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Code : 190287
Date of publication : 30/10/2017 16:33
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चेहलुम पर इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत का सवाब

जैसे ही वह ज़ियारत के लिए निकलता है अल्लाह दो फ़रिश्तों को उसके साथ भेज कर हुक्म देता है कि जो भी नेकी उसकी देखो उसे उसी समय लिख लें और उसकी किसी भी बुराई को न लिखें, और जब वह ज़ियारत कर ले तो उस से यह कह कर ख़ुदा हाफ़िज़ी करें कि ऐ ख़ुदा के वली, तुम्हारे गुनाह माफ़ कर दिए गए हैं, और अब तुम अल्लाह उसके रसूल स.अ. और अहले बैत अ.स. के करीबियों में शुमार किए जाओगे, अब तुम कभी जहन्नम की आग के क़रीब भी नहीं जाओगे और न ही जहन्नम की आग तुम्हारे क़रीब आएगी।

विलायत पोर्टल :  इमाम हुसैन अ.स. की वह शख़्सियत है जिनकी ज़ियारत पर सभी इमामों ने और हमारे बुज़ुर्ग उलेमा ने बहुत ज़ोर दिया है, शिया और सुन्नी इतिहासकारों के अनुसार कर्बला में इमाम हुसैन अ.स. की शहादत के बाद इमाम अ.स. के चेहलुम पर 61 हिजरी में अहले हरम अ.स. कर्बला पहुंचे हैं, और कर्बला के शहीदों के सरों को उनके जिस्मों के किनारे दफ़्न किया है।
हो सकता है हमारे दिमाग़ में सवाल उठता हो कि आख़िर क्यों इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत पर इतना ज़ोर दिया गया है, और इमाम अ.स. चेहलुम को इतनी अहमियत क्यों दी गई है, इसका जवाब इमाम सादिक़ अ.स. ने बयान किया है जिस से इस विषय की अहमियत का अंदाज़ा हो जाता है।
इमाम सादिक़ अ.स. इमाम हुसैन अ.स. की पैदल ज़ियारत के सवाब के बारे में फ़रमाते हैं कि जो भी इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत के लिए पैदल जाएगा, उसके आमाल नामे में हर क़दम पर एक नेकी लिखी जाएगी और उसके हर क़दम पर एक गुनाह माफ़ किया जाएगा, और हर क़दम पर उसके मर्तबे में एक दर्जे को बढ़ाया जाएगा, और जैसे ही वह ज़ियारत के लिए निकलता है अल्लाह दो फ़रिश्तों को उसके साथ भेज कर हुक्म देता है कि जो भी नेकी उसकी देखो उसे उसी समय लिख लें और उसकी किसी भी बुराई को न लिखें, और जब वह ज़ियारत कर ले तो उस से यह कह कर ख़ुदा हाफ़िज़ी करें कि ऐ ख़ुदा के वली, तुम्हारे गुनाह माफ़ कर दिए गए हैं, और अब तुम अल्लाह उसके रसूल स.अ. और अहले बैत अ.स. के करीबियों में शुमार किए जाओगे, अब तुम कभी जहन्नम की आग के क़रीब भी नहीं जाओगे और न ही जहन्नम की आग तुम्हारे क़रीब आएगी। (कामिलुज़-ज़ियारात, पेज 134)
हम यहां पर चेहलुम के मौक़े पर इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत के बारे में कुछ बुज़ुर्ग उलेमा के अक़वाल को भी पेश करेंगे.....
आयतुल्लाह ख़ामेनई आप इमाम हुसैन अ.स. की चेहलुम के दिन ज़ियारत करने जाने की अहमियत को इस तरह बयान करते हैं कि इमाम हुसैन अ.स. का अपनी ओर खींचने और आकर्षित करने का सबसे पहला मौक़ा उसी साल देखा गया था जो चेहलुम को जाबिर को मदीने से कर्बला खींच कर ले गई, और आज वही आकर्षित करने वाली ताक़त है जो आप लोगों को सदियों बाद भी खींच कर ले जा रही है।
आयतुल्लाह बहजत आप पैदल इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत को जाने के बारे में फ़रमाते हैं कि, हदीस में है कि इमाम ज़माना अ.स. जब ज़ुहूर करेंगे पांच फ़रियाद बुलंद करेंगे, जिसमें से एक फ़रियाद ऐसी होगी जिसमें वह ख़ुद को इमाम हुसैन अ.स. के नाम से पहचनवाएंगे, इसी लिए उस ज़माने में सभी को इमाम हुसैन अ.स. की मारेफ़त हासिल होनी चाहिए, लेकिन आज अगर देखा जाए तो अभी बहुत से लोगों ने इमाम हुसैन अ.स. को नहीं पहचाना है और इसमें केवल हम लोगों की ग़लती है, क्योंकि हम लोगों ने इमाम हुसैन अ.स. के लिए ऐसी फ़रियादें नहीं बुलंद कीं जिसकी आवाज़ पूरी दुनिया तक पहुंचती, आज इस दौर में इमाम अ.स. के चेहलुम पर पैदल उनकी ज़ियारत को जा कर पूरी दुनिया के लोगों को पहचनवाया जा सकता है। जबकि इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत अब से कुछ साल पहले तक अधिकतर जगहों पर ख़तरे से ख़ाली नहीं थी लेकिन फिर भी लोग इमाम अ.स. के इश्क़ में ख़तरे को मोल ले कर चेहलुम के मौक़े पर आपकी ज़ियारत को आते रहे हैं।
आयतुल्लाह वहीद ख़ुरासानी आप इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत को पैग़म्बर स.अ. इमाम अली अ.स. और हज़रत ज़हरा स.अ. की सच्ची मुहब्बत रखते हुए करने के बारे में इमाम सादिक़ अ.स. के हदीस का हवाला देते हुए फ़रमाते हैं, कि जो लोग भी इमाम अ.स. की ज़ियारत को जाते हैं वह ख़ुश क़िस्मत हैं जो कर्बला जैसी जगह पर नंगे पांव चल रहे हैं, फिर आपने सभी इमाम अ.स. की ज़ियारत को जाने वालों से यह भी कहा कि चेहलुम के दिन इमाम ज़माना अ.स. के ज़ुहूर की दुआ ज़रूर करें।
आयतुल्लाह साफ़ी गुलपाएगानी आप फ़रमाते हैं कि करोड़ो लोगों का पूरी दुनिया से इमाम अ.स. के चेहलुम के दिन जमा होना इस बात का सुबूत है कि इमाम हुसैन अ.स. की क़ुर्बानी का मक़सद कभी भुलाया नहीं जा सकता, कर्बला की राह के शहीद हक़ और सच्चाई की राह के शहीद हैं, अल्लाह उन्हें इमाम अ.स. के साथ महशूर फ़रमाए।
आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी आप आरज़ू करते हैं कि आप का भी शुमार इमाम हुसैन अ.स. के ज़ाएरीन में हो, आप चेहलुम पर पैदल चलने को शिया मज़हब की मज़बूती बताते हुए कहते हैं कि मेरी आरज़ू है कि मेरे जिस्म में इतनी ताक़त आ जाए कि मैं कर्बला पैदल जाने वालों के क़ाफिले में शामिल हो सकूं, क्योंकि हर साल कर्बला में चेहलुम पर लोगों की इतनी बड़ी तादाद में जमा होना उनकी अहले बैत अ.स. से मुहब्बत को दर्शाती है।
आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी आप चेहलुम पर इमाम हुसैन अ.स. की पैदल ज़ियारत करने पर ज़ोर देते हुए कहते हैं कि, यह एक बहुत अहम क़दम है कि नजफ़ शहर और उसके अलावा पूरी दुनिया से ज़ाएरीन पैदल चल कर कर्बला पहुंच कर अपने जोश, जज़्बे और मुहब्बत का सुबूत पेश करते हैं। आपने ज़ोर देते हुए यह भी कहा कि होशियार रहिये कहीं कोई इसमें किसी तरह की बिदअत, ख़ुराफ़ात या ग़लत फ़िक्र न शामिल कर दे, इमाम हुसैन अ.स. की अज़ादारी हमारे लिए बहुत क़ीमती है जिसका हम बहुत सी जगहों पर इस्तेमाल कर सकते हैं, हमें अपनी इस क़ीमती पूंजी पर गर्व है, हमारा मानना यह है कि हमें पूरी मेहनत से इस पूंजी को आने वाली नस्लों के लिए बचाना चाहिए।
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