Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 187766
Date of publication : 8/6/2017 16:58
Hit : 1071

इमाम हसन अ.स. के दौर के राजनैतिक हालात

सुल्ह की शर्तों में बनी उमय्या के पूरे ख़ानदान को घेर कर उनके घिनौने किरदार को इस प्रकार संसान के सामने रखा कि आज उनका नाम लेने वाला भी नहीं दिखाई देता।


विलायत पोर्टल : 
  हर ऐतिहासिक घटना का उसी के दौर की स्थितियों को सामने रखते हुए विश्लेषण करना ही सही होता है। इमाम हसन अ.स. जिस समय ख़लीफ़ा बने माविया के विरोध और उसकी दुश्मनी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण इमाम ने लश्कर तैयार किया, लेकिन परिस्थिति कुछ यूँ हो गई कि इमाम को इरादा बदल कर माविया का दूसरे प्रकार से मुक़ाबला करते हुए दीन की रक्षा की। इमाम के दौर की राजनैतिक हालात कुछ इस प्रकार थे।
1. इतिहास में मौजूद है कि माविया एक चालाक और मक्कार इंसान और लोगों को दिखाने के लिए उनके सामने इस्लाम के अहकाम का पालन भी करता, लेकिन अपने चमचों के सामने इस्लाम से खुली दुश्मनी को ज़ाहिर करता और इस्लामी सिध्दांतों का अनादर करता था, लेकिन खुले आम वह ऐसा नहीं करता इसी कारण आम लोग उसी को रसूल का ख़लीफ़ा और उत्तराधिकारी समझते थे। (पासुख़ बे शुबहात वाक़ेआ आशूरा, अली असग़र रिज़वानी, पेज 319, थोड़े बदलाव के साथ) 2. ख़्वारिज नामी गुट का उभर कर आना, ईमानदार और वफ़ादार साथियों और जाँबाज़ सेना का ना होना, सैन्य शक्ति का ना होना, (पासुख़ बे शुबहात वाक़ेआ आशूरा, अली असग़र रिज़वानी, पेज 316) और लोगों का माविया के मुक़ाबले जंग पर तैयार न होना, इमाम हसन अ.स. की सुल्ह के मुख्य कारण थे, जिसको ख़ुद इमाम ने इस प्रकार बयान किया है, मैंने देखा कि अधिकतर लोग सुल्ह को चाह रहे हैं और जंग से पीछे हट रहे हैं इसलिए मैंने भी लोगों को उस चीज़ पर मजबूर नहीं किया जिसे वह पसंद नहीं कर रहे थे, यही कारण है कि अपने कुछ सच्चे और वफ़ादार साथियों की जान को बचाने के लिए सुल्ह करनी पड़ी। (आलामुल-हिदायत, इमाम हुसैन अ.स., पेज 147)
3. इमाम हसन अ.स. उस समय मुसलमानों के ख़लीफ़ा थे, आप का माविया और उसकी फ़ौज के साथ जंग करने और आप के शहीद हो जाने से ख़िलाफ़त केंद्र की हार होती, शहीद मुतह्हरी ने इमाम हुसैन अ.स. का मक्के में जंग न चाह के हज छोड़ कर मक्के से बाहर आने का कारण भी यही लिखा है। (सैरी दर सीरए आइम्मए अतहार, पेज 77), परिस्थिति की माँग यही थी कि इमाम जंग का इरादा छोड़ दें और आपका सुल्ह करना महत्वपूर्ण रणनीति के अनुसार था वरना माविया ने इमाम से किसी प्रकार की बैअत या सुल्ह की माँग नहीं की थी। यह बताना बेहद ज़रूरी है कि, माविया ने अपने 20 वर्ष के शासन काल में इस्लाम के विरुद्ध अमल किया, लोगों पर क्रूरता और अत्याचार किया, इस्लाम के अहकाम में मनचाहा बदलाव किया, बैतुल्माल को बर्बाद किया, लोगों का नाहक़ ख़ून बहाया, और क़ुर्आन और सुल्ह के दस्तावेज़ के विरुद्ध अमल किया, और इसी प्रकार अपने बाद अपने शराबी और कुत्तों से खेलने वाले लड़के को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया, लेकिन उसके यह सभी काम इमाम हसन अ.स. के दौर में लोगों को नही पता थे, लेकिन यही सब इमाम हुसैन अ.स. के दौर में इस हद तक बढ़ गया था कि अब अम्र-बिल-मारूफ़ और नहि-अन-मुन्कर करना अनिवार्य हो गया था क्योंकि वह अपने बाद अपनी शराबी, जुआरी औलाद को सत्ता में लाना चाहता था, अब चुप रहना इस्लाम के इतिहास में सबसे बड़ा धब्बा होता, यही कारण है कि इमाम हसन अ.स. की सुल्ह को इमाम हुसैन अ.स. के आंदोलन की बुनियाद कहा जाता है, वह इस प्रकार कि, इमाम हसन अ.स. ने सुल्ह में कुछ इस तरह शर्तों को रखा कि माविया की हर तरह की मक्कारी और चालाकी को नाकाम कर दिया, यह और बात है कि माविया ने उन सुल्ह की शर्तों पर अमल नहीं किया और यही कारण हुआ कि पूरे इस्लामी जगत में बदनाम हुआ और फिर इसी का फ़ायदा उठा कर इमाम हुसैन अ.स. ने हमेशा के लिए इस पूरे ख़ानदान का घटिया किरदार पूरे संसार के सामने पेश कर दिया और इनका नाम हमेशा के लिए मिटा दिया।
सुल्ह की शर्तें
1. माविया क़ुर्आन और रसूल की सुन्नत के अनुसार अमल करेगा।
2. माविया के बाद ख़िलाफ़त इमाम हसन अ.स. को वापिस मिलेगी और अगर उके साथ कुछ हो गया तो इमाम हुसैन अ.स. मुसलमानों के ख़लीफ़ा होंगे।
3. माविया अहले बैत अ.स. के शियों और अल्वियों पर अत्याचार नहीं करेगा।
4. माविया हर प्रकार के बैतुल्माल घोटाले का हिसाब दे, और शियों और इमाम अली अ.स. के चाहने वालों से छीना गया माल वापिस करे और साल 50 लाख दिरहम अहले बैत अ.स. और उनके चाहने वालों पर ख़र्च करने के लिए इमाम हसन अ.स. को दे।
5. माविया मस्जिदों और दूसरी जगहों से इमाम अली अ.स. को बुरा भला कहने पर रोक लगाए।
6. मावियो अपने लिए अमीरुल मोमेनीन के उपनाम का प्रयोग न करे।
7. माविया अपने बाद अपना उत्तराधिकारी न चुने। (इमाम हसन अ.स. व इमाम हुसैन अ.स., सैय्यद मोहसिन आमुली, पेज 54-70) सुल्ह की शर्तों को पढ़ने के बाद यह अंदाज़ा हो जाता है कि इमाम हसन अ.स. ने कभी माविया को मुसलमानों का ख़लीफ़ा स्वीकार नहीं किया, और सुल्ह की शर्तों में बनी उमय्या के पूरे ख़ानदान को घेर कर उनके घिनौने किरदार को इस प्रकार संसान के सामने रखा कि आज उनका नाम लेने वाला भी नहीं दिखाई देता।


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह अमेरिका का युग बीत गया, पश्चिम एशिया से विदाई की तैयारी कर ले : मेजर जनरल मूसवी सऊदी अरब ने यमन के आगे घुटने टेके, हुदैदाह पर हमले रोकने की घोषणा। ईरान को दमिश्क़ से निकालने के लिए रूस को मनाने का प्रयास करेंगे : अमेरिका आईएसआईएस आतंकियों का क़ब्रिस्तान बना पूर्वी दमिश्क़ का रेगिस्तान,30 आतंकी हलाक ग़ज़्ज़ा, प्रतिरोधी दलों ने ट्रम्प की सेंचुरी डील की हवा निकाली : हिज़्बुल्लाह सऊदी ने स्वीकारी ख़ाशुक़जी को टुकड़े टुकड़े करने की बात । आईएसआईएस समर्थक अमेरिकी गठबंधन ने दैरुज़्ज़ोर पर प्रतिबंधित क्लिस्टर्स बम बरसाए । अवैध राष्ट्र में हलचल, लिबरमैन के बाद आप्रवासी मामलों की मंत्री ने दिया इस्तीफ़ा फ़्रांस और अमेरिका की ज़ुबानी जंग तेज़, ग़ुलाम नहीं हैं हम, सभ्यता से पेश आएं ट्रम्प : मैक्रोन बीवी क्या करे कि घर जन्नत की मिसाल हो ज़ायोनी युद्ध मंत्री लिबरमैन का इस्तीफ़ा, ग़ज़्ज़ा की राजनैतिक जीत : हमास अमेरिका की चीन को धमकी, हमारी मांगे नहीं मानी तो शीत युद्ध के लिए रहो तैयार देश को मुश्किलों से उभारना है तो राष्ट्रीय क्षमताओं का सही उपयोग करना होगा : आयतुल्लाह ख़ामेनई अय्याश सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान है ग़ज़्ज़ा पर वहशियाना हमलों का मास्टर माइंड : मिडिल ईस्ट आई