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Code : 187200
Date of publication : 11/5/2017 10:47
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इमाम ज़माना अ. के ज़ुहूर का समय निर्धारित न होने का कारण।

इमाम बाक़िर अ. ने तीन बार कहा कि इमाम महदी अ. के ज़ुहूर के समय को निर्धारित करने वाले झूठे हैं।


विलायत पोर्टल :
  किसी भी चीज़ का इंतेज़ार, उसकी उम्मीद को बाक़ी रखता है, शायद इमाम के भी इंतेज़ार को इसी लिए रखा गया है जिस से हर इंसान हर समय उम्मीद लगाए तैयार रहे कि इमाम का ज़ुहूर शायद आज हो जाए या फ़िर कल, और यह ख़ुद इंसान में उत्साह और हौसले को बढ़ाने (प्रोत्साहन) में भी मदद करता है जिस से इंसान बिना आलस अपने कर्तव्य को सही समय पर अच्छी तरह अंजाम देता रहता है। इसलिए कि उसे उम्मीद है कि इमाम का ज़ुहूर उसके जीवन ही में हो सकता हैं। वह कठिनाईयों को बर्दाश्त करता है ताकि इमाम का इस्तेक़बाल (स्वागत) कर सके, और इमाम की हुकूमत को क़रीब से देख सके, और यही लोगों के हक़ में बेहतर और उनके बचाव के लिए फ़ायदेमंद है। इसके विपरीत अगर इमाम के ज़ुहूर को निर्धारित कर दिया जाए कि आने वाले कुछ सौ वर्षों में इमाम का ज़ुहूर होगा, तो मुसलमानों में उत्साह और हौसले की कमी होगी और आलस बढ़ता जाएगा। (हुकूमते अद्ल गुस्तर, पेज 158) दूसरे यह कि जिस प्रकार हदीसों में क़यामत के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है बल्कि उसका इल्म केवल अल्लाह के पास है उसी प्रकार हदीसों में इमाम के ज़ुहूर के बारे में मौजूद है कि उसका इल्म भी सिर्फ अल्लाह के पास है, जैसा कि पैग़म्बरे इस्लाम से पूछा गया कि हज़रत इमाम महदी अ. के ज़ुहूर का समय क्या है? आप ने जवाब में फ़रमाया कि, ज़ुहूर, क़यामत की तरह है, अल्लाह के अलावा कोई उसके बारे में नहीं जानता। (इकमालुद-दीन, जिल्द 2, पेज 44) यही कारण है कि जो भी इमाम के ज़ुहूर का समय निर्धारित करते हैं उन्हें हदीस में झूठा कहा गया है। शेख़ तूसी ने अपनी किताब ग़ैबत में फ़ुज़ैल से एक हदीस को बयान किया है, फ़ुज़ैल ने इमाम बाक़िर अ. से पूछा कि क्या इमाम महदी अ. के ज़ुहूर का कोई निर्धारित समय है? इमाम बाक़िर अ. ने तीन बार कहा कि इमाम महदी अ. के ज़ुहूर के समय को निर्धारित करने वाले झूठे हैं। (सितारेगाने देरख़शान, जिल्द 14, पेज 43-44) इसी किताब में महज़म असदी से भी एक हदीस को बयान किया गया है कि वह कहते हैं कि मैंने इमाम सादिक़ अ. से ज़ुहूर के बारे में पूछा कि मौला बहुत समय हो गया कब इमाम ज़ाहिर होंगे? इमाम सादिक़ अ. ने फ़रमाया जो भी इस बारे में समय निर्धारित होने की बात करता है वह झूठ बोलता है। (सितारेगाने देरख़शान, जिल्द 14, पेज 44) इमाम रज़ा अ. ने देबल ख़ोज़ाई से फ़रमाया कि, मेरे वालिद ने अपने वालिद और इसी प्रकार पैग़म्बर से हदीस को नक़्ल किया है कि पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने फ़रमाया कि, महदी मौऊद, क़यामत की तरह है कि उसका ज़ुहूर भी अचानक होगा। (यनाबीउ-ल-मवद्दत, पेज 456)


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