया के लिए हमेशा के लिए आदर्श बना कर पेश किया है और सारी औरतों को उनकी पैरवी करने का हुक्म दिया है।
3.    इंसानी शक्ल में हूर (परी)
पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. जो दुनिया के सारे दूसरे लोगों से ज़्यादा इस दुनिया के तथ्यों को जानते हैं, असमा बिन्ते उमैस से फ़रमाते हैं, ऐ असमा, फ़ातिमा हूर हैं जो इंसानी शक्ल में पैदा हुईं हैं।
(इब्ने मग़ाज़िली, पेज 296)
एक दूसरी हदीस में फ़रमाया, मेरी बेटी फ़ातिमा इंसान की शक्ल में एक हूर है। (क़ुनदूज़ी, जिल्द 2, पेज 218)
पैग़म्बर की यह हदीस हज़रते ज़हरा अ. के बारे में सबसे अच्छी हदीसों में से एक है, जिससे आपकी इसमत और पवित्रता का पता चलता है, क्योंकि हूर पवित्र और गुनाहों से दूर होती हैं, क्योंकि वह जन्नत की रहने वाली होती हैं जहां पवित्रता ही पवित्रता है।
4.    फ़ातिमा नैतिकता की मिसाल   
आप फ़रमाते हैं कि अगर अच्छे संस्कार और अच्छी नैतिकता को बदन का रुप दिया जाए तो वह फ़ातिमा की शक्ल में होगा, बल्कि फ़ातिमा उससे बढ़ कर होंगी, क्योंकि मेरी बेटी शराफ़त, करामत और ख़ानदानी हिसाब से सबसे अच्छी है।
(इब्ने अहमद मक्की, जिल्द, पेज 100)
पैग़म्बर की यह हदीस इस बात को दर्शाती है कि आप के अंदर दुनिया की हर अच्छाई और हर कमाल पाया जाता है।
5.    फ़ातिमा हिदायत का सितारा
पैग़म्बर ने अपने असहाब से फ़रमाया, हमेशा सूरज की रौशनी में रहो, जब सूरज डूब जाए तब चांद और चांद के डूब जाने के बाद ज़ोहरा (एक सितारा) और ज़ोहरा के डूब जाने के बाद फ़ुरक़द (दो विशेष सितारे) की रौशनी से लाभ उठाओ, लोगों ने पूछा यह सूरज चांद और सितारे कौन हैं, आपने कहा सूरज मैं, चांद अली, ज़ोहरा फ़ातिमा और दोनों फ़ुरक़द हसन व हुसैन हैं।
(हकसानी, जिल्द 1, पेज 59)
इस हदीस में पैग़म्बर ने हिदायत के रास्ते को बिल्कुल साफ़ कर दिया है, कि जिस तरह सूरज चांद और सितारे अंधेरे से उजाले में ले जाने में मदद करते हैं उसी तरह यह पवित्र लोग जीवन को भटकने और विचलित होने बचाते हैं।
6.    फ़ातिमा रिसालत का हिस्सा
बहुत सारी हदीसें थोड़े से अंतर के साथ इसी बात को बयान करती हैं, कि फ़ातिमा अ. का वजूद मेरे वजूद का हिस्सा है, जिसने फ़ातिमा अ. को तकलीफ़ दी उसने मुझे तकलीफ़ दी, जिससे फ़ातिमा अ. राज़ी हुईं उस से मैं भी राज़ी हुआ।
(मुस्लिम, पेज 993, हदीस 2449, बुख़ारी, पेज 684, हदीस 3767, तिरमिज़ी, पेज 1006, हदीस 3876, इब्ने हजर, जिल्द 8, पेज 265)
यह हदीसें पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. और हज़रते ज़हरा अ. के रिश्तों की गहराई को दर्शातीं हैं और इस बात की तरफ़ इशारा करती हैं कि हज़रते ज़हरा अ. ने इतनी ज़्यादा अल्लाह और उसके रसूल की पैरवी की और एक क़दम भी हक़ के रास्ते से पीछे नहीं हटाया कि आपकी ख़ुशी और इच्छा पैग़म्बर की ख़ुशी और मर्ज़ी और आपकी नाराज़गी पैग़म्बर की नाराज़गी बन गई।
7.    फ़ातिमा, पैग़म्बर की ख़ुशी का कारण
पैग़म्बर फ़रमाते हैं कि फ़ातिमा मेरी दिली ख़ुशी की वजह हैं और उनके बेटे मेरे दिल के चैन और उनके शौहर मेरी आंखों का नूर हैं और वह सारे इमाम जो उनकी नस्ल से हैं वह सब अल्लाह के अमानतदार और उसके और बन्दों के बीच वसीला व माध्यम हैं, जिसने उनके रास्ते को चुना वह नजात पा गया और जिसने उन से मुंह मोड़ा वह गुमराह हो गया।
(इब्ने अहमद, जिल्द 1, पेज 99)
8.    फ़ातिमा से मोहब्बत और नफ़रत, पैग़म्बर से मोहब्बत और नफ़रत के समान
पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने अलग अलग जगहों पर हज़रते ज़हरा अ. की विशेषताओं और महानता की तरफ़ इशारा किया है, जैसे एक जगह हज़रते ज़हरा अ. इमामे अली अ., इमामे हसन अ. और इमामे हुसैन अ. से कहा, जिसने तुम लोगों से दुश्मनी और नफ़रत की मैं उसका दुश्मन हूं, और जिसने दोस्ती और मोहब्बत की उसका मैं दोस्त हूं।
(तिरमिज़ी, पेज 1007, हदीस 3879, इब्ने हजर असक़लानी, जिल्द 8, पेज 266)
9.    हज़रते ज़हरा अ. की नाराज़गी ख़ुदा की नाराज़गी
पैग़म्बरे ख़ुदा स.अ. हमेशा फ़रमाते रहते थे, कि जिससे फ़ातिमा नाराज़ हो गईं समझो उससे अल्लाह नाराज़ हो गया, और जिससे फ़ातिमा राज़ी हो गईं उससे अल्लाह राज़ी हो गया।
(हाकिमे नेशापूरी, जिल्द 3, पेज 153)
इसी से मिलती जुलती हदीस इमामे अली अ. से भी बयान हुई है।
(क़न्दूज़ी, जिल्द 1, पेज 204, इब्ने हजर अस्क़लानी, जिल्द 8, पेज 266)


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