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Date of publication : 3/8/2017 17:30
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60 दिनों तक इमाम रज़ा अ.स. ने शियों से मुलाक़ात नहीं की

कुछ लोग इमाम रज़ा अ.स. के घर आपसे मुलाक़ात करने यह कह कर हाज़िर हुए कि हम इमाम अली अ.स. के शिया हैं, और इमाम अ.स. से मिलना चाहते हैं, इमाम अ.स. ने अपने ख़ादिम से फ़रमाया, कह दो कि मुझे काम है मैं नहीं मिल सकता वापस चले जाएं, वह 60 दिनों तक आते रहे इमाम अ.स. हर दिन यही कह कर मना करते रहे, और फिर एक दिन इमाम अ.स. मुलाक़ात के लिए राज़ी हो गए और अपने न मिलने की वजह को भी बयान किया।


विलायत पोर्टल :
  कुछ लोग इमाम रज़ा अ.स. के घर आपसे मुलाक़ात करने यह कह कर हाज़िर हुए कि हम इमाम अली अ.स. के शिया हैं, और इमाम अ.स. से मिलना चाहते हैं, इमाम अ.स. ने अपने ख़ादिम से फ़रमाया, कह दो कि मुझे काम है मैं नहीं मिल सकता वापस चले जाएं, वह 60 दिनों तक आते रहे इमाम अ.स. हर दिन यही कह कर मना करते रहे, और फिर एक दिन इमाम अ.स. मुलाक़ात के लिए राज़ी हो गए और अपने न मिलने की वजह को भी बयान किया। दीन के सभी ज़िम्मेदारों के नज़दीक इंसानी हुक़ूक़ का ख़्याल रखना बहुत अहम था, शियों के आठवें दीनी रहनुमा इमाम रज़ा अ.स. ने एक दूसरे के हुक़ूक़ की ख़्याल रखने की सख़्त ताकीद की है, आप ने अनेक हदीसों में इस बात पर ज़ोर दिया है, जिसको हम यहां बयान कर रहे हैं.... इमाम रज़ा अ.स. का एक ख़ादिम था जिसका काम आए हुए मेहमानों की इमाम अ.स. से मुलाक़ात करवाना था, उसका बयान है कि, जिस समय इमाम अ.स. को मामून ने अपना उत्तराधिकारी बनाया और इमाम अ.स. ने मजबूर हो कर उसको क़बूल कर लिया, तो कुछ लोग इमाम अ.स. से मुलाक़ात के लिए यह कह कर हाज़िर हुए कि हम इमाम अली अ.स. के शिया हैं और इमाम अ.स. मुलाक़ात करना चाहते हैं, इमाम अ.स. ने फ़रमाया इन लोगों से कह दो मुझे काम है, मैं नहीं मिल सकता, उन से कह दो वापस चले जाएं। वह सभी दूसरे दिन फिर इमाम अ.स. के घर पर हाज़िर हुए और फिर वही बात दोहराते हुए इमाम अ.स. से मिलने की इजाज़त चाही, इमाम अ.स. ने फिर वही जवाब दिया, इसी तरह 2 महीने गुज़र गए, और वह लोग इन 2 महीनों में इमाम अ.स. को देख भी नहीं पाए, 2 महीने गुज़र जाने के बाद उन लोगों ने कहा कि हम इमाम अली अ.स. के शिया हैं अगर हमारे दुश्मनों को यह बात पता चल गई कि 2 महीने रोज़ाना जाने के बाद भी हम लोगों से इमाम अ.स. नहीं मिले तो वह सब बहुत ख़ुश होंगे और हम लोगों को बहुत शर्मिंदगी होगी, अब इस से ज़्यादा हम दुश्मन की ओर से बुरा भला नहीं सुन सकते। फिर इमाम रज़ा अ.स. ने उनको मुलाक़ात की इजाज़त दी, वह अंदर आए सलाम किया, लेकिन इमाम अ.स. ने सलाम का जवाब नहीं दिया, उन्होंने बैठना चाहा लेकिन इमाम अ.स. ने उन्हे खड़े रहने को कहा, उन्होंने इमाम अ.स. के इस रवय्ये को देखते हुए कहा, ऐ पैग़म्बर स.अ. के बेटे आप हम लोगों को यह किस बात की सज़ा दे रहे हैं? इमाम अ.स. ने उनके जवाब में इस आयत की तिलावत फ़रमाई, तुम तक जो भी मुसीबतें और मुश्किलें पहुंचती हैं वह सभी तुम्हारे अपने ग़लत कामों की वजह से हैं, जबकि ख़ुदा बहुत से बुरे आमाल का माफ़ करने वाला है। फिर इमाम अ.स. ने फ़रमाया, ख़ुदा की क़सम मैंने तुम लोगों के साथ जो भी किया अल्लाह के हुक्म से किया है, अल्लाह ने तुम लोगों को यह सज़ा दी है, उन लोगों ने इमाम अ.स. से वजह पूछी, इमाम अ.स. ने फ़रमाया कि, तुम लोगों का दावा है कि तुम मेरे जद इमाम अली अ.स. के शिया हो जबकि उनके शिया इमाम हसन अ.स., इमाम हुसैन अ.स., हज़रत सलमान, हज़रत अबूज़र, हज़रत मिक़दाद और हज़रत अम्मार जैसे लोग थे, यह वह लोग थे जो इमाम अली अ.स. के किसी एक हुक्म पर भी अमल करने से पीछे नहीं हटे, लेकिन तुम लोग अधिकतर इमाम अली अ.स. के हुक्म पर अमल नहीं करते, और सबसे अहम यह कि एक दूसरे के हुक़ूक़ का ख़्याल नहीं रखते। उन लोगों ने कहा, ऐ पैग़म्बर स.अ. के बेटे, हम ने जो कुछ भी कहा उसके लिए दिल से माफ़ी चाहते हैं, लेकिन हम अब भी यही कह रहे हैं कि हम केवल आप के और आप के जद इमाम अली अ.स. के चाहने वाले हैं, इसके बाद इमाम अ.स. ने उन सब से ख़ुश हो कर उनको अपने सीने से लगाया, इमाम अ.स. ने अपने ख़ादिम से पूछा यह लोग कितनी बार आए उसने जवाब दिया 60 बार, फिर इमाम अ.स. ने उनके लिए अल्लाह से मग़फ़ेरत की दुआ की, और फ़रमाया, अल्लाह ने तुम लोगों के गुनाह को माफ़ कर दिया है, फिर इमाम अ.स. ने उन लोगों और उनके परिवार वालों के लिए क़ीमती तोहफ़े भी दिए।


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