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Code : 188885
Date of publication : 6/8/2017 19:6
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सऊदी अत्याचारों का सामना कर रहे अल अवामिया की स्थिति बहुत दयनीय : इंडिपेंडेंट

सऊदी अत्यचारियों ने घेराबंदी के आरम्भ में ही मेरे घर पर हमला किया तथा मेरी पत्नी को खूब मारा पीटा उन्होने मेरी ५ वर्षीय बेटी पर बंदूक तान दी तथा ८ महीने की बच्ची को हवा में लटकाये रखा और उसे ज़मीन पर पटकने की धमकियाँ दी । उन्होंने मेरी बेटी से कहा कि हम तेरे बाप को मार डालेंगे, और उसका सर तेरे सामने तेरे पैरों में डाल देंगे ।

विलायत पोर्टल :
सऊदी अरब के शिया बहुल क्षेत्र में चारो ओर खण्डर ही खण्डर हैं, शहर की सड़के खण्डर बन चुकी हैं यह दृश्य सीरिया की बर्बादी की याद दिलाता है । इंग्लिश समाचार पत्र इंडिपेंडेंट के अनुसार जब ट्रम्प अपनी पहली विदेश यात्रा पर सऊदी अरब गए तो सऊदी अधिकारियों ने एकता के लिए बहुत हाथ पैर मारने का ड्रामा किया तथा इस्लामी देशों के १०० से अधिक व्यक्तियों को ट्रम्प की मेज़बानी के लिए दावत दी । यह आइडिया यमन में अत्याचार तथा जनसंहार में लिप्त गठबंधन के नेतृत्वकारी सऊदी शासकों का था वही आले सऊद जिन्होंने अपने ही देश के पूर्वी हिस्से में अपने नागरिकों के विरुद्ध युद्ध छेड़ रखा है, जहाँ सऊदी अत्याचारों को न मीडिया कवरेज मिलता है न ही उनके घिनौने अपराध बाहर दुनिया तक आ पाते हैं । सऊदी अरब के पूर्व में क़तीफ प्रान्त में स्थित अल अवामिया शहर की जनसंख्या ३० हज़ार है, यह शहर ४०० साल पुराना है । १० मई से यह शहर सऊदी फौजों कि घेराबंदी का शिकार है आले सऊद इन लोगों को इनके घरों से जबरन बहार भगाना चाहते है । समय बीतने के साथ साथ शहर के हालत बहुत संगीन हो गए हैं, अब तक सऊदी फौजों और शूटरों के अत्याचारों की भेंट चढ़ २५ से अधिक नागरिक शहीद हो चुके हैं ।

सऊदी फौजियों की गोलाबारी में शहर की सड़कें वीरान खण्डरों का रूप धारण कर चुकी हैं, अल अवामिया में वही दृश्य है जो अभी तक सीरिया में दिखता था ।

अल अवामिया की ख़बरों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती क्यूंकि सऊदी शासक यहाँ किसी पत्रकार को जाने नहीं देते । ऐसे में हमारा स्रोत सिर्फ सोशल मीडिया और शहर में सऊदी घेराबंदी में घिरे कुछ सोशल मीडिया यूजर ही हैं । एक स्थानीय नागरिक से हुई हमारी भेंट में उसने बताया कि वह शांतिप्रिय लेकिन आले सऊद का आलोचक था , आले सऊद ने हम लोगों को आतंकी या भगोड़ा अपराधी घोषित कर अत्याचार का न थमने वाला सिलसिला शुरू कर दिया है । हम सिर्फ सुधर चाहते हैं जब हमने सऊदी अत्याचारों के आगे झुकने से मना कर दिया तो उन्होंने पूरे शहर को निशाने पर रख लिया । सऊदी अत्यचारियों ने घेराबंदी के आरम्भ में ही मेरे घर पर हमला किया तथा मेरी पत्नी को खूब मारा पीटा उन्होने मेरी ५ वर्षीय बेटी पर बंदूक तान दी तथा ८ महीने की बच्ची को हवा में लटकाये रखा और उसे ज़मीन पर पटकने की धमकियाँ दी । उन्होंने मेरी बेटी से कहा कि हम तेरे बाप को मार डालेंगे, और उसका सर तेरे सामने तेरे पैरों में डाल देंगे । हमारे पास कोई उपाय नहीं रह गया है अपने परिवार कि रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी है , हमारे घरबार भारी गोलीबारी , RPG , हमलो में नष्ट हो गए हैं । आले सऊद का दावा है कि इस क्षेत्र के लोग आतंकी हैं जो पूरे देश को अस्थिर करना चाहते हैं । मानवाधिकार आयोग के लिए काम करने वाले मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ एडम कूगल का कहना है कि मैने अल अवामिया में पहले भी इस संकट पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है लेकिन कभी ऐसा संकट और सैन्य अभियान नहीं देखा था,सच्चाई यह है कि सऊदी अरब के इस शहर में सेना और आम नागरिकों के बीच झड़प जारी है । अल अवामिया गत वर्ष सऊदी अत्याचारों कि भेंट चढ़, शहीद होने वाले प्रख्यात धर्मगुरु शैख़ बाक़िर अल निम्र की जन्म स्थली है, जिनकी शहादत पर दुनिया भर में भारी रोष उत्पन्न हो गया था तथा आले सऊद के विरुद्ध जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे । सऊदी - यूरोपीय मानवाधिकार संगठन के प्रमुख अली के अनुसार आले सऊद लोगों पर क्रूरता और अत्याचारों के सहारे यह शहर ख़ाली कराना चाहते हैं । सऊदी सैनिकों ने एक बार फिर अल अवामिया के लोगों को शहर से निकल जाने का फरमान सुनाया है कहा जा रहा है कि अब तक सऊदी सैनिक ७० से अधिक लोगों की जान ले चुके हैं लेकिन आले सऊद ने इन ख़बरों का खंडन कर दिया है । ज्ञात रहे कि मई में संयुक्त राष्ट्र संघ ने सऊदी अरब के अत्यचारों की निंदा करते हुए अल अवामिया के नागरिकों को जबरन उनके घरों से निकलने का आरोप लगाया था । अली ने कहा कि यह संकट एक विपदा है, एक त्रासदी है लेकिन इंटरनेट , इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया तथा दूर संचार क्रांति के इस युग में भी विश्व समुदाय इन अत्याचारों से बेखबर है ।
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 अलआलम


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