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Date of publication : 24/3/2017 12:28
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फिलिस्तीन को लेकर ज़ायोनी एजेंडा और प्रतिरोधी आंदोलन के विरुद्ध तुर्की का षड्यन्त्र ।

अवैध राष्ट्र को ज़ायोनी राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाना, और हमास का शस्त्रहीन होना इस उद्देश्य की पूर्ति की गारन्टी है ।


विलायत पोर्टल :
तुर्की के विदेश मंत्री मौलूद चावुश ओग़लू ने खबर दी है कि उनका देश प्रतिरोधी आंदोलन हमास पर दबाव बना रहा है कि वह अवैध राष्ट्र को विधिवत रूप से मान्यता प्रदान करे । ओग़लू ने बुधवार को वाशिंगटन में आयोजित दाइश विरोधी अंतर्राष्ट्रीय गठबन्धन के सम्मलेन में कहा कि उनका देश हमास पर दबाव बना रहा है कि वह हथियार डाल दे तथा संघर्ष का रास्ता त्याग कर अवैध राष्ट्र से वार्ता आरम्भ करे । उन्होंने दावा किया कि हमास ने अवैध राष्ट्र को मान्यता देने की बात मान ली है तथा पार्लियामेंट चुनाव के लिए मंजूरी दे दी है । ओग़लू ने तुर्की और इस्राईल के सामान्य होते सम्बन्धों के बारे में कहा कि तेल अवीव और अंकारा के सामान्य सम्बन्धों के कारण फिलिस्तीन मुद्दे पर वार्ता में प्रगति हुई है और यह दोनों पक्षों के लिए लाभदायक है । ओग़लू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हमास के सूत्र ने कहा कि तुर्की हम पर अवैध राष्ट्र को मान्यता देने का दबाव बनाये हुए है लेकिन हमने अवैध राष्ट्र को मान्यता देने से साफ इंकार कर दिया है । ज्ञात रहे कि २०१० में मानव सहायता लेकर फिलिस्तीन जा रही एक तुर्क नाव पर हमले के बाद अवैध राष्ट्र और तुर्की के सम्बन्ध खराब हो गए थे लेकिन पिछले वर्ष कई दौर की वार्ता के बाद दोनों देशों के सम्बन्ध फिर से सामान्य हो गए है । ओग़लू ने इस्राईल - तुर्की सम्बन्ध पर हमास की किसी भी आपत्ति को नकारते हुए कहा कि हमास से सम्बन्ध पर कोई परेशानी नहीं है। हमारा हमास और अल फतह से सम्बन्ध फिलिस्तीनियों के लिए समानाधिकार और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए है । इस्राईल समेत कुछ राष्ट्र जो पूर्व में हमास से हमारे सम्बन्ध को लेकर आशंकित रहते थे अब हमारा उद्देश्य समझ चुके है अतः अब इस्राईल से सम्बन्धों में हमास को लेकर किसी भी शर्त का कोई औचित्य नहीं है । समझ जा सकता है कि तुर्क विदेशमंत्री जिस उद्देश्य की बात कर रहे है वह यही है कि हमास को शस्त्रहीन कर अवैध राष्ट्र को मान्यता दिलाये जिसे अवैध राष्ट्र भी भलीभांति समझ रहा है । तुर्की विशेष रूप से दो उद्देश्यों की पूर्ति में लगा हुआ है पहला यह कि हमास को मजबूर किया जाये ताकि वह हथियार डाल कर सशस्त्र संघर्ष का रास्ता त्याग दे जिस पर तुर्की और अवैध राष्ट्र की होने वाली बैठकों में सहमति भी बनी है। अवैध राष्ट्र ने कई बार तुर्की से अपील की है कि वह अपने प्रभाव का प्रयोग कर हमास को संघर्ष के रास्ते से हटाये । दूसरा अवैध राष्ट्र को ज़ायोनी राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाना, और हमास का शस्त्रहीन होना इस उद्देश्य की पूर्ति की गारन्टी है । तुर्की अरब इस्राईल वार्ता में अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए अवैध राष्ट्र से मधुर एवं नज़दीकी सम्बन्ध तथा अवैध राष्ट्र के विरुद्ध प्रतिरोध आंदोलन के केंद्र को कमज़ोर करने में लगा हुआ है ।
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ताबनाक


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