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Date of publication : 31/5/2017 15:49
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पैग़म्बर स.अ. और अहले बैत अ.स. की निगाह में रमज़ान की अहमियत।

आप ने फ़रमाया, अल्लाह के इस पवित्र महीने में सब से बेहतर अमल गुनाहों से अपने आप को बचाना है।

विलायत पोर्टल : 
पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने रमज़ान के पवित्र महीने के नाम के बारे में फ़रमाया, इस को रमज़ान इस लिए कहा जाता है क्योंकि रमज़ान की बरकतों से अल्लाह गुनाहों को जला देता है। (कन्ज़ुल उम्माल, हदीस 23688) आप फ़रमाते हैं कि रमज़ान अल्लाह के नामों में एक नाम है इसलिए इसका नाम सम्मान के साथ लिया करो। (कन्ज़ुल उम्माल, हदीस 23743) एक जगह रमज़ान का महत्व बताते हुए फ़रमाया, अगर कोई इंसान रमज़ान की अहमियत को समझ ले तो वह पूरे साल रमज़ान के बाक़ी रहने की दुआ करेगा। (बिहारुल अनवार, जिल्द 96, पेज 346) पैग़म्बर शाबान का महीना समाप्त होने से तीन दिन पहले बिलाल को सभी लोगों को जमा करने का हुक्म देते थे, और जब लोग जमा हो जाते आप मिंबर पर जाते और अल्लाह की हम्द करने के बाद फ़रमाते, ऐ लोगों, जो पवित्र महीना आने वाला है यह सभी महीनों का सरदार है, इस महीने में एक ऐसी मुबारक रात है जो हज़ार महीने से बेहतर है, इस पवित्र महीने जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर के जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, जिस की भी इस पवित्र महीने में मग़फ़िरत नहीं हुई उस को अल्लाह अपनी रहमत से दूर कर देता है। (बिहारुल अनवार, जिल्द 44, पेज 1) इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि, एक दिन पैग़म्बर हम सब के लिए ख़ुतबे में बयान फ़रमा रहे थे, ऐ लोगों रहमतों और बरकतों का महीना आने वाला है, यह महीना अल्लाह का सब से पसंदीदा महीना है, इस महीने के दिन, रातें और एक एक पल बाक़ी महीनें से बेहतर है, इस मुबारक महीने में तुम सब अल्लाह के मेहमान हो और उस की ख़ास मेहरबानी और कृपा तुम सब के साथ है, इस पवित्र महीने में तुम्हारा साँस लेना ख़ुदा की तसबीह पढ़ने का सवाब रखती है, तुम्हारा सोना भी अल्लाह की इबादत शुमार होता है, तुम्हारे आमाल, इबादतें और दुआएँ क़ुबूल हैं, मैने खड़े हो कर पूछा ऐ रसूले ख़ुदा, इस मुबारक महीने में सब से बेहतर अमल क्या है? आप ने फ़रमाया, अल्लाह के इस पवित्र महीने में सब से बेहतर अमल गुनाहों से अपने आप को बचाना है। (अमाली सदूक़) इमाम ज़ैनुल आबेदीन अ.स. रमज़ान के आने के समय यह दुआ करते थे,”सारी तारीफ़ और प्रशंसा उस अल्लाह के लिए जिस ने हमें अपने दीन का पाबंद बनाया, और एहसान और नेकी वाली राह दिखाई, जिस पर चल कर उस को राज़ी किया जाए, सारी तारीफ़ और प्रशंसा उस अल्लाह के लिए जिसने अपनी मर्ज़ी तक पहुँचने के लिए के लिए रोज़ा, इबादत, दुआ और मुनाजात को रखा है, ताकि बंदा इन चीज़ों के कारण अल्लाह की बारगाह से बिल्कुल क़रीब हो जाए। (सहीफ़ए सज्जादिया, दुआ 44) इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. फ़रमाते हैं कि, पैग़म्बर ने शाबान के अंतिम जुमे के ख़तबे में लोगों से फ़रमाया, ऐ लोगों बेशक एक ऐसे महीने का साया तुम पर पड़ने वाला है जिसमें एक रात ऐसी है जो हज़ार रातों से बेहतर है, वह अल्लाह का पवित्र महीना रमज़ान है, जिसमें उसने रोज़ा वाजिब किया है, और इस महीने की एक रात में पढ़ी जाने वाली नमाज़े शब के सवाब को दूसरे महीने की 70 नमाज़े शब के सवाब के बराबर रखा है। (अमाली सदूक़) इमाम सादिक़ अ.स. रमज़ान आते समय अपने बच्चों को इस प्रकार नसीहत करते थे, इस महीने जितना हो सके प्रयास करो क्योंकि इस महीने पूरे साल का रिज़्क़ और ज़िंदगी का किया जाता है, अल्लाह के मेहमानों के नामों को लिखा जाता है, और इस महीने एक ऐसी रात है जिस में इबादत का सवाब हज़ार रातों से अधिक सवाब रखती है। (बिहारुल अनवार, जिल्द 96, पेज 375)


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