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Code : 188799
Date of publication : 2/8/2017 15:28
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मस्जिदे अक़्सा संकट, फिलिस्तीन को ईरान की सहायता, अवैध राष्ट्र में फैली दहशत ।

एक ज़ायोनी विश्लेषक तात्ली सिंगर का कहना है कि यह शिया - सुन्नी एकता १९४८ के बाद इस्राईल के लिए सबसे बड़ा खतरा है ।


विलायत पोर्टल :
  प्राप्त जानकारी के अनुसार मस्जिदे अक़्सा संकट और जांबाज़ फिलिस्तीनी युवकों को समर्थन तथा ईरान की बढ़ती लोकप्रियता से अवैध राष्ट्र में दहशत का माहौल है । क़ुद्स के लिए संघर्षरत फिलिस्तीनी युवकों में ईरानी युवकों द्वारा बांटे गए खाने के पैकेट को इस्राईल ने अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है ।

फिलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं के बीच बांटे गए खाने के पैकेटों को अवैध राष्ट्र ने अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को चिंता जनक बताया तथा इसे आतंकवादी क़दम बताया । इस्राईल टाइम्स के अनुसार इस पैकेट में खाना तथा मस्जिदे अक़्सा के गुम्बद समेत आयतुल्लाह ख़ामेनई का प्रख्यात वाक्य अल्लाह का फैसला है क़ुद्स आज़ाद होगा तथा क़ुद्स हमारा है जैसे नारे लिखे हुए थे ।

हालाँकि यह पैकेट एक एनजीओ की ओर से बांटे गए हैं लेकिन फिलिस्तीनी प्राधिकरण सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि इस काम के पीछे ईरान सरकार ओर वहां की एजेंसी का हाथ है । ज़ायोनी समाचार पत्र इस्राईल हयूम का कहना है कि फिलिस्तीनी युवकों को मिलने वाली ईरान की यह सहायता अरबों की है ।

ईरान फिलिस्तीनियों को यह सन्देश देने में कामयाब रहा है कि यह ईरान है जो इस्राईल की नाक के नीचे फिलिस्तीनियों की मदद के लिए सदैव तत्पर है । एक ज़ायोनी विश्लेषक तात्ली सिंगर का कहना है कि यह शिया - सुन्नी एकता १९४८ के बाद इस्राईल के लिए सबसे बड़ा खतरा है । याद रहे कि विश्व मीड़िया से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह यह घटना का चर्चा का विषय बनी हुई है।
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 तसनीम


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