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Code : 190668
Date of publication : 30/11/2017 17:56
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इमाम ख़ुमैनी र.ह. ने मुझे बार्डर पर जाने का हुक्म दिया

उनके पास जाने की वजह यह थी कि पहली बात तो यह कि मैं उनको सारे हालात बता सकूं, दूसरे यह कि बार्डर पर जाने की अनुमति ले लूं, उन्होंने अनुमति के बजाए मुझे हुक्म दिया कि जाओ, मुझे इतने अच्छे और साफ़ शब्दों में हुक्म देने की उम्मीद नहीं थी, उस बैठक में शहीद चमरान भी थे, वह शायद बार्डर जाने की बात के लिए नहीं आए थे लेकिन जब देखा मैं बार्डर पर जाने की अनुमति के लिए आया हूं तब उन्होंने भी इमाम ख़ुमैनी र.ह. से कहा कि मैं भी जाना चाहता हूं, उन्होंने कहा ठीक है तुम भी जाओ।

विलायत पोर्टल :  मैं इमाम ख़ुमैनी र.ह. के पास दक्षिणी बार्डर पर लड़ रहे जवानों का उत्साह बढ़ाने के लिए उनके पास जाने की अनुमति मांगने गया, ताकि सिपाहियों के हौसले बुलंद रहे, उनके पास जाने की वजह यह थी कि पहली बात तो यह कि मैं उनको सारे हालात बता सकूं, दूसरे यह कि बार्डर पर जाने की अनुमति ले लूं, उन्होंने अनुमति के बजाए मुझे हुक्म दिया कि जाओ, मुझे इतने अच्छे और साफ़ शब्दों में हुक्म देने की उम्मीद नहीं थी, उस बैठक में शहीद चमरान भी थे, वह शायद बार्डर जाने की बात के लिए नहीं आए थे लेकिन जब देखा मैं बार्डर पर जाने की अनुमति के लिए आया हूं तब उन्होंने भी इमाम ख़ुमैनी र.ह. से कहा कि मैं भी जाना चाहता हूं, उन्होंने कहा ठीक है तुम भी जाओ। हम दोनों ख़ुश हो कर उसी समय इमाम ख़ुमैनी र.ह. के घर से बाहर आ गए, ज़ोहर का समय हो चुका था, हम दोनों ने तय किया कि उसी दिन ज़ोहर के बाद अहवाज़ शहर की ओर जाएंगे, हालांकि मैं जल्दी जाने के लिए उत्सुक था, लेकिन शहीद चमरान ने कहा कि उन्हें कुछ काम है 2-3 घंटे लगेंगे, क्योंकि वह अपने साथ कुछ दोस्तों और जान पहचान के लोगों को भी लाना चाह रहे थे, और जाने कि लिए सामान वग़ैरह भी तैय्यार करना था, इसलिए उन्होंने ज़ोहर के बाद चलने को कहा, मैंने भी उनके काम को देखते हुए ज़ोहर बाद जाने का क़बूल कर लिया, मेरे ख़्याल से दोपहर के 3-4 बज रहे थे जब हम मेहराबाद एयरपोर्ट से शहीद चमरान और उनके दोस्तों के साथ अहवाज़ शहर के लिए निकले, मैं अहवाज़ वापस होने के लिए नहीं जा रहा था, और सोंच भी रहा था कि वापस तेहरान नहीं आ पाऊंगा, मैंने अपने सुरक्षा गार्डों से भी कह दिया था कि अब तुम लोग आज़ाद हो मैं वापस होने के लिए नहीं जा रहा हूं, वह सभी भावुक हो गए और कहने लगे कि हम सब भी बार्डर चलने को तैय्यार हैं, वहां हम लोग सब कुछ भूल कर केवल जंग पर ध्यान देंगे, मैंने कहा कि अगर ऐसा है तो ठीक है अगर वहां मेरी सुरक्षा भूल कर केवल देश की सुरक्षा पर ध्यान दोगे तो चल सकते हो, वह सब भी ख़ुशी से चलने को तैय्यार हो गए, क्योंकि मैं भी बार्डर पर जंग के लिए जा रहा था इसलिए मुझे अब सुरक्षा गार्डों की ज़रूरत नहीं थी।
(12 अक्टूबर 1981 में T.V. इंटरव्यू में आपका बयान)
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