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Code : 191501
Date of publication : 13/1/2018 5:40
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ज़ायोनी मूवमेंट मानवता की दुश्मन ।

दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने से पहले तक 220 हज़ार यहूदी लोग फिलिस्तीन पहुँच चुके थे तथा दूसरे विश्व युद्ध के समय यहूदियों ने होलोकॉस्ट के बहाने से फिलिस्तीन की ओर भागने का सिलसिला और तेज़ कर दिया , उस समय फिलिस्तीन पर अधिकार जमाये ब्रिटेन ने भी इन लोगों के लिए इस देश के द्वार खोल दिए तथा उन्हें फिलिस्तीनी लोगों की ज़मीन खरीदने में सहायता की ।


विलायत पोर्टल :  बासेल सम्मलेन थिओडोर हेर्त्ज़ेल ने अलग यहूदी राष्ट्र की स्थापना के लिए दुनिया भर विशेष रूप से यूरोप के यहूदियों को संदेश भेजकर उन्हें एक विश्व सम्मलेन में भाग लेने का निमंत्रण दिया यहूदी समाज ने उसके निमंत्रण को स्वीकारते हुए 29 -30 अगस्त 1897 को स्विट्ज़रलैंड के बासेल शहर में एक सम्मलेन का आयोजन किया । थिओडोर हेर्त्ज़ेल ने इस सम्मलेन के उद्देश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सम्मलेन का उद्देश्य यहूदियों के लिए उनके अपने यहूदी राष्ट्र की स्थापना की बुनियाद रखना है, इस सम्मेलन में थिओडोर हेर्त्ज़ेल को विश्व ज़ायोनी मूवमेंट का प्रमुख बनाया गया ।
इस सम्मलेन के प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं,
फिलिस्तीन में यहूदी राष्ट्र के लिए एक स्थान का चयन करना और इस काम के लिये यूरोपीय सरकारों को सहायता तथा समर्थन पाने के लिए प्रयास करना है ।
यहूदी फंड की स्थापना करना ताकि फिलिस्तीनी ज़मीन खरीदने केलिए यहूदियों की मदद की जा सके ।
पूरब तथा उस्मानिया खिलाफत की तरफ झुकाव पैदा करना तथा उस्मानिया खिलाफत के उपनिवेश के रूप में फिलिस्तीन में यहूदियों के रहने का अधिकार प्राप्त करना ।
फिलिस्तीन की ओर यहूदियों का प्रस्थान .
थोड़े समय पश्चात् ही थिओडोर हेर्त्ज़ेल मर गया और उसके बाद वाइज़मैन ने वर्ल्ड जिओनिस्ट आर्गेनाइजेशन की कमान संभाली । वाइज़मैन ने यहूदियों के स्वंय की सहायता से फिलिस्तीन की ओर प्रस्थान करने पर ध्यान केंद्रित किया इस प्रकार फिलिस्तीन की ओर यहूदियों के आने में तेज़ी आई ।
दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने से पहले तक 220 हज़ार यहूदी लोग फिलिस्तीन पहुँच चुके थे तथा दूसरे विश्व युद्ध के समय यहूदियों ने होलोकॉस्ट के बहाने से फिलिस्तीन की ओर भागने का सिलसिला और तेज़ कर दिया , उस समय फिलिस्तीन पर अधिकार जमाये ब्रिटेन ने भी इन लोगों के लिए इस देश के द्वार खोल दिए तथा उन्हें फिलिस्तीनी लोगों की ज़मीन खरीदने में सहायता की ।
ब्रिटेन की सहायता से उत्साहित यहूदियों ने यहाँ अपने सैन्य, आर्थिक, शैक्षिणिक तथा सामाजिक संगठनों को खड़ा करने का काम भी शुरू कर दिया । 1948 में यहूदियों ने हॉगन और एस्तेर जैसे संगठनों के रूप में अपनी सेना का गठन किया जिन्हे इस्राईल की मुक्ति का सिपाही कहा जाता था उस समय इन संगठनों में शामिल लड़ाकों की संख्या 70 हज़ार थी ।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा फिलिस्तीन विभाजन
फिलिस्तीन में यहूदियों के आगमन और इस क्षेत्र पर उनके अवैध क़ब्ज़े के कारण यहाँ के स्थायी अरब निवासी अन्य क्षेत्रों की ओर जाने पर बाध्य हो गए ।  29 नवम्बर 1947 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा ने अनुबंध संख्या 181 पारित करते हुए फिलिस्तीन का 54 % भाग यहूदियों और 45 % भाग वहां के मूल नागरिको और 1 % अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप देने पर सहमति प्रकट की ।
यह बंटवारा 1948 के युद्ध का करण बना इस युद्ध के कारण हज़ारों फिलिस्तीनियों को शहरों और गांवों से भगा दिया गया हज़ारों फिलिस्तीनियों को नस्लीय सफाये का निशाना बनाते हुए क़त्ल कर दिया गया, बल्कि युद्ध शुरू होने से पहले ही उत्तरी फिलिस्तीन के 200 शहरों और गांवों से फिलिस्तीनी नागरिकों को निकाल दिया गया ।
1948 का युद्ध समाप्त होने के बाद फिलिस्तीनियों को देश के केंद्र और दक्षिणी भागों से निकलने का काम भी शुरू कर दिया गया ।
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