Monday - 2018 July 16
Languages
Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 187839
Date of publication : 13/6/2017 17:14
Hit : 778

इतिहास की एक बेचैन रात

इमाम ने कहा इनको आज़ाद कर दो, और बहुत जल्द इनके साथ साथ सभी रोएंगें,

विलायत पोर्टल :
उम्मे कुलसूम के घर पर: रमज़ान की उन्नीसवीं रात आप बहुत बेचैन थी, आप उस रात अपनी छोटी बेटी उम्मे कुलसूम अ.स. के घर थे, आप ने उम्मे कुलसूम की बेचैनी को देखते हुए अपना आख़िरी रोज़ा वहीं इफ़्तार करने को कहा, इफ़्तार के समय आपके लिए जौ की दो रोटी और एक बर्तन में थोड़ा दूध और एक में नमक रखा गया, इमाम ने फ़रमाया, मेरी बेटी, कभी ऐसा हुआ है कि तुम्हारे बाबा ने एक समय में दो तरह के खाने खाएँ हों, यह दूध वापिस ले जाओ, आप ने तीन निवाले से ज़्यादा नहीं खाया, जब उम्मे कुलसूम ने कहा, बाबा आप रोज़ा थे फिर इतना कम क्यो ? इमाम ने फ़रमाया, मेरी बेटी मैं अल्लाह की बारगाह में भूखा जाना चाहता हूँ। (मुनतहल-आमाल, जिल्द 1, पेज 125)
पूरी रात बेचैनी: उन्नीस की पूरी रात आप बेचैनी में थे, हर थोड़ी देर पर आँगन में जाते और आसमान की ओर देखते और कहते, ना मुझ से झूठ कहा गया है और ना ही मैं झूठ बोल रहा हूँ, आज मेरी ख़ुदा से मुलाक़ात की रात है, यह वही रात है जिसका पैग़म्बर ने मुझ से वादा किया है, इब्ने हजर लिखता है, शबे ज़रबत अली (अ.स.) बार बार आँगन में आते और आसमान की ओर देखते और कहते, ख़ुदाया मुझे शहादत मुबारक कर, मै तेरी ओर से आया और तेरी ओर ही लौट कर जाना है, तुझ से अधिक किसी में शक्ति नहीं। (मुनतहल-आमाल, जिल्द 1, पेज 125) धीरे धीरे इमाम की स्थिति बदलती जा रही थी, एक बार फिर आप ने आँगन में आ कर आसमान की ओर देख कर कहा, ऐ मेरे अल्लाह तेरे नबी ने मुझ से वादा किया था कि जब मैं तुझ से मिलने के लिए कहूँगा तू मुझे अपने पास बुलाएगा, ऐ अल्लाह मैं बिल्कुल तैय्यार हूँ। (बिहारुल-अनवार, जिल्द 42, पेज 252)
पैग़म्बर को ख़्वाब में देख कर शहादत की मांग: शबे ज़रबत काफ़ी रात तक आप के बेटे आप के पास रहे, फिर आप के कहने से वह अपने घर वापिस चले गए, इमाम हसन अ.स. सुबह होने से पहले ही फिर आप के पास आ जाते हैं, आपने इमाम हसन अ.स. से फ़रमाया, बेटा अभी बैठे बैठे आँख लग गई थी, अचानक पैग़म्बर को ख़्वाब में देखा, मैंने उन से कहा, ऐ अल्लाह के रसूल, मैंने आपकी उम्मत द्वारा बहुत कष्ट झेला और मेरा दिल ख़ून के आँसू रो रहा है, उसके बाद पैग़म्बर ने उन सब पर लानत और बद्दुआ करने को कहा, फिर इमाम ने इस प्रकार दुआ की, ख़ुदाया, मुझे इनके बीच से उठा कर बेहतरीन जगह बुला ले और इन का हाकिम किसी कठोर स्वभाव के इंसान को बना। (नहजुल-बलाग़ह)
मस्जिद की ओर: सुबह की अज़ान के समय इमाम अली अ.स मस्जिद की ओर जाने के लिए तैय्यार हुए, घर में मौजूद बत्तख़ें इमाम के रास्ते में आकर रोने लगीं, इमाम ने कहा इनको आज़ाद कर दो, और बहुत जल्द इनके साथ साथ सभी रोएंगें, उम्मे कुलसूम और इमाम हसन अ.स. ने कहा बाबा आप ऐसा क्यों कह रहे हैं, इमाम ने कहा मेरा दिल कह रहा है कि आज मैं शहीद हो जाऊँगा। (मुनतहल-आमाल, पेज 125, बिहारुल-अनवार, जिल्द 42, पेज 198) मस्जिद पहुँच कर पहले रात को अलविदा कहते हुए सुबह से कहा, ऐ सुबह अली जब से इस दुनिया में आया है, ऐसा कभी नहीं हुआ कि तू आ गई हो और अली सोता रहा हो, आज आख़िरी सुबह और देख लो अली को। (मुनतहल-आमाल, पेज 126)


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :