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Code : 191717
Date of publication : 24/1/2018 19:32
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आतंकी संगठन आईएसआईएस पैदाइश से विनाश तक (3)

इस पार्ट में दाइश के कमांडरों और उसके लीडरों के बारे में कुछ जानकारी आपके सामने पेश की जा रही है।


विलायत पोर्टल :  पिछले दो पार्ट में आप लोगों ने पढ़ा कि किस तरह से दाइश की बुनियाद रखी गई और किस तरह से उतार चढ़ाव के साथ साथ उनकी ताक़त दिन प्रतिदिन बढ़ती गई और अंत में किस तरह दाइश के सरगना और कुख्यात आतंकवादी अबू बकर बग़दादी ने बग़ावत कर के दाइश को बाक़ी के सारे संगठन से अलग कर लिया। अब इस पार्ट में दाइश के कमांडरों और उसके लीडरों के बारे में कुछ जानकारी आपके सामने पेश की जा रही है।
दाइश का सबसे अहम और मास्टर माइंड का नाम इब्राहीम अल-बद्री अल-सामराई अबू दुआ अबू अवाद है जो अबू बकर बग़दादी के नाम से मशहूर है, जो कभी सीरिया तो कभी इराक़-सीरिया के बार्डर पर गांव में तो कभी किसी शहर में छिप छिप कर रहता है।
इसके बाद फ़ाज़िल अहमद अब्दुल्लाह अल-हयाली था जिसका काम इराक़ी हुकूमत का तख़्ता पलट करने का प्लान बनाना और यह अबू मुस्लिम अल-तुर्कमानी के नाम से मशहूर था और नैनवा में रहता था और दाइश का यही वह कमांडर था जो मूसेल की जंग का षडयंत्र रचने और उसका नक़्शा तैय्यार करने वाला था।
इसके बाद अदनान नज्म अल-बैलावी जो अबू अब्दुल रहमान या अबू उसामा के नाम से मशहूर था, यह सद्दाम की सेना के कमांडरों में से था जो मूसेल ही के अल-मज़रआ नामी इलाक़े में मारा गया था।
इसके बाद चौथा सरगना अदनान लतीफ़ अल-सूदावी जो अबू महंद के नाम से मशहूर था, जो दाइश के सैन्य परिषद का सदस्य था और यह सद्दाम की सेना में कर्नल था।
पांचवा सरगना इराक़ के दक्षिणी इलाक़े के किसी राज्य का राज्यपाल था जिसका नाम अहमद मोहसिन ख़लफ़ अल-जहैशी था और अबू फ़ातिमा के नाम से मशहूर था।
छठा सरगना मुस्तफ़ा मोहम्मद अल-करमूश था और अबू सलाह के नाम से मशहूर था और दाइश का माली सिस्टम इसी की देख रेख में था। इसके अलावा और भी दाइश के मुख्य कमांडर और सरगना हैं जिनकी तादाद करीब 16 है, जिसमें बम बनाने उसको ब्लास्ट के लिए लगाने और डिफ़्यूज़ करने से लेकर आत्मघाती हमले करने और बच्चों में बम प्लांट करने और जंगी नक़्शे तैय्यार करने वाले ख़ूंख़ार आतंकी शामिल हैं। (http://www.fardanews.com/fa/mobile/349111)
सबसे बड़ा सवाल जो हम सब के दिमाग़ में बार बार आता है वह यह कि आख़िर दाइश की फ़ंडिंग कहां से होती है और वह कौन लोग या कौन देश हैं जो दाइश को इस अपराध और हत्याएं करने के लिए सपोर्ट करते हैं? तो इसका जवाब जो कई बड़ी वेबसाइट और ख़ुलासे के बाद सामने आया है वह आपके सामने पेश किया जा रहा है।
सीरिया, जार्डन और सऊदी वह देश हैं जहां से सबसे अधिक दाइश की आर्थिक मदद हुई है, अमेरिका के वित्त मंत्रालय का इस बारे में कहना है कि जो दस्तावेज़ हमारे हाथ लगे हैं उनके अनुसार 2014 के शुरू में ही ईरान ने दाइश को अल-अंबार से ख़त्म करने के लिए अमेरिकी सरकार से इराक़ी सरकार का समर्थन करने के लिए कहा था।
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार दाइश का कुछ बजट अवैध व्यापार, लगान वसूली और कुछ दूसरे ग़ैर क़ानूनी धंधे से जुटाया जाता था, आख़िर के कुछ सालों में इस आतंकी संगठन ने ख़ुद को आर्थिक हवाले से मज़बूत किया है और लोगों का सहयोग हासिल करने पर विशेष ध्यान दिया है, जो आंकड़े हाथ लगे हैं उनके अनुसार दाइश की प्रतिमाह 8 मिलियन डॉलर से अधिक आमदनी थी जो मूसेल से उन्हें भगाने से पहले से लगान, अवैध टैक्स वसूली और छोटे बड़े व्यापार से हासिल की जा रही थी।
इसी प्रकार अल-राबितुल यमनी और ख़ुद अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व से 131 अकादमिक, राजनीतिक, समाजिक और धार्मिक लोग हैं जिन्होने दाइश की आर्थिक मदद करने का ज़िम्मा ले रखा है।
हालांकि दाइश भी अबू बकर बग़दादी के नेतृत्व अल-क़ायदा ही की विचारधारा (वहाबियत, तकफ़ीरियत) पर चल रही थी लेकिन सैन्य रणनीति को देखते हुए दोनों में फ़र्क़ था, दाइश ख़ुद को अल-क़ायदा से अधिक ताक़तवर और होशियार समझ रही थी यही कारण है कि उसने ख़ुद को बहुत जल्द ही अल-क़ायदा से अलग कर लिया। आतंकी संगठन दाइश, अल-क़ायदा की तरह नहीं था जो केवल धमाके और हत्याएं कर के चुपचाप बैठ जाए बल्कि इसका मक़सद इलाक़ों को ख़ाली करवा कर उस पर अपना क़ब्ज़ा करना था।
बग़दादी जब किसी शहर पर हमला करना चाहता तो पहले अपने फ़ौजियों को उसी शहर के लोगों की वेशभूषा में भेजता और लोगों से अपनी बैअत लेने को कहता, उसके भेजे हुए लोग उस शहर के बड़े बुज़ुर्गों से बात करते और बग़दादी की बैअत के लिए कहते अगर उन लोगों ने मान लिया तो उसके आदमी कुछ दिनों तक छिप कर उन पर नज़र रखते और उनमें से जो सबसे उचित दिखाई देता उसको अपनी ओर से उस शहर का हाकिम बना देते। अगर उनमें से कोई बग़दादी के प्रस्ताव का विरोध करता तो उस पर दबाव बनाते और किसी भी तरह से उसको राज़ी करते लेकिन अगर वह नहीं मानता तो उसको सीधे मौत के घाट उतार देते। दाइश उन शहर पर अधिक निगाहें जमाए हुए था जहां ऊर्जा के स्रोत और तेल के कुएं मौजूद थे, क्योंकि ऐसे शहरों पर क़ब्ज़ा कर के न केवल वह अपनी ताक़त को बढ़ा दे रहे थे बल्कि इराक़ और सीरिया की सरकार को कमज़ोर कर रहे थे।
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