नवीनतम लेख

जमाल ख़ाशुक़जी हत्याकांड पर दबाव बढ़ा तो ट्रम्प के लिए संकट खड़ा कर सकता है बिन सलमान ! ज़ायरीन को निशाना बनाने के लिए महिलाओं की वेशभूषा में आए संदिग्ध गिरफ्तार ट्रम्प की ईरान विरोधी नीतियों ने सऊदी अरब को दुस्साहस दिया, सऊदी राजदूतों को देश निकाला दिया जाए । कर्बला से ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट कर मुक़ाबले की सीख मिलती है... अफ़ग़ान युद्ध की दलदल से निकलने के लिए हाथ पैर मार रहा है अमेरिका : वीकली स्टैंडर्ड ईरान में घुसपैठ करने की हसरत पर फिर पानी, आईएसआईएस पर सेना का कड़ा प्रहार ईरान से तेल आयात जारी रखेगा श्रीलंका, भारत की सहायता से अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट पाने में जुटा ड्रामा बंद करे आले सऊद, ट्रम्प और जॉर्ड किश्नर को खरीदा होगा अमेरिका को नहीं : टेड लियू ज़ायोनी सैनिकों ने किया क़ुद्स के गवर्नर का अपहरण ट्रम्प ने दी बिन सलमान को क्लीन चिट, हथियार डील नहीं होगी रद्द रूस के कड़े तेवर, एकध्रुवीय दुनिया का सपना देखना छोड़ दे अमेरिका आले सऊद ने अमेरिका के आदेश पर ख़ाशुक़जी के क़त्ल की बात स्वीकारी : मुजतहिद एक पत्रकार की हत्या पर आसमान सर पर उठाने वाला पश्चिमी जगत और अमेरिका यमन पर चुप क्यों ? जमाल ख़ाशुक़जी हत्याकांड में ट्रम्प के दामाद की भूमिका की जांच हो साम्राज्यवाद के मुक़ाबले पर डटा ईरान और ग़ुलामी करते मुस्लिम देशों में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ : फहवी हुसैन
Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 190620
Date of publication : 26/11/2017 19:1
Hit : 2316

अमेरिकी मैगज़ीन का ऐलान,

आज का यज़ीद है सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान : नेशनल इंटरेस्ट

मोहम्मद बिन सलमान भी यज़ीद की भांति 33 साल का है ,680 ईस्वी में जिस प्रकार यज़ीद ने शियों को कुचलने क प्रयास किया था मोहम्मद बिन सलमान भी उसी प्रकार मिडिल ईस्ट में शिया समुदाय को प्रभावहीन करने का प्रयास कर रहा है ।


विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिका की प्रख्यात वेबसाइट नेशनल इंटरेस्ट ने सऊदी अरब का बड़ा जुआ नाम से एक लेख प्रकाशित करते हुए सऊदी अरब के अय्याश युवराज को वर्तमान समय का यज़ीद कहा है । द नेशनल इंटरेस्ट के अनुसार 680 ईस्वी में यज़ीद की हुकूमत की संवैधानिकता पर सवाल उठाने वाले हुसैन इब्ने अली और उनके 72 साथियों का सामना करने के लिए यज़ीद बिन माविया ने 30 हज़ार से अधिक सेना भेजी थी । इमाम हुसैन अपने साथियों समेत शहीद हो गए लेकन उस युद्ध के बाद से शियों का राजनैतिक अस्तित्व और मज़बूत हुआ । नेशनल इंटरेस्ट के अनुसार वर्तमान समय में यज़ीद का उत्तराधिकारी मोहम्मद बिन सलमान है वह भी यज़ीद की भांति 33 साल का है ,680 ईस्वी में जिस प्रकार यज़ीद ने शियों को कुचलने क प्रयास किया था मोहम्मद बिन सलमान भी उसी प्रकार मिडिल ईस्ट में शिया समुदाय को प्रभावहीन करने का प्रयास कर रहा है । जिस के लिए उसका पहला निशाना हिज़्बुल्लाह है, ऐसा लगता है कि बिन सलमान यज़ीद के पदचिन्हों पर चलते हुए हिज़्बुल्लाह को हुसैन इब्ने अली के साथियों की तरह कम संख्या में आंकते हुए उसके विरुद्ध मोर्चा खोलना चाहता है । बिन सलमान का उद्देश्य है कि वह शिया बहुल देश ईरान को मजबूर करे कि वह फ़ारस की खाड़ी पर सऊदी अरब के प्रभाव को संवैधानिक मान्यता दे जैसे यज़ीद का प्रयास था कि इमाम हुसैन उसकी सत्ता को संवैधानिक मान्यता दें । नेशनल इंटरेस्ट के अनुसार सऊदी अरब को इस बात का आभास है कि जब तक इस्लामी रिपब्लिक ईरान मे इस्लामी सत्ता स्थापित है उसका इस्लामी सत्ता तथा न्याय प्रणाली वाला ढोंग चलने वाला नहीं है । अतः जो कुछ 680 ईस्वी में हुआ वह सब कुछ फिर से खाड़ी में दोहराया जा सकता है । लेकिन वर्तमान में एक बड़ा फ़र्क़ है और वह यह कि सऊदी अरब को अब एक छोटे से शिया ग्रुप का सामना नहीं है बल्कि उस ईरान का सामना है जो सऊदी अरब से सैन्य शक्ति में बहुत आगे की चीज़ है । हालाँकि कहा जा सकता है कि आले सऊद के पास विश्व तेल संपदा का १/५ भाग मौजूद है और वह ईरान को रोकने के लिए इसे हथियार के रूप में प्रयोग कर सकता है लेकिन इस सब के बावजूद सऊदी अरब को हालिया वर्षों में ईरान के मुक़ाबले शर्मनाक पराजयों का सामना करना पड़ा है । यह बात सीरिया में आसानी से देखी जा सकती है जहाँ सऊदी अरब ने खुल कर वहाबी आतंकी संगठनों की सैन्य एवं आर्थिक सहयता की लेकिन ईरान समर्थित बश्शार असद सरकार ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दूसरी ओर क़तर के विरुद्ध भी सऊदी अरब को मुंह की खानी पड़ी है और यह देश भी ईरान के पाले में चला गया है । यमन युद्ध भी सऊदी अरब की शर्मानक पराजयों का मुंह बोलता सुबूत है जहाँ सऊदी अरब क्रूरता और अत्याचार की सीमायें लाँघ कर भी अंसारुल्लाह आंदोलन और इस देश की शिया जनता को परास्त करने में नाकाम रहा है । एक ओर आले सऊद हैं जो अमेरिका और साम्राज्यवादी शक्तियों के खुले समर्थन के बाद भी अपने उद्देश्यों में नाकाम हैं, दूसरी ओर ईरान है जो पिछले 40 साल के कड़े और अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों के बाद भी सफलता और विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उसने दाइश के मुक़ाबले इराक की सहायता की, उसने बश्शार असद की सरकार को पतन होने से रोका, उसे लेबनान में व्यापक जन समर्थन प्राप्त है तथा मिडिल ईस्ट में प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है ।
..........................
ताबनाक


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :