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Date of publication : 1/8/2017 17:27
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हिज़्बुल्लाह की कड़ी चेतावनी से सहमा अवैध राष्ट्र, अरसाल में नहीं कर सका आतंकियों की मदद ।

यदि अवैध राष्ट्र इस युद्ध मे कोई हस्तक्षेप करता है तो इस अवस्था में हिज़्बुल्लाह अपने तमाम मोर्चे और युद्ध का रुख अवैध राष्ट्र की ओर मोड़ देगा , इस्राईल को अपनी हरकत का खामियाज़ा भुगतना होगा हिज़्बुल्लाह इस्राईल के किसी भी टारगेट को निशाना बनाने से नहीं चूकेगा । वह अभी २००६ की मार को नहीं भूला है और अब २००१७ में हालत बहुत बदल चुकें हैं ।


विलायत पोर्टल :
  सूत्रों के अनुसार हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ़ जेरूसलम ने अपना एक शोध प्रकाशित किया है, जिसका विषय है अबु मालिक तली ने किस पर भरोसा किया और इस्राईल अरसाल में क्यों चुप रहा ? इस्राईल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार क़लमून में वहाबी आतंकी संगठन तहरीरुश्शाम के कमांडर अबु मालिक तली को हिज़्बुल्लाह की योजना का आभास हो गया था । उसने अपने आकाओं से अपने घातक आतंकियों को हिज़्बुल्लाह से मुक़ाबले के लिए अरसाल भेजने की अपील की तथा उन्हें हिज़्बुल्लाह से सामना करने के लिए भेज भी दिया गया। जॉर्डन से आतंकी संगठन और अवैध राष्ट्र के बीच की कड़ी को अवैध राष्ट्र भेजा गया ताकि अवैध राष्ट्र अरसाल में आतंकियों की मदद के बहाने हिज़्बुल्लाह पर हवाई हमले कर सके और २००६ में मिली शर्मनाक पराजय का हिसाब भी बराबर कर ले । सूत्रों के अनुसार वहाबी आतंकी संगठन का सन्देश लेकर तल अवीव गया जॉर्डन का विशेष दूत ज़ायोनी युद्ध मंत्री लिबरमैन से आश्वासन लेकर वापस पलटा, लिबरमैन ने भरोसा दिलाया कि अवैध राष्ट्र हिज़्बुल्लाह के जांबाज़ों पर हवाई हमले करने को तैयार है । इस शोध पर काम करने वाले ज़ायोनी स्कॉलर का कहना है कि ८ जुलाई को तल अवीव में छुट्टी का दिन था लेकिन इसी दिन जर्मनी के दूत ने ज़ायोनी युद्ध मंत्री से तत्काल मुलाक़ात की मांग कर दी । जर्मन दूत लिबरमैन के घर गए और उसे जर्मन विदेश मंत्री सिग्मर गैब्रिएल का एक पत्र सौंप दिया । इस पत्र में जर्मन दूत ने हिज़्बुल्लाह के एक उच्चाधिकारी से मुलाक़ात के बाद अवैध राष्ट्र को चेतावनी दी थी। उनके अनुसार हिज़्बुल्लाह पदाधिकारी ने उनसे भेंट करते समय कहा था कि वह इस क्षेत्र से आतंकियों के समूल विनाश का इरादा कर चुके हैं, इस जंग में आतंकियों की मदद के लिए अवैध राष्ट्र का कोई भी हस्तक्षेप हिज़्बुल्लाह के विरूद्ध युद्ध की घोषणा के समान होगा । इस पत्र में हिज़्बुल्लाह के नेतृत्व की ओर से कहा गया था यदि अवैध राष्ट्र इस युद्ध मे कोई हस्तक्षेप करता है तो इस अवस्था में हिज़्बुल्लाह अपने तमाम मोर्चे और युद्ध का रुख अवैध राष्ट्र की ओर मोड़ देगा , इस्राईल को अपनी हरकत का खामियाज़ा भुगतना होगा हिज़्बुल्लाह इस्राईल के किसी भी टारगेट को निशाना बनाने से नहीं चूकेगा । वह अभी २००६ की मार को नहीं भूला है और अब २००१७ में हालत बहुत बदल चुकें हैं । सूत्रों के अनुसार हिज़्बुल्लाह के इस पदाधिकारी ने जर्मन दूत से कहा कि हम आपका सम्मान करते हैं, समय रहते इस्राईल को होशियार कर दीजिए कि हम अपने देश से आतंकियों का सफाया करने जा रहे है अवैध राष्ट्र इस में हस्तक्षेप करने की मूर्खता न करे । इस ज़ायोनी स्कॉलर के अनुसार जर्मन दूत का पत्र पढ़ने के बाद ज़ायोनी युद्ध मंत्री ने नेतन्याहू से आपातकालीन मीटिंग की, अगले दिन इस संकट पर कैबिनेट मीटिंग हुई तथा अरसाल में हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध आतंकियों की मदद तथा हिज़्बुल्लाह से २००६ की पराजय का बदला लेने का ज़ायोनी सपना चकनाचूर हो गया ।
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