Thursday - 2018 July 19
Languages
Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 190070
Date of publication : 18/10/2017 13:40
Hit : 531

ट्रम्प की बयानबाज़ी का जवाब, समय की बर्बादी, अमेरिका की मक्कारी से रहें होशियार : आयतुल्लाह ख़ामेनई

याद रहे जब तक सामने वाला इस समझौते का पालन कर रहा है हम भी इस का सम्मान करेंगे लेकिन अगर सामने वाला पक्ष इस समझौते से हटता है तो हम भी इस समझौते को तोड़ने में कोई संकोच करेंगे ।

विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई ने युवााओं से भेंट करते हुए कहा कि युवा प्रतिभा देश का धरोहर है । आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि दुश्मन की मक्कारी, षड्यंत्र और चतुराई से सतर्क रहने की आवश्यकता है। आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि इस्लामी क्रांति के बाद से ही अमेरिका ने ईरान से दुश्मनी शुरू कर दी थी उस समय हम कोई मिसाइल शक्ति सम्पन्न, क्षेत्र में प्रभाव या शक्तिशाली देश भी नहीं थे, लेकिन अमेरिका की दुश्मनी का कारण यह था कि उसे भली भांति पता था कि इस्लामी क्रांति के साथ उसने अपने इशारों पर चलने वाले एक महत्वपूर्ण और समृद्ध देश को खो दिया है । उन्होंने कहा कि हमारे पास इतना समय नहीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति की फालतू बयानबाज़ी का जवाब दिया जाए। आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि जो समाज अपने दुश्मन को न पहचाने, उसे अपना दोस्त या निष्पक्ष समझे उसे बहुत अधिक खतरों का सामना करना पड़ता है । उन्होंने ईरान के विरुद्ध अमेरिकी षड्यंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि युवा , क्रन्तिकारी , और ईमान की दौलत से मालामाल ईरान को 50 साल पीछे ले जाएँ, जो असंभव है और इसी लिए हमारा दुश्मन तिलमिलाया हुआ है । आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि अमेरिका का सिस्टम अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनी लॉबी के हाथों में है जो विश्व भर में दबी कुचली और पिछड़ी जातियों की दुश्मन और अधिकतर युद्धों की आग भड़काने की ज़िम्मेदार है। आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि ईरान के विरुद्ध अमेरिका के क्रोध का कारण यह भी है कि ईरान ने सीरिया , इराक और क्षेत्र को लेकर रचे गए अमेरिका के बीस वर्षीय षड्यंत्र को असफल कर दिया है तथा अमेरिका के सपनो को मिटटी में मिला दिया है अतः सिपाह पासदारने इंक़ेलाब अर्थात आईआरजीसी बल के विरुद्ध अमेरिकी नेताओं को भाषण बाज़ी करना ही थी । सुप्रीम लीडर ने ईरान परमाणु समझौते पर कहा कि वह कहते थे कि समझौता हो जाये तो ईरान के साथ संबंधों में सुधार आये, दुश्मनी अतीत की बात हो जाये लेकिन परमाणु समझौते के बाद भी उनकी दुश्मनी में कोई कमी नहीं आई है बल्कि ईरान के विरुद्ध उनकी दुश्मनी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । सुप्रीम लीडर ने यूरोप द्वारा परमाणु समझौते का समर्थन किये जाने पर कहा कि यूरोप जानता है कि यह समझौता उनके हितों के अनुकूल है अतः वह इसका समर्थन कर रहे हैं, यह अच्छी बात है लेकिन पर्याप्त नहीं है। यूरोप को चाहिये कि वह अमेरिका को इस समझौते का उल्लंघन करने से रोके और अमेरिकी कांग्रेस के संभावित प्रतिबंधों का सामना करते हुए उन्हें ईरान विरोधी काम से रोके । आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि याद रहे जब तक सामने वाला इस समझौते का पालन कर रहा है हम भी इस का सम्मान करेंगे लेकिन अगर सामने वाला पक्ष इस समझौते से हटता है तो हम भी इस समझौते को तोड़ने में कोई संकोच करेंगे ।
..............................
फार्स न्यूज़


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :