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Date of publication : 16/10/2017 17:52
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इमाम सज्जाद अ.स. के यज़ीद के दरबार मे दिए गए ख़ुतबे का असर

यज़ीद जो अभी तक अहंकार के नशे में चूर था, जब लगातार लोगों को ख़ुद के काम की निंदा करते हुए देखा तो अपनी क्रूरता से हांथ खींचने लगा, और वह अपनी इस घटिया और घिनौनी करतूत पर दरबार में माफ़ी मांगने पर मजबूर हो गया।

विलायत पोर्टल :  इमाम सज्जाद अ.स. को यज़ीद के दरबार में जब ख़ुतबे की अनुमति मिल गई, और आपने यज़ीद के दरबार में उसी के बुलाए गए लोगों के सामने जो ख़ुत्बा दिया जिसे पिछले लेख में पेश किया गया था उस ख़ुत्बे ने यज़ीद के दरबार में ऐसा इंक़ेलाब पैदा किया कि सारे दरबारी यही कह रहे थे कि कर्बला के शहीद विद्रोही और बाग़ी नहीं थे, और यह लोग ऐसे ख़ानदान से हैं जिनके नाम से यज़ीद मुसलमानों पर हुकूमत कर रहा है।
इमाम अ.स. के ख़ुत्बे का असर यह था कि, इमाम अ.स. के ख़ुत्बे के बीच अज़ान देने वाले ने यज़ीद से कहा, ऐ यज़ीद जब तू जानता था कि यह पैग़म्बर स.अ. की औलाद हैं फिर क्यों इन लोगों को क़त्ल किया और उनके माल को लूटा और उनके घर की औरतों को क़ैदी बनाया। (तर्जुमा-ए-मक़तले अबू मिख़नफ़, पेज 197)
इसी तरह एक यहूदी आलिम जो उसी दरबार में था, उसने इमाम अ.स. के ख़ुत्बे को सुन कर यज़ीद से पूछा, यह जवान कौन है? यज़ीद ने जवाब दिया, यह इमाम हुसैन अ.स. के बेटे हैं, उसने पूछा कि कौन हुसैन (अ.स.)? इसी तरह वह सवाल करता रहा यहां तक कि वह समझ गया कि यह पैग़म्बर स.अ. के ख़नानदान से हैं, जिन्हें कर्बला में भूखा प्यासा शहीद कर दिया गया, वह पैग़म्बर स.अ. की इकलौती बेटी हज़रत ज़हरा स.अ. के बेटे हैं, फिर यज़ीद की ओर देख कर कहा कि, तुम कल ही अपने पैग़म्बर स.अ. से जुदा हुए और आज ही उनके बेटे को शहीद कर दिया। (बिहारुल अनवार, जिल्द 45, पेज 139)
यज़ीद जो अभी तक अहंकार के नशे में चूर था, जब लगातार लोगों को ख़ुद के काम की निंदा करते हुए देखा तो अपनी क्रूरता से हांथ खींचने लगा, और वह अपनी इस घटिया और घिनौनी करतूत पर दरबार में माफ़ी मांगने पर मजबूर हो गया। (तर्जुमा-ए-मक़तले अबू मिख़नफ़, पेज 198)
यज़ीद माफ़ी मांगते हुए अपने ग़लत कामों और घटिया करतूतों को इब्ने ज़ियाद के सर मंढ़ कर उस पर लानत करने लगा, आख़िर में वही यज़ीद जो इमाम सज्जाद अ.स. का भरे दरबार में अपमान कर रहा था उनके सामने खड़ा हो कर कहता है कि आप जो भी कहिए, जहां भी रहने को कहिए हम उसको करने के लिए तैय्यार हैं। (तारीख़े तबरी, जिल्द 7, पेज 378, एहतेजाज, जिल्द 2, पेज 311)
ज़ाहिर सी बात है कि इमाम सज्जाद अ.स. और दूसरे सभी अहले हरम अ.स. सबसे पहले कर्बला जाना चाहते थे ताकि उनके लिए अज़ादारी करें और उन पर रो सकें, और फिर अपने जद के शहर मदीना जाने को कहा।
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