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Date of publication : 13/1/2018 19:27
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नहजुल बलाग़ा की अहमियत ईसाई विद्वानों की निगाह में

अबू तालिब अ.स. के बेटे इमाम अली अ.स. पूरे अरब में पहले वह इंसान थे जिन्होंने पूरी दुनिया से संबंध बनाए रखने की कोशिश की और जहां तक मुमकिन हो सका लोगों के पास जा कर उनके बराबर में बैठ कर उनकी समस्या जानने की कोशिश की, यही कारण है जो भी उनसे मिला उनका मुरीद हो गया, और उनसे मोहब्बत करना इंसानी फ़ितरत में शामिल है और उनसे दुश्मनी जेहालत की सबसे बड़ी दलील है, इमाम अली अ.स. अभी अपनी बात पूरी दुनिया के सामने कह भी नहीं पाए थे कि उनको शहीद कर दिया गया, इमाम अली अ.स. की शहादत नबियों की शहादत थी, वही नबी जो ऐसे शहरों और ऐसे लोगों के बीच ज़िंदगी गुज़ार रहे थे जो उनके लायक़ नहीं थे।


विलायत पोर्टल :  नहजुल बलाग़ा की अहमियत और उसमें बयान किए गए दीनी मालूमात और सियासी उसूलों को मुसलमानों के हर फ़िर्क़े ने अपने सिर को झुका कर न केवल सम्मान से क़ुबूल किया है बल्कि उसको हर दौर की ज़रूरत भी बताया है, और नहजुल बलाग़ा की अहमियत और उसमें बताए गए दीनी मालूमात और सियासी उसूलों की ज़रूरत उस समय और बढ़ जाती है जब किसी ग़ैर मुस्लिम की ज़बान से बयान होता है, हम इस लेख में नहजुल बलाग़ा की अहमियत और ज़रूरत को कुछ ईसाई विद्वानों की ज़बानी बयान कर रहे हैं।
फ़्रांस के महान प्रोफ़ेसर हेनरी कार्बन ने नहजुल बलाग़ा को अहम स्रोत बताते हुए कहा कि शिया उलमा, विद्वान और विचारक हमेशा से नहजुल बलाग़ा से लाभांवित होते रहे हैं। हेनरी अपने बयान में कहते हैं कि क़ुर्आन और पैग़म्बर स.अ. की हदीसों के बाद शियों में सबसे अधिक मान्यता नहजुल बलाग़ा की है, जिस से शियों की फ़लसफ़ी सोंच गहरा संबंध रखती है।
ईसाई मज़हब के विशेषज्ञ अमीन नेख़ला का बयान है कि एक बार उनसे किसी ने नहजुल बलाग़ा से सौ श्रेष्ठ जुमलों को चुन कर बताने को कहा, अमीन ने उसके जवाब में कहा ख़ुदा की क़सम मैं नहीं चुन सकता, और मैं ही क्या किसी के लिए भी मुमकिन नहीं है कि हज़ारों बेहतरीन जुमलों और हदीसों में से सौ हदीसों और जुमलों को चुनना, मेरे लिए नहजुल बलाग़ा से हदीस का चुनना ऐसे ही है जैसे किसी को अनगिनत नायाब हीरे जवाहेरात में से किसी एक को चुनने को कह दिया जाए।
लेबनान के मशहूर लेखक और शायर बाउल्स सलामा नहजुल बलाग़ा के बारे में कहते हैं कि नहजुल बलाग़ा एक ऐसी हमेशा बाक़ी रहने वाली किताब है जो इंसान को इमाम अली अ.स. के विचारों के बारे में सोंचने पर मजबूर कर देती है, और क़ुर्आन के बाद इस किताब से बढ़ कर कोई दूसरी किताब नहीं है। मशहूर लेखक जॉर्ज जुरदाक़ नहजुल बलाग़ा को साफ़ शब्दों, सरल ज़बान और सबकी समझ में आने वाला कलाम बताते हुए कहते हैं कि जब तक इंसान और इंसानी विचार इस धरती पर मौजूद हैं तब तक इंसान का रिश्ता नहजुल बलाग़ा से इसी तरह जुड़ा रहेगा।
अरब के मशहूर ईसाई लेखक मीख़ाईल नईमा का कहना है कि कोई भी इतिहासकार और लेखक हो और उसमें चाहे कितनी ही प्रतिभा और साहस क्यों न पाया जाता हो और हज़ारों पेज ही लिख कर क्यों न हो लेकिन वह इमाम अली अ.स. की महानता और आपके सिफ़ात को नहीं बयान कर सकता और न ही इमाम अली अ.स. की तरह किसी भी दौर के हालात को लिख सकता है।
ईसाई लेखक जुबरान ख़लील लिखते हैं कि मेरे अक़ीदे के अनुसार अबू तालिब अ.स. के बेटे इमाम अली अ.स. पूरे अरब में पहले वह इंसान थे जिन्होंने पूरी दुनिया से संबंध बनाए रखने की कोशिश की और जहां तक मुमकिन हो सका लोगों के पास जा कर उनके बराबर में बैठ कर उनकी समस्या जानने की कोशिश की, यही कारण है जो भी उनसे मिला उनका मुरीद हो गया, और उनसे मोहब्बत करना इंसानी फ़ितरत में शामिल है और उनसे दुश्मनी जेहालत की सबसे बड़ी दलील है, इमाम अली अ.स. अभी अपनी बात पूरी दुनिया के सामने कह भी नहीं पाए थे कि उनको शहीद कर दिया गया, इमाम अली अ.स. की शहादत नबियों की शहादत थी, वही नबी जो ऐसे शहरों और ऐसे लोगों के बीच ज़िंदगी गुज़ार रहे थे जो उनके लायक़ नहीं थे।
रूस के मशहूर इतिहासकार इलियापा विलेज अपनी किताब इस्लाम दर ईरान में इमाम अली अ.स. की शख़्सियत को इस तरह बयान करते हैं कि इमाम अली अ.स. पैग़म्बर स.अ. की देखरेख में पले बढ़े और पूरे ध्यान पूरी लगन से आप पैग़म्बर स.अ. और इस्लाम के हर हुक्म को मानते थे, आपने पूरी ज़िंदगी सच्चाई के रास्ते में गुज़ारी और आप अख़लाक़ी उसूलों के सख़्त पाबंद थे, आपकी ज़ात में ख़ुदा के वली होने के सभी सिफ़ात पाए जाते थे।
ईसाई आलिमों, लेखकों और इतिहासकारों की इमाम अली अ.स. के बारे में कही गई बातों और विचारों पर ध्यान देने से यही बात सामने आती है कि इन आलिमों, लेखकों और इतिहासकारों के दिलों की सच्चाई और मन के साफ़ सुथरा होने को दर्शाती है। इसी तरह एक और ईसाई आलिम का कहना है कि अगर आज के दौर में इमाम अली अ.स. कूफ़ा की मस्जिद में ख़ुतबा देते तो यह मस्जिद इतनी बड़ी होने के बावजूद यूरोप की प्रमुख और महान हस्तियों से भरी होती।
इंग्लैंड के मशहूर फ़्लास्फ़र और अल-इबताल नामी किताब के लेखक थामस कार्लाइल ने इमाम अली अ.स. के बारे मे हमदर्दी ज़ाहिर करते हुए कहा कि हमारे पास इमाम अली अ.स. से मोहब्बत के अलावा कोई और रास्ता है ही नहीं, क्योंकि आप नैतिकता, इस्लाम के क़ानून पर अमल करने, मानवता और अदालत को बाक़ी रखने में बहुत गंभीर थे, आपके वजूद में केवल नेकियों ही पाई जाती थीं, आप पूरे अरब में सबसे बहादुर थे और आपको धोखे से कूफ़ा में शहीद कर दिया गया, आप को आपकी अदालत की गंभीरता के कारण शहीद कर दिया गया, यहां तक कि आपने अपने हत्यारे के बारे में फ़रमाया कि अगर मैं बच गया तो इससे मैं ख़ुद बदला लूंगा लेकिन अगर शहीद हो गया तो इस पर केवल एक ही वार करना क्योंकि इसने केवल एक ही वार किया था और अगर हो सके तो माफ़ कर देना क्योंकि माफ़ करना तक़वा की पहचान है।
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