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Date of publication : 17/12/2017 16:26
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शैतान के जाल से कैसे बचें?

शैतान के सबसे अहम जाल में से एक नफ़्स की पैरवी करना है, क्योंकि जब तक इंसान के अपने वजूद में शैतानी अड्डा न हो शैतान कभी इंसान को गुमराह नहीं कर सकता, शैतान हमेशा नफ़्स की बात को सराहते हुए उसकी पुष्टि करता है, क़ुर्आन इस बारे में फ़रमाता है (शैतान) तू अपनी पैरवी करने वालों के अलावा कभी मेरे बंदों पर हावी नहीं हो सकता। क्योंकि जो अल्लाह का बंदा होता है वह कभी नफ़्स को अल्लाह के हुक्म पर हावी नहीं होने देता।


विलायत पोर्टल : अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलना हर मुसलमान का दीनी फ़र्ज़ है, और हमें हर समय ध्यान में रखना चाहिए कि कहीं अल्लाह के हुक्म की ना फ़रमानी न हो जाए, और इसके लिए सबसे अहम शैतान के जाल से अपने आपको बचाना है, बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो ज़ाहिर में अल्लाह के हर हुक्म पर अमल भी करते हैं और कहीं न कहीं शैतान के जाल में फंसे भी दिखाई देते हैं, इसलिए अपने आमाल को बाक़ी रखने के लिए ज़रूरी है कि ख़ुद को शैतान के जाल से भी बचाए रखें।
जब यह बात तय हो गई कि शैतान से बचे बिना , हमारे आमाल बाक़ी नहीं रह सकते तो अब उन रास्तों को भी जानना चाहिए जिनके द्वारा हम अपने आमाल को शैतान के जाल और उसके धोखे से बचा सकते हैं, क्योंकि शैतान को ख़ुद से दूर करने के लिए उसके आने के रास्तों और उन रास्तों को बंद करने का उपाय दोनों ही का समझना हमारे लिए ज़रूरी है, ताकि उसको अपने से दूर भगा कर अपने आमाल को बचाया जा सके। इस लेख में उन्हीं रास्तों को संक्षेप में बयान किया जाएगा।
1. सबसे पहले शैतान की चालों और उसके धोखे से ख़ुद को बचाने के कुछ अहम रास्ते हैं जिनको यहां पर बयान किया जा रहा है।
तक़वा क़ुर्आन में तक़वा को इंसानी लिबास बताया गया है, अल्लाह फ़रमाता है कि बेहतरीन लिबास तक़वा है, जैसे इंसान अपने जिस्म को छिपाने के लिए कपड़े का इस्तेमाल करता है ताकि ना महरम निगाहों से बच सके, अल्लाह कहता है कि तुम्हारे लिए सबसे अच्छा लिबास तक़वा है, इसका मतलब है मुमकिन है कि तुम्हारे इन कपड़ों के बावजूद तुम्हारी निगाहें ना महरमों पर पड़ जाएं लेकिन अगर तुम्हारे बदन पर तक़वा नामी लिबास हुआ तो शैतान कभी भी तुम्हारी निगाहों को ना महरम तक नहीं ले जाएगा।
इमाम अली अ.स. ने हदीस में तक़वा को एक ऐसा मज़बूत क़िला कहा जिसमें किसी तरह भी सेंध नहीं लगाई जा सकती है।
बदन के अंगों पर कंट्रोल ज़बान, आंख, कान, फ़िक्र और भी बदन के दूसरे अंग दिल में प्रवेश के दरवाज़े हैं, इसलिए इन पर कंट्रोल करना बेहद ज़रूरी है।
हिसाब किताब बदन के अंगों पर कंट्रोल के बाद हिसाब किताब की बारी आती है, क्योंकि पिछली ग़लतियों की भरपाई और भविष्य में दोबारा उन ग़लतियों को न दोहराने के लिए हिसाब किताब बहुत ज़रूरी है।
2. सही समय पर सही प्रतिक्रिया शैतान के बहकाने पर उसकी उचित प्रतिक्रिया ज़रूरी है, जैसा कि पैग़म्बर स.अ. की हदीस है कि तुम्हारे दुश्मन जिन्न, शैतान और उसके सिपाही हैं, इसलिए जब कभी उनमें से कोई तुम्हारे पास आए और कहे कि तुम्हारा बेटा मर गया तो तुम पलट कर कह दो कि सभी ज़िंदा लोग मरने के लिए ही पैदा किए गए हैं, अगर वह कहे कि तुम्हारी दौलत ख़त्म होने वाली है तो तुम कह दो अल्लाह का शुक्र है वही है जो देता है और फिर ले लेता है, अगर कहे कि लोग तुम पर ज़ुल्म करते हैं लेकिन तुम नहीं करते तो कह दो कि जो भी दुनिया में ज़ुल्म करते हैं वह सब क़यामत के दिन मुश्किल में रहेंगे, अगर कहे कि तुम क्यों नेकियां करते रहते हो तो कहो कि मेरे गुनाह मेरी नेकियों से कहीं अधिक हैं, अगर कहे कि तुम नमाज़ कितनी ज़्यादा पढ़ते हो तो कहो कि मेरी कमियां और सुस्तियां मेरी नमाज़ से कहीं अधिक हैं, अगर कहे कि तुम ग़रीबों और ज़रूरतमंदों पर कितना ज़्यादा ख़र्च करते हो तो कहो कि अल्लाह का दिया हुआ उस से कहीं अधिक है जिसे मैं ख़र्च करता हूं, अगर कहे कि तुम पर कितना ज़ुल्म करते हैं कह दो मैंने उस से कहीं अधिक ज़ुल्म किया है, अगर कहे कि कितना ज़्यादा अल्लाह के लिए काम करते हो तो कहो उसकी ना फ़रमानी और गुनाह मेरी इताअत से कहीं अधिक हैं।
3. ख़ुदा की बारगाह में पनाह शैतान के हमलों के समय एक भरोसेमंद जगह पनाह लेना ज़रूरी है, और वह ख़ुदा की ओर हमेशा ध्यान रखते हुए उसको याद करते रहना है, क़ुर्आन का इस बारे में कहना है कि जब कभी शैतान की ओर से किसी भी तरह का ख़्याल आए उसी समय ख़ुदा की बारगाह में पनाह हासिल करो।
4. हर समय तैय्यार रहना शैतान के विशाल हमलों के मुक़ाबले के लिए हर समय हमें पूरी तैय्यारी के साथ मैदान में खड़े होना चाहिए, शैतान से मुक़ाबले के कुछ तरीक़े पैग़म्बर स.अ. की इस हदीस में मौजूद हैं, आप फ़रमाते हैं कि क्या मैं तुम लोगों को एक ऐसा नुस्ख़ा बताऊं जिस से शैतान इतना दूर हो जाएगा जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच है? लोगों ने कहा हां या रसूलुल्लाह स.अ., आप ने फ़रमाया रोज़ा शैतान के चेहरे को काला कर देता है, और सदक़ा उसकी कमर तोड़ देता है, अल्लाह से क़रीब होना और नेक अमल उसकी पीठ को झुका देता है और इस्तेग़फ़ार उसकी सोंच को ख़त्म कर देता है।
5. शैतान की चालों को समझना शैतान की चालों से बचे रहने के लिए उसकी चालों को समझना होगा, इसलिए हमेशा उसकी चालों और मक्कारियों से होशियार रहने की ज़रूरत है, शैतान की चालों में से एक ख़तरनाक चाल दुनिया की दोस्ती और उसके पीछे भागना है। इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि दुनिया से दूरी बनाए रहो क्योंकि दुनिया शैतान का जाल और ईमान को बर्बाद कर देने की जगह है।
एक जाल जो सबके लिए बिछा हुआ है शैतान के सबसे अहम जाल में से एक नफ़्स की पैरवी करना है, क्योंकि जब तक इंसान के अपने वजूद में शैतानी अड्डा न हो शैतान कभी इंसान को गुमराह नहीं कर सकता, शैतान हमेशा नफ़्स की बात को सराहते हुए उसकी पुष्टि करता है, क़ुर्आन इस बारे में फ़रमाता है (शैतान) तू अपनी पैरवी करने वालों के अलावा कभी मेरे बंदों पर हावी नहीं हो सकता। क्योंकि जो अल्लाह का बंदा होता है वह कभी नफ़्स को अल्लाह के हुक्म पर हावी नहीं होने देता।
मर्दों के लिए शैतान का जाल मर्दों के लिए शैतान की ओर से जो सबसे ख़तरनाक जाल बिछाया हुआ है वह औरत और ग़ुस्सा है, इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि शैतान के पास मर्दों को गुमराह करने के लिए औरतों और ग़ुस्से से अच्छा कोई रास्ता नहीं है, इस बात का मतलब औरत की शख़्सियत को नीचा दिखाना नहीं बल्कि इमाम अली अ.स. की हदीस का मतलब यह है कि औरतों से घुलना मिलना और उनसे ग़ैरे शरई तरीक़े से संबंध बनाना इन कामों की ओर शैतान बहकाता रहता है, इसी तरह ग़ुस्से के द्वारा शैतान इंसान के ऊपर हावी हो जाता है और इंसान अपनी अक़्ल खो बैठता है।
कैसे अपने को शैतानी ख़तरों से बचाएं 
नमाज़ और सब्र जिनके बारे में क़ुर्आन का कहना है कि ऐ वह लोग जो ईमान लाए, नमाज़ और सब्र से मदद हासिल करो। 
तौबा सूरए फ़ुरक़ान में अल्लाह दोहरे अज़ाब के बाद अमान में रहने वालों के बारे में फ़रमाता है कि (केवल वह ही बच पाएंगे) जो तौबा करे और ईमान लाए और नेक अमल अंजाम दे, फिर अल्लाह उसकी बुराईयों को भी नेकी में बदल देगा, अल्लाह माफ़ करने वाला और मेहेरबान है।
नेक अमल इस बारे में भी क़ुर्आन और हदीस दोनों में मिलता है कि नेकियां सभी बुराईयों को मिटा देती हैं।
अल्लाह की याद शैतान को अपने से दूर भगाने के लिए बहुत अहम है, जैसाकि इस बारे में ख़ुद क़ुर्आन में कई आयतें मौजूद हैं।
तवस्सुल शैतान को अपने से दूर भगाने में ज़ाहिर है वही इंसान की मदद कर सकता है जिसको अल्लाह ने इंसान की हिदायत और शैतान से जंग के लिए भेजा हो, ऐसे लोग जिन के पास दूर दूर तर शैतान दिखाई नहीं देता।
फ़िक्र करना शैतान के जाल में फंसने वाले वही लोग होते हैं तो अल्लाह की दी हुई नेमत अक़्ल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। आख़िर में हम सब की दुआ है कि अल्लाह हमें नफ़्स की इच्छाओं और शैतानी हमलों से बचाए रखे, और हमें अहलेबैत अ.स. से तवस्सुल की तौफ़ीक़ दे और हमेशा उनकी मोहब्बत हमारे दिल में बाक़ी रखे, और हर समय अपनी रहमत हमारे ऊपर बनाए रखे, हमारी आख़ेरत को नेक कर दे, हमें नेक लोगों और अहलेबैत अ.स. के चाहने वालों में शामिल रखे।
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