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Date of publication : 17/12/2017 19:1
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क़ुर्आन और इमाम अली अ.स.

क़ुर्आन के बारे में पैग़म्बर स.अ. ने अल्लाह से शिकायत करते हुए फ़रमाया ऐ मेरे अल्लाह, मेरी इस क़ौम ने क़ुर्आन को अकेला छोड़ दिया है। (सूरए फ़ुरक़ान, आयत 30) और इमाम अली अ.स. के बारे में तारीख़ में मौजूद है कि लोगों ने आपको अकेला छोड़ दिया जिसके कारण आप 25 साल तक ख़ामोश रहे।

विलायत पोर्टल :
  पैग़म्बर स.अ. ने इमाम अली अ.स. के बारे में फ़रमाया अली (अ.स.) क़ुर्आन और क़ुर्आन अली (अ.स.) के साथ है, और यह दोनों हौज़े कौसर पर मुझ से मिलने तक एक दूसरे से जुदा नहीं होंगे। (सफ़ीनतुल बिहार, जिल्द 2, पेज 414)
1. दोनों हिदायत के स्रोत हैं, क़ुर्आन के बारे में अल्लाह ने फ़रमाया इस (क़ुर्आन) में किसी तरह का कोई संदेह नहीं है और यह मुत्तक़ीन के लिए हिदायत है। (सूरए बक़रह, आयत 2) इमाम अली अ.स. ने सूरए राद आयत नं. 7 की तफ़सीर में फ़रमाया कि पैग़म्बर स.अ. (अल्लाह के अज़ाब से) डराने वाले और मैं हिदायत करने वाला हूं (कन्ज़ुल उम्माल, जिल्द 3, पेज 444) या एक और जगह फ़रमाया मैं हिदायत का परचम और मुत्तक़ीन को पनाह देने वाला हूं। (मिन्हाजुस-सआदत, जिल्द 3, पेज 79)
2. दोनों को अल्लाह ने मासूम बनाया जैसा कि अल्लाह ने क़ुर्आन के बारे में फ़रमाया कि बातिल उसके क़रीब नहीं आ सकता, न ही सामने से और ना ही पीछे से (सूरए फ़ुस्सेलत, आयत 43) और इमाम अली अ.स. के मासूम होने को आयते ततहीर साबित कर रही है।
 3. दोनों महान हैं। (सूरए हिज्र, आयत 67, नूरुस-सक़लैन, जिल्द 5, पेज 491)
4. दोनों खुली किताब हैं, क़ुर्आन के लिए यह विशेषता बहुत सारी आयतों में इस्तेमाल हुई है जैसे सूरए दुख़ान, आयत 2 और इमाम अली अ.स. के लिए इमाम सादिक़ अ.स. ने सूरए यासीन की एक आयत की तफ़सीर बयान करते हुए फ़रमाया इस किताब का पूरा इल्म इमाम अली अ.स. के पास है। (बिहारुल अनवार, जिल्द 35, पेज 429)
5. दोनों का इल्म बे मिसाल है, जैसाकि इमाम अली अ.स. ने क़ुर्आन के बारे में फ़रमाया कि वह इल्म का ऐसा दरिया है जिसकी गहराई को कोई नाप नहीं सकता। (बिहारुल अनवार, जिल्द 92, पेज 19) और ख़ुद अपने इल्म की ओर इशारा करते हुए अपने सीने पर हाथ रख कर फ़रमाया यह इल्म का ऐसा दरिया है जिसका कोई किनारा नहीं है। (नहजुल बलाग़ा, कलेमाते क़ेसार 147)
6. दोनों अल्लाह की ओर ले जाने वाली मज़बूत रस्सियां हैं, जैसाकि इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं मैं अल्लाह की मज़बूत रस्सी हूं। (बिहारुल अनवार, जिल्द 92, पेज 19)
7. दोनों जहन्नम के अज़ाब से बचाने का बेहतरीन ज़रिया हैं, जैसा कि क़ुर्आन के बारे हदीस में मिलता है कि अल्लाह उस दिल पर अज़ाब नाज़िल नहीं करेगा जिसमें क़ुर्आन महफ़ूज़ हो (बिहारुल अनवार, जिल्द 92, पेज 19) इसी तरह पैग़म्बर स.अ. ने इमाम अली अ.स. के बारे फ़रमाया अगर दुनिया के सभी लोग इमाम अली अ.स. से सच्ची मोहब्बत करते तो अल्लाह कभी जहन्नम को पैदा न करता। (बिहारुल अनवार, जिल्द 39, पेज 248)
8. दोनों के पास हर सवाल का जवाब मौजूद है, जिस तरह क़ुर्आन में शिक्षा, नैतिकता, राजनीतिक, समाजिक और अक़ीदों से जुड़े हर सवाल का जवाब है उसी तरह इमाम अली अ.स. के पास हर सवाल का जवाब मौजूद है।
9. दोनों से मुसलमानों ने रिश्ता तोड़ा, जैसा कि क़ुर्आन के बारे में पैग़म्बर स.अ. ने अल्लाह से शिकायत करते हुए फ़रमाया ऐ मेरे अल्लाह, मेरी इस क़ौम ने क़ुर्आन को अकेला छोड़ दिया है। (सूरए फ़ुरक़ान, आयत 30)
और इमाम अली अ.स. के बारे में तारीख़ में मौजूद है कि लोगों ने आपको अकेला छोड़ दिया जिसके कारण आप 25 साल तक ख़ामोश रहे।
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