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Date of publication : 28/1/2018 6:28
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यमन की मिसाइल क्षमता से भयभीत आले सऊद की ईरान के विरुद्ध बयानबाज़ी के षड्यंत्र से उठा पर्दा

सऊदी अरब का अंसारुल्लाह के मिसाइल को ईरान निर्मित बताने पर अड़े रहना ट्रम्प सरकार द्वारा ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव से मुकाबले और इस बहाने से ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बढ़ाने की बड़ी साज़िश का हिस्सा है।

विलायत पोर्टल : यमन युद्ध की दलदल में धंसे आले सऊद जब जब यमन बलों के मिसाइल हमलों का निशाना बनते हैं या जब जब उन्हें यमन में मुंह की खानी पड़ती है और अपने हितों को साधने में नाकाम रहते हैं तो वह ईरान पर यमन बलों को सहायता पहुंचने का आरोप लगाते हुए अनर्गल बयानबाज़ी पर उतर आते हैं सऊदी अरब के अय्याश युवराज मोहम्मद बिन सलमान को विदेश नीति मे लगातार हार का सामना करना पड़ा है, कतर को अलग थलग करने से लेकर सीरिया मे बश्शार असद को हटाने में विफलता, लेबनान के आंतरिक दलों के बीच मतभेद डालना हो या यमन युद्ध हर स्थान पर मिली इन हारों में यमन युद्ध सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसने इस्लामी दुनिया में सऊदी अरब की शक्ति और प्रभाव को खतरे में डाल दिया है।
नवीनतम आधुनिक हथियारों के बावजूद सऊदी अरब को यमन में सफलता नहीं मिल पाई है और साथ ही यमन द्वारा अलयमामा पैलेस जैसे स्थानों को निशाना बनाने के बाद सऊदी अरब को यमन में अपनी युद्ध रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
अभी कुछ ही समय पहले यह खबर आई थी कि सऊदी अरब लैटिन अमरीका से 10 हज़ार सैनिकों को यमन युद्ध में भेजना चाहता है ताकि इस प्रकार सऊदी बलों को यमन से निकाल सके। इन सबके बीच ईरान पर अंसारुल्लाह को मिसाइल दिए जाने का आरोप लगाया जाना यमन युध्द में सऊदी की हार को दर्शाता है।
इस मुद्दे पर अमेरिका सऊदी अरब की सहायता करते हुए सभी हदें लांघ चुका है , संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि निक्की हेली ने एक प्रेस कॉन्फेंस में अंसारुल्लाह द्वारा रियाज़ पर दागे गए मिसाइल को ईरानी बताते हुए उसके अवशेष भी सामने रखे थे। सऊदी विदेश मंत्री आदिल अलजुबैर दावोस मे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बार फिर ईरान पर आतंकवाद, समुदायवाद और दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
अमेरिका और सऊदी अरब के इस आरोप पर सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी ने अलआलम से बातचीत में कहा, कि कुछ देशों ने यमन की तीन चरणों में घेराबंदी कर रखी है, और उन तक खाना और आवश्यक वस्तुएं भी नहीं पहुँच पा रही हैं, तो ऐसे अवस्था में कोई बेवक़ूफ़ ही इस बात को स्वीकार करेगा कोई उन तक मिसाइल पहुँचा रहा है! लेबनान के समाचार पत्र अलअखबार ने सऊदी अरब द्वारा ईरान पर इस प्रकार आरोप लगाने के उद्देश्य से पर्दा उठाते हुए लिखा कि, यमन मे ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई है जिसमे अपनी हार छुपाने के लिए सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अलजुबैर ने तुरंत ईरान के मिसाइलों की कहानी सामने ना रखी हो और विश्व समुदाय से इसको रोके जाने की मांग ने की हो, यमन में जो भी सऊदी अरब और अमीरात की मर्ज़ी के विरुद्ध होता है उस पर ईरान की मिसाइलों का मुद्दा उठा दिया जाता है, सऊदी अरब ने इस झूठ को कुछ ज़्यादा ही प्रचारित किया है।
सच्चाई यह है कि सऊदी अरब और अतिक्रमणकारी गठबंधन ने यमन की ज़मीन, वायु और समुद्र से घेराबंदी कर रखी है, यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय सहायता संस्थान भी यमन तक दवा या खाद्य सामग्री नहीं पहुँचा सकते हैं, ऐसी अवस्था में ईरान द्वारा यमन मिसाइल पहुँचाने का आरोप लगाना एक प्रोपगंडा मात्र है। इस मुद्दे में दूसरी ध्यान देने वाली चीज़ यह है कि ईरान ने जहां पर भी सैन्य सहायता या फिर सैन्य सहालकार भेजे हैं उनके बारे में स्पष्ट रूप से ऐलान किया है, इसलिए सऊदी अरब का यह आरोप यमन में अपने अपराधों को छिपाने का बहाना मात्र है। सच्चाई यह है कि सऊदी अरब द्वारा अंसारुल्लाह के मिसाइल को ईरान निर्मित बताने पर अड़े रहना ट्रम्प सरकार द्वारा ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव से मुकाबले और इस बहाने से ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बढ़ाने की बड़ी साज़िश का हिस्सा है।
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