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Code : 190473
Date of publication : 15/11/2017 17:1
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नजफ़ - कर्बला बिलियन मार्च, शिया शक्ति और आपसी एकजुटता का प्रतीक : इंडिपेंडेंट

इन 20 दिनों में इराक के शहर और गांव के गांव खाली हो जाते हैं क्योंकि यहां के लोग इमाम की बारगाह में हाज़िरी देने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करने या इमाम की ज़ियारत के लिए निकल चुके होते हैं ।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्रिटिश समाचार पत्र इंडिपेंडेंट ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम के अवसर पर होने वाले नजफ़ - कर्बला मार्च को शिया शक्ति और आपसी भाईचारे और एकजुटता का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह महान हुजूम और यह मार्च शिया शक्ति का प्रतीक बन गया है । पैट्रिक कॉकबर्न ने इंडिपेंडेंट के लिए लिखे अपने लेख में कहा कि चेहलुम के अवसर पर दुनिया भर से करोड़ों लोग काले कपडे पहन कर कर्बला में उपस्थित हुए यह दुनिया का सबसे बड़ा मजमा था जो कर्बला में एक धार्मिक प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए उपस्थित हुआ । उन्होंने कहा कि 50 मील से भी अधिक दूरी तक सड़क के दोनों ओर लगे तंबूओं में मेहमानों की आवभगत और रहने के प्रबंध के साथ होना वाला यह मार्च शिया शांति और आपसी सौहार्द का प्रतीक बन गया है । बसरा या किरकुक से आने वाले श्रद्धालु 10-10 तो कुछ 12-12 दिन पैदल चल कर अपने मौला की बारगाह मे सलामी देने के लिए चले आते हैं । एक समय था जब सद्दाम के डर के कारण यहाँ के लोग सुनसान रास्तों से चल कर कर्बला आते थे लेकिन आज हज़ारों जवानों की क़ुर्बानी देने तथा सद्दाम और दाइश जैसे खूंखार आतंकी संगठन के पतन के बाद जो यहाँ की शिया प्रभाव वाली सरकार के पतन का सपना लेकर उठे थे, करोड़ों लोग इमाम की बारगाह में हाज़िरी देने आते हैं । नजफ़ - कर्बला के रास्ते में ज़ाएरीन की सेवा के लिए कैंप लगाने वाले एक कबीले के सरदार करीम के अनुसार हम सद्दाम के समय में छुप छुप कर फरात नदी के किनारों से होकर यह मार्च करते थे क्योंकि सद्दाम का भय था, अगर उसे खबर हो जाती थी तो वह लोगों को बंदी बना लेता था या शहीद कर देता था । पैट्रिक कॉकबर्न के अनुसार इन 20 दिनों में इराक के शहर और गांव के गांव खाली हो जाते हैं क्योंकि यहां के लोग इमाम की बारगाह में हाज़िरी देने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करने या इमाम की ज़ियारत के लिए निकल चुके होते हैं ।
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इरना


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