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Date of publication : 8/8/2017 15:21
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सऊदी अरब और इस्राईल के बीच पक रही है खिचड़ी ?

प्रिंस तुर्की फैसल ने कहा कि अगर इस्राईल अरब जगत के साथ अमन के साथ रहेगा तो दोनों पक्ष हर चुनौती से निपट सकते हैं , उनके मुताबिक यहूदियों के पैसे और अरबों की समझदारी से बहुत कुछ किया जा सकता है । प्रिंस फैसल ने मई में इस्राईली खुफिया विभाग के पूर्व अधिकारी एमोस येड्लिन से ब्रसेल्स में मुलाकात की थी। अरब जगत और इस्राईल की मीडिया में दोनों मुल्कों के अधिकारियों के बीच होने वाली मुलाकातों से जुड़ी खबरें लगातार छपती रही हैं. इस्राईल के पूर्व डिप्लोमैट माउर कोहेन खुद कई बार अपने देश के नेताओं के साथ सऊदी देशों का दौरा कर चुके हैं......

विलायत पोर्टल :
  राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल हमीद हाकिम एक इस्राईली न्यूज़ चैनल पर इस सवाल पर परिचर्चा में बहस करते दिखे कि सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों ने क़तर से कूटनीतिक संबंध क्यों तोड़े? अब्दुल हमीद हाकिम ने कहा, "सियासी मकसद के लिए मज़हब का इस्तेमाल करने वाले हमास और अल-जिहाद जैसे प्रतिरोधी संगठनों का अरब देशों की राजनीति में कोई रोल नहीं होना चाहिए. इन देशों ने तय किया है कि मध्य पूर्व में केवल और केवल अमन होगा." उन्होंने आगे कहा, "और इस दिशा में पहला कदम चरमपंथ के स्रोत को ख़त्म करना है." इस्राईली टेलीविज़न पर किसी अरब विश्लेषक की मौजूदगी और इस्राईल से लड़ने वाले प्रतिरोधी गुटों पर उनके कमेंट कई लोगों के लिए हैरान करने वाली बात थी। इस्राईल इन प्रतिरोधी गुटों को मध्य-पूर्व में शांति की राह में रोड़ा समझता है और अरब जगत में कई लोगों के लिए यह प्रतिरोधी संगठन इस्राईली कब्ज़े के खिलाफ़ लड़ रहे हैं। कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या सऊदी अरब पहले से इस्राईल के संपर्क में है? अब्दुल हमीद हाकिम पिछले साल जुलाई में इस्राईल जाने वाले सऊदी प्रतिनिधिमंडल में भी शामिल थे. इस प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सऊदी आर्मी के रिटायर्ड जनरल अनवर सईद ईश्क़ी थे, अनवर सईद ईश्क़ी कई सालों तक सऊदी अरब की सरकार के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं. फिलहाल वे जेद्दा में 'सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड लीगल स्टडीज़ इन मिडिल ईस्ट' के चीफ़ हैं. ये भी कहा गया कि यरूशलम में उनकी मुलाकात इस्राईली विदेश मंत्रालय के महानिदेशक डोरे गोल्ड से हुई । हालांकि सऊदी मीडिया में इन ख़बरों को खारिज किया गया कि उनका कोई प्रतिनिधिमंडल इस्राईल भी गया है. लेकिन अनवर सईद ने इस्राईल दौरे की पुष्टि करते हुए कहा, "सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड लीगल स्टडीज़ इन मिडिल ईस्ट के प्रमुख की हैसियत से मुझे फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने अरब शांति योजना पर चर्चा करने के लिए रामल्ला आने की दावत दी थी. इस यात्रा के दौरान मैं यरूशलम भी गया, वहां की अक्सा मस्जिद में नमाज़ भी पढ़ी। इसके बाद फिलिस्तीनी भाईयों ने मुझे डिनर पर बुलाया. इस पार्टी में शरीक होने वाले लोगों में डोरे गोल्ड भी एक थे। रामल्ला में भी इस्राईली संसद के अरब मेंबरों ने मुझसे मुलाकात की." अनवर सईद ईश्क़ी ने ये बात भी जोर देकर कही कि उनकी इस्राईल यात्रा निजी थी और इसका सऊदी सरकार से कोई लेना-देना नहीं था. जून, 2005 में भी वॉशिंगटन स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ॉरेन रिलेशंस की एक कॉन्फ्रेंस में अनवर सईद ईश्क़ी शरीक हुए थे जिसमें उनकी बगल में डोरे गोल्ड बैठे थे। अपने भाषण में उन्होंने दावा किया कि ईरान क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है और अरब देशों का यह मानना है कि ईरान अरब देशों में तख्तापलट कर फ़ारस साम्राज्य को फिर से खड़ा करना चाहता है। उनसे पहले कुछ और सऊदी अधिकारियों ने इस्राईली अफसरों से मुलाकात की है । सऊदी खुफिया विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रिंस तुर्की फैसल और इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल याकोव एमिडरार की पिछले साल वॉशिंगटन में ही मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में सऊदी अरब और इस्राईल के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस मीटिंग में प्रिंस तुर्की फैसल ने कहा कि अगर इस्राईल अरब जगत के साथ अमन के साथ रहेगा तो दोनों पक्ष हर चुनौती से निपट सकते हैं , उनके मुताबिक यहूदियों के पैसे और अरबों की समझदारी से बहुत कुछ किया जा सकता है । प्रिंस फैसल ने मई में इस्राईली खुफिया विभाग के पूर्व अधिकारी एमोस येड्लिन से ब्रसेल्स में मुलाकात की थी। अरब जगत और इस्राईल की मीडिया में दोनों मुल्कों के अधिकारियों के बीच होने वाली मुलाकातों से जुड़ी खबरें लगातार छपती रही हैं. इस्राईल के पूर्व डिप्लोमैट माउर कोहेन खुद कई बार अपने देश के नेताओं के साथ सऊदी देशों का दौरा कर चुके हैं, उनका कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि सऊदी अरब और इस्राईल के रिश्तों ने हाल के दिनों में बड़े बदलाव देखे हैं. उन्होंने कहा, " इस्राईल या सऊदी अरब में कोई भी अधिकारी इस मुद्दे की पुष्टि नहीं करेगा क्योंकि सऊदी अरब इस रिश्ते को सार्वजनिक नहीं करना चाहता है." दोनों देशों के बीच पनपते रिश्तों में एक एंगल ईरान का भी है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मई में अपने खाड़ी दौरे के समय ईरान को अरब देशों और इस्राईल का साझा दुश्मन करार दिया था । हालांकि अनवर सईद ईश्क़ी ईरान को कोई ऐसा गंभीर खतरा नहीं मानते हैं जिसकी वजह से अरब देश इस्राईल के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ें । लेकिन काहिरा में सेंटर फ़ॉर रीजनल स्टडीज़ के प्रमुख अब्दुल मोनीम सईद का कहना है, "ईरान की फौज़ इराक़ और सीरिया में मौजूद है, लेबनान में हिजबुल्लाह उनकी नुमाइंदगी करता है, यमन में हौसियों को उनका समर्थन हासिल है, इराक़ के ज्यादातर शिया प्रतिरोधियों को ईरान में ट्रेनिंग मिलती है, और इस वजह से ईरान के खतरे को खारिज नहीं किया जा सकता है." इस्राईल इस बात से वाकिफ है कि अरब जगत को ईरान से दिक्कत है और तेल अवीव यूनिवर्सिटी में मध्य पूर्व मामलों के प्रोफेसर डेविड मानाशेरी का कहना है कि इन हालात में इस्राईल के पास अरब देशों से दोस्ती का मौका है। वह कहते हैं कि इस्राईल अलग-थलग नहीं रह सकता है और वह ऐसे दोस्तों की तलाश कर रहा है जिससे उसके हित जुड़े हुए हों।
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BBC PERSIAN


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