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Date of publication : 30/4/2017 8:52
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हज़रत अब्बास अ.स. के नैतिक गुण

इमाम सादिक़ अ.स. ने हज़रत अब्बास अ.स. के ईमान को इसी प्रकार का मज़बूत और स्थिर ईमान वाला कहा है।


विलायत पोर्टल :
  हज़रत अब्बास अ.स. इमाम अली अ.स. और उम्मुल बनीन अ.स. के बेटे हैं, आप वर्ष 26 हिजरी में पैदा हुए, आप चार भाई थे और चारो ही विलायत व इमामत की रक्षा करे हुए शहीद हुए। इस लेख में आप में पाए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण गुणों को बयान किया जाएगा।
1. विलायत क़ुबूल करना, आपका सबसे महत्वपूर्ण गुण अपने इमाम और वलिए-अम्र की पैरवी करना है, आप ने क़ुर्आन की आयात और पैग़म्बर की हदीसों की रौशनी में यह ज़रूरी समझा कि अल्लाह के वली और इमाम की पैरवी करते हुए जीवन बिताया जाए और उसके हुक्म के विरुध्द अमल न किया जाए, यह बात ध्यान देने के क़ाबिल है कि, अल्लाह के वली और उसके द्वारा बनाए गए इमाम को पहचानना कठिन तो है लेकिन पहचानना अनिवार्य है क्योंकि अगर नहीं पहचाना तो जिहालत की मौत होगी, जैसा कि पैग़म्बर की हदीस है, जो अपने दौर के इमाम को पहचाने बिना मर गया उसकी मौत जिहालत की मौत होगी। (अल-ग़दीर, जिल्द 10, पेज 360, इसबातुल-हुदात, जिल्द 1, पेज 126)
2. इख़लास, दूसरी महत्वपूर्ण अच्छाई आपका ख़ुलूस और सच्चाई है, आपने अपने जीवन को अल्लाह, उसके रसूल और उसके द्वारा भेजे गए इमामों के लिए समर्पित कर रखा था, आप ने अपने पूरे वुजूद को विलायत की राह में समर्पित कर रखा था जो आपके ख़ुलूस और सच्चाई का प्रमाण है।
 3. मज़बूत ईमान, ईमान उस समय ही मज़बूत कहलाता है जब इंसान यक़ीन की उस मंज़िल पर पहुँच जाए जहाँ किसी प्रकार का शक और संदेह न रह जाए, उसी समय कहा जाएगा कि ईमान दिल में उतर गया है, फ़िर जब ऐसा ईमान मज़बूत इरादे के साथ हो, तब वह सहनशक्ति और सहनशीलता के उच्च स्तर पर पहुँच जाएगा कि फिर उसे वहाँ से कोई हटा नहीं सकता, या इस प्रकार कहा जाए कि धैर्य और सहनशक्ति के पीछे इसी प्रकार का ईमान छिपा होता है जिसको क़ुर्आन ने कई स्थान पर बयान किया है, इमाम सादिक़ अ.स. ने हज़रत अब्बास अ.स. के ईमान को इसी प्रकार का मज़बूत और स्थिर ईमान वाला कहा है।
4. इल्मी और अमली जिहाद, आप की एक और महत्वपूर्ण विशेषता अल्लाह की राह में जिहाद करना थी, आपने इस्लाम के कठिन दिनों में भी इमाम का साथ दे कर बहुत सी आखों से पर्दे को हटाने की कोशिश की, यही कारण है कि आप ने कई बार चाहने वालों के दिलों में पाए जाने वाले संदेह को दूर किया, और अमल के मैदान में भी आप ने अपने वुजूद को इमाम को बचाने के लिए क़ुर्बान कर दिया।
 5. शहादत, यह ऐसी विशेषता है जो हर किसी के नसीब में नहीं होती, और अगर इमाम मासूम अपनी ज़ुबान से शहीद कह दे तो उसका स्थान और भी ऊँचा हो जाता है, जैसा कि इमाम सज्जाद अ.स. ने आप के बारे में फ़रमाया, अल्लाह मेरे चचा अब्बास पर रहमत करे, अल्लाह की निगाह में मेरे चचा अब्बास का स्थान ऐसा है जिसकी इच्छा क़यामत के दिन हर शहीद करेगा। (अमाली सदूक़, पेज 374)
6. इम्तेहान में कामयाबी, इसका मतलब यह है कि अल्लाह की ओर से लिए गए इतिहास के सबसे कठिन इम्तेहान जो कर्बला के तपते मैदान में लिया गया था उस कठिन इम्तेहान में आप ने पूरे सम्मान के साथ कामयाबी हासिल की, ध्यान देने की बात है इतिहास के सबसे कठिन इम्तेहान में इमाम हुसैन अ.स. के इम्तेहान के बाद सबसे कठिन आपका ही इम्तेहान था, गोद के पालों की लाशों को उठाना और कुछ न कर पाना और फिर आख़िरी सांस तक विलायत व इमामत और अहले बैत अ.स. के घराने को कठिनाइयों में घिरा देख कर चाहते हुए भी कुछ न कर पाना यही सबसे बड़ा आपका इम्तेहान था, यहाँ तक दुश्मन की ओर से आप की सुरक्षा की बात कही गई तो आपने उसे शर्मिंदा करते हुए कहा रसूल का बेटा दुश्मन के बीच अकेला है और तू मेरी सुरक्षा की बात कर रहा है, यह भी आप का इम्तेहान था लेकिन आपने अहले बैत अ.स. के घराने की रक्षा करते हुए अपनी जान को क़ुर्बान करके इस इम्तेहान में कामयाब हो गए।
 7. ज्ञान, आप ने इल्म के दरवाज़ा यानी इमाम अली अ.स. की गोद में परवरिश और इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. जैसे भाइयों के साथ तरबियत पाई, कुछ हदीसों में इस प्रकार आपके इल्म और ज्ञान को बयान किया गया है, कि अहले बैत अ.स. ने आप को इस प्रकार शिक्षा दी है जैसे परिंदा अपने बच्चे को दाना खिलाता है, अल्लामा मामक़ानी अपनी क़ीमती किताब तनक़ीहुल-मक़ाल में आपके बारे में इस प्रकार लिखते हैं कि आप अहले बैत अ.स. के घराने के एक मुत्तक़ी, आदिल, ज्ञानी और फ़क़ीह इंसान थे।
8. बलिदान, बलिदान यानी इंसान को किसी चीज़ की ख़ुद ज़रूरत हो लेकिन वह किसी दूसरे की ज़रूरत को देखते हुए वह चीज़ उसे दे दे, अहले बैत अ.स. के घराने में यह विशेषता सभी में पाई जाती है, जिसका गवाह क़ुर्आन में सूरए दहर मौजूद है, कर्बला के इतिहास पर भी अगर निगाह डाली जाए तो हर क़दम पर हज़रत अब्बास अ.स. का बलिदान दिखाई देता है।
 9. अंत्रद्रष्टि (बसीरत), इसका मतलब यह होता है कि, फ़ितने और विद्रोह के समय हक़ और बातिल के बीच फ़र्क़ समझना और सही रास्ते को चुनना, आपकी इस विशेषता को इमाम सादिक़ अ.स. ने बयान किया है कि मेरे चचा अब्बास की अंतर्दृष्टि और ईमान बेहद मज़बूत और स्थिर था। (आयातुश-शिया, मोहसिन अमीन, जिल्द 7, पेज 430) उस समय बहुत से लोग थे जिन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. और इमाम अली अ.स. का जीवन देखा था लेकिन फिर भी इमाम हुसैन अ.स. के दौर में सही रास्ते को नही चुन पाए, जिसके कारण आले रसूल का ख़ून बहाने में बनी उमय्या का साथ दिया, और यह केवल अंतर्दृष्टि के न होने के कारण हुआ था।


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