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Code : 188816
Date of publication : 2/8/2017 18:30
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अरब शासकों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए फिलिस्तीन की बलि चढ़ा दी ।

एक तरफ यह लोग मस्जिदे अक़्सा को हमास , मुस्लिम ब्रदरहुड या फिलिस्तीन का मामला बताकर अपने धार्मिक कर्तव्य से मुक्त हो चुके हैं । दूसरी तरफ ज़ायोनी शासन को फायदा पहुँचाने के लिए ख़ुफ़िया तौर पर साज़िशे करने में व्यस्त हैं ताकि फिलिस्तीनी राष्ट्र को नाबूद कर सके और जवाब में क्षेत्र में सत्तारूढ़ कुछ परिवार अपनी झूटी कल्पनाओं में कुछ समय और डटकर ईरान का सामना कर सकें ।

विलायत पोर्टल :
मिस्री अलयौम ने ख़ुफ़िया माजून नाम से एक लेख प्रकाशित किया है । इस लेख में नासिर अब्दुल सलामा ने फिलिस्तीन संकट पर मिस्र के रुख तथा अनवर सादात युग से लेकर अब तक अरब देशों की इस्राईल से निकटता तथा संबंध स्थापित करने की होड़ , न्यूयॉर्क में ज़ायोनी अधिकारयों से खुफिया मीटिंगें तथा नेतन्याहू के बयान पर आधारित खाड़ी के अरब देशों और अवैध राष्ट्र के संबंधों पर प्रकाश डाला है । फिलिस्तीनी लोगों में खौफ और भय तथा प्रतिरोधी आंदोलनों में फूट फैलाकर उन्हें आपस में लड़ाने की साज़िशे, उन्हें आतंकी संगठन की लिस्ट में डालने से लेकर ग़ज़्ज़ा और पश्चिमी तट में फासला डालना तथा यासिर अराफात को ज़हर देकर मारे जाने के मुद्दे पर भी बात की है । वह कहते हैं कि मिस्र, हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन मानता है तथा फिलिस्तीन संकट को हमास तथा मुस्लिम ब्रदरहुड का मामला मानता है । मिस्र इस प्रकार कोशिश करता है कि फिलिस्तीन संकट मिस्र , मुसलिम समाज या अरब संकट न रहकर सिर्फ हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड का मामला बन कर रह जाये यहाँ तक कि उन पर आतंकवाद का लेबल भी लग जाये । लेखक ने मस्जिदे अक़्सा के विरुद ज़ायोनी अतिक्रमण और अपमान पर भी मिस्र की ओर से कोई टिप्पणी न आने पर कड़ी निंदा की । मिस्र की ओर से इस घटना पर सिर्फ इतना कहा गया कि हम अपील करते हैं कि दूसरे धर्म के लोगों की आस्था का सम्मान किया जाये यहाँ तक कि मिस्री समाज मे भी पहले जैसा कोई प्रतिरोध, कोई चेतना नज़र नहीं आई । एक तरफ यह लोग मस्जिदे अक़्सा को हमास , मुस्लिम ब्रदरहुड या फिलिस्तीन का मामला बताकर अपने धार्मिक कर्तव्य से मुक्त हो चुके हैं । दूसरी तरफ ज़ायोनी शासन को फायदा पहुँचाने के लिए ख़ुफ़िया तौर पर साज़िशे करने में व्यस्त हैं ताकि फिलिस्तीनी राष्ट्र को नाबूद कर सके और जवाब में क्षेत्र में सत्तारूढ़ कुछ परिवार अपनी झूटी कल्पनाओं में कुछ समय और डटकर ईरान का सामना कर सकें । फिलिस्तीन मामले से पीछे हटना , सीरिया में अवैध राष्ट्र के हित की खातिर चुप बैठना , यमन में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के लिए काम करना , लीबिया में फालतू की शर्तें रखना , सूडान में क़तर के हितो की रक्षा करना कुछ ऐसे काम हैं जो मिस्र की प्रतिष्ठा को मिटटी में मिला चुके हैं और कभी क्षेत्र का नेतृत्व करने वाला देश अपना महत्त्व खो चुका है । इतिहास इस बात की पुष्टि करेगा कि कभी अरब समुदाय का नेतृत्व करने वाला मिस्र गुमनाम सा धार्मिक नेतृत्व बन कर रह गया है ।
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तसनीम


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