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Code : 188757
Date of publication : 31/7/2017 16:51
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आले सऊद ने यमन मानव त्रासदी छुपाने के लिए इस देश का संपर्क मार्ग बाधित कर दिया ।

आईसीयू में हमारी मुलाक़ात डॉ मदीना अहमद सालिम से हुई जिन्होंने हमे दुखद समाचार सुनाया कि उनकी मरीज़ एक ९ वर्षीय बच्ची थी जिसका वज़न मात्र ३ किलो ग्राम था वह बच्ची इस से ज़्यादा मुसीबतें बर्दाश्त न कर सकी और मौत की नींद सो गयी ।

विलायत पोर्टल :
  प्राप्त जानकारी के अनुसार आले सऊद ने यमन मानव त्रासदी को विश्व समुदाय से छुपाने के लिए देश में आने जाने के रास्तों को बाधित कर रखा है यमन में पत्रकारों को घुसने नहीं दिया जाता है । बीबीसी की पत्रकार नैकला करीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हम सुबह सवेरे यमन की अदन बंदरगाह पहुंचे । यहाँ आवाजाही सऊदी गठबंधन के अधीन है आले सऊद ने यमन में पत्रकारों के प्रवेश पर पाबन्दी लगा रखी है फिर भी किसी तरह हम नौकाओं की मदद से यमन पहुंचे । यमन आने वाले पत्रकारों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं इसी लिए विश्व जगत को यमन की जानकारी नहीं मिल पाती ।
युद्ध पीडितं की मदद के लिए आयी भी तो सिर्फ महामारी । हम एक स्वास्थ्य केंद्र पर खड़े हैं यहाँ एक कमज़ोर , हड्डियों का ढांचे बने मर्द को लाया जाता है , तीन नर्स उसे ग्लूकोज़ देने का प्रयत्न कर रही हैं लेकिन वह इतना कमज़ोर है कि उसके हाथ में ड्रिप लगाई ही नहीं जा सकती । अब्दुल्लाह मौहम्मद सलीम नामक यह व्यक्ति स्वास्थ्य केंद्र पर आते आते मौत का शिकार हो चुका है । मृतक का बेटा अहमद जंग की आग भड़काने वालों के लिए एक सन्देश देता है और वह यह कि देश की सफाई व्यवस्था को सही करो , गटरों की सफाई करो जगह जगह फैली गंदगी के ढेर हटाओं देश में मच्छर और मक्खियां ही मक्खियां हैं जो महामारी का कारण बन रही हैं। हम देश का नेतृत्व करने का दम भरने वालों से अपील करते हैं कि देश की जनता की ओर ध्यान दे ।
जो बच्चे ज़िंदा रहते हैं वो भूखे रहने को मजबूर
. बच्चों की पूरी पीढ़ी भुखमरी का शिकार हैं कुपोषण वार्ड में हमने एक नवजात शिशु को देखा जो बहुत ही कमज़ोर है वह इतना कमज़ोर है कि अपनी आँखे भी नहीं खोल सकता । उसकी मजबूर माँ अपने दस महीने के बच्चे के बदन से मक्खियां उड़ाने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकती।

डॉक्टरों के अनुसार १० महीने के बच्चे का वज़न ८ किलो होना चाहिए लेकिन अहमद मोहम्मद अहमद नामक इस बच्चे का वज़न मात्र ४ किलो है। सऊदी अतिक्रमण के बाद यमन में कुपोषण के मामले में बेतहाशा वृद्धि हुई है ।

आईसीयू में हमारी मुलाक़ात डॉ मदीना अहमद सालिम से हुई जिन्होंने हमे दुखद समाचार सुनाया कि उनकी मरीज़ एक ९ वर्षीय बच्ची थी जिसका वज़न मात्र ३ किलो ग्राम था वह बच्ची इस से ज़्यादा मुसीबतें बर्दाश्त न कर सकी और मौत की नींद सो गयी ।
खंडरों का एक दीदार यहाँ से हम लहज के सफर पर निकले जहाँ सऊदी अतिक्रमण के बाद बेघर हुए परिवार के लोगों से मुलाक़ात हुई

रास्ते में दोनों तरफ खण्डहर ही खण्डहर नज़र आ रहे हैं, हम एक पुस्तकालय में गए जिसे यह विस्थापित परिवार अपना घर मानते हैं । यहां एक बा हिजाब खातून ने हमारा स्वागत किया, घर की मुखिया एक वृध्दा ने कहा कि लोग हमे कहते रहते हैं कि सुरक्षा की खातिर अपना ठिकाना बदलते रहा करो । यह परिवार हमे अपने उजड़े घरों को दिखाने के लिए ले गया, एक दो मंज़िला भवन जिसमे अब कोई छत है न ही कोई खिड़की , उजाड़ आँगन में फैला हुआ सामान जिसमे बच्चों के जूते भी हैं । यहाँ रहने की कोई सुविधा नहीं है लेकिन फिर भी परिवार के कुछ सदस्य यहीं रह रहे हैं । अगले दिन हमने आदिला का सफर किया जहाँ हमारा स्वागत एक महिला ने किया । घर का बड़ा बच्चा १० वर्षीय एमाद है , उसकी माँ ने बताया कि वह फुटबाल का शौक़ीन था सऊदी हमले के समय मैंने सब बच्चों को अंदर घर में बंद कर दिया लेकिन उसी समय घर पर बरसे गोलों में अन्य हानि के साथ साथ फुटबाल के शौक़ीन १० वर्षीय एमाद के दोनों पैर भी सऊदी अत्याचार की भेंट चढ़ चुके थे ।
अमेरिका और ब्रिटेन दोनों यमन के अपराधी यमन वासियों का कहना है कि सऊदी अरब और उसके घटक देशों को हथियार देने वाले अमेरिका और ब्रिटेन यमन में खून की नदियां बहाने में बराबर के दोषी हैं । हमने यमन की एक पत्रकार शमा बिन्ते सईद से पूछा कि आले सऊद और उसके घटक देशों को हथियार बेचने वाले देशों के लिए आपका क्या सन्देश है ? उन्होंने कहा कि मेरा सन्देश है कि तुम्हारे नागरिक जब शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं तो दूसरे देश के नागरिकों को जंग की आग में क्यों झोंक रहे हो ? तुम विकसित देश हो और मानवाधिकार की बड़ी बड़ी बातों करते हो ग़रीब देशों को युद्ध की आग में क्यों जला रहे हो ? अजीब विडंबना है कि तुम लोग मानवाधिकार और भविष्य की बात करते हो और उसी समय अन्य देशों में आग लगाने के लिए बम बेचते हो ? हम इंसान हैं हम पागल नहीं हैं हम सब समझते हैं , वह जब ऐसे ऐसे दावे करते हैं तो हमे कहना पड़ता है कि यह युद्ध रोक लो ।
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फॉर्स न्यूज़


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