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Code : 191548
Date of publication : 15/1/2018 5:5
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हमारे आमाल पर हमारी ख़ुराक का असर

हलाल और जाएज़ निवाले से रूह की पाकीज़गी बाक़ी रहती है और इसी तरह हराम निवाला हमारी रूह को नजिस और नापाक कर देता है जिसका सीधा असर हमारे आमाल पर दिखाई देता है।

विलायत पोर्टल :  नेक आमाल और अच्छे बर्ताव का हमारे खानपान से क्या संबंध है ? यह सवाल कई बार हम सबके दिमाग़ में आता है कि कैसे हमारा खानपान हमारे अख़लाक़ और हमारी ज़िंदगी पर प्रभाव डालता है? अगर हम रूह और जिस्म के रिश्ते पर थोड़ा भी ध्यान देंगे तो इस सवाल का जवाब हमारे लिए बहुत आसान हो जाएगा क्योंकि अधिकतर आप ने देखा होगा कि इंसान जब अंदर से टूटता है जब उसकी रूह पर चोट लगती है तो उसका असर उसके जिस्म पर ज़ाहिर होने लगता है जैसे बालों का सफेद होना, आंखों की रौशनी का कम होना और हाथों पैरों की ताक़त का जवाब देना, इसी तरह दूसरी तरफ़ से अगर देखें तब भी दोनों का संबंध पूरी तरह समझ में आ जाएगा क्योंकि दूसरी तरफ़ से जब हमारे जिस्म को तकलीफ़ पहुंचती है तो रूह प्रभावित होती है और अगर जिस्म को आराम पहुंचता है तो रूह सुकून महसूस करती है।
हमेशा से हमारे उलमा ने इस ओर ध्यान दिया है और हमारे लिए अलग अलग तरीक़ों से बयान किया है कि हमारे खाने पीने से हमारी रूह और हमारा अख़लाक़ प्रभावित होती है, यहां तक कि समाज में कुछ लोग इस मामले को गंभीरता से लेते थे और इस पर अमल करते थे, उनका मानना था कि स्वस्थ अक़्ल स्वस्थ जिस्म में ही रहती है, क़ुर्आन की आयतों और बहुत सी हदीसों से यह बात साबित है कि हलाल और हराम खाने का असर हमारे आमाल पर पड़ता है।
क़ुर्आन में सूरए माएदा की आयत नं. 41 में यहूदियों के उस गिरोह को जो जासूसी करता और आसमानी किताबों में बयान की गई सच्चाईयों को छिपाता था उसके बारे में फ़रमाया यह ऐसे लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह पाक न करने का इरादा कर चुका है, फिर उसके बाद वाली आयत में पैग़म्बर स.अ. से फ़रमाया कि वह (यहूदी) आपकी बातों को बहुत ध्यान से सुनते हैं ताकि उसको झुठला सकें इन लोगों ने हराम खाने बहुत खाएं हैं।
अल्लाह ने इन दो आयतों से इस बात को साफ़ कर दिया कि अल्लाह की निशानियों के झुठलाने और हमेशा हराम निवाला खाने से दिल और रूह गंदी होती है, आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी फ़रमाते हैं कि दोनों आयतों का आपस में संबंध यही बताने के लिए है कि हराम निवाला हमारी रूह को नजिस कर देता है।
अब यह बात पूरी तरह साबित हो चुकी है कि हराम निवाला दिल के स्याह होने और अख़लाक़ (नैतिकता) और नेक अमल से दूर होने और गुनाह से क़रीब होने का कारण बनता है। इसी सूरे की आयत नं. 91 में अल्लाह ने फ़रमाया कि शैतान तुम्हारे बीच आपस में शराब और जुआ द्वारा दुश्मनी पैदा कराना चाहता है, और इस बात में काई शक नहीं कि दुश्मनी और एक दूसरे से जलन यह दोनों दिल की बीमारी और अख़लाक़ी बुराई हैं जिनका अल्लाह ने इस आयत में शराब पीने से संबंध बताया है, जिसका सीधा मतलब यही होता है कि शराब और हराम कमाई द्वारा पेट भरने से दिल और रूह की बीमारी होती हैं। सूरए मोमेनून की आयत नं. 51 से यह बात सामने आती है कि नेक अमल की तौफ़ीक़ हलाल और जाएज़ निवाले से पैदा होती है, क्योंकि हलाल निवाला और नेक अमल दोनों का ज़िक्र इस आयत में एक साथ आया है जिस से मालूम होता है कि इन दोनों में आपसी संबंध पाया जाता है।
आयतों की रौशनी में ऊपर बयान की गई बातों से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि हलाल और जाएज़ निवाले से रूह की पाकीज़गी बाक़ी रहती है और इसी तरह हराम निवाला हमारी रूह को नजिस और नापाक कर देता है जिसका सीधा असर हमारे आमाल पर दिखाई देता है।
ध्यान रहे अमल के नेक और बुरे या अख़लाक़ का बेहतर और बदतर होने का केवल हलाल और हराम निवाले से संबंध नहीं है बल्कि यह उन कारणों में से एक है जो हमारी रूह को नजिस और नापाक कर देता या रूह को उसकी हालत पर बाक़ी रखता है।
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