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Date of publication : 28/1/2018 19:17
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जीवन के कठिन समय क्या करें?

कठिनाइयों और भयानक घटनाओं के समय धैर्य और संयम बरतते हुए और रणनीति बनाते हुए अल्लाह से मदद माँगते हुए रास्ते को वैसे ही आसान बनाया जा सकता है, जैसे खट्टे नींबू से मीठा शरबत बनाया जाता है।


विलायत पोर्टल :  जवाब: किसी भी खाने के दस्तरख़ान पर हो सकता है अचार और मिर्च के साथ मिठाई और मुरब्बा भी हो, बच्चे मिठाई और मुरब्बा की ओर लपकते हैं, लेकिन जवान और बुज़ुर्ग दोनों चीज़ों को साथ में दस्तरख़ान पर अनिवार्य समझते हैं।
कभी कभी भयानक घटनाओं के कुछ लाभ भी होते हैं, जैसे:
1- ख़ुदा की ओर इंसान का ध्यान बढ़ता है।
2- इंसान में गंभीरता और और उसकी क्षमता में निखार पैदा होता है।
3- इंसान के गुनाह, गलतियों और पाप के प्रायश्चित का कारण बनता है।
4- नेमतों की अहमियत अच्छी तरह समझ आती है।
ऐसी घटनाओं के समय इंसान तीन तरह के होते हैं, जैसे बच्चे मिर्च, अचार और प्याज़ को मुँह तक ले जाते ही नाराज़ हो जाते हैं, जवान बर्दाश्त करते हैं और बुज़ुर्ग ख़ुद ही अपने पैसे से यह सब चीज़ें ख़रीदते हैं।
उसी तरह क़ुर्आन का कहना है कि कुछ लोग भयानक घटनाएँ देखते ही चिल्ला उठते हैं। (सूरए मआरिज, आयत 20) कुछ लोग ऐसे समय में सब्र करते हैं। (सूरए बक़रा, आयत 154-155) और कुछ लोग ऐसी घटनाओं को ख़ुद गले लगाते हैं। (सूरए अहज़ाब, आयत 23) कुछ लोग पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. के पास जंग पर जाने के लिए आते थे, आप कहते कि अब मेरे पास घोड़ा और तलवार नहीं है जिसे तुम को दे कर जंग के लिए भेज सकूँ, वह लोग जब यह सुनते तो जंग पर ना जाने की वजह से रोते थे। कठिनाइयों और भयानक घटनाओं के समय धैर्य और संयम बरतते हुए और रणनीति बनाते हुए अल्लाह से मदद माँगते हुए रास्ते को वैसे ही आसान बनाया जा सकता है, जैसे खट्टे नींबू से मीठा शरबत बनाया जाता है।
हज़रते ज़ैनब स.अ. ने क्रूर पापी दुष्ट यज़ीद के महल में मौक़े का ऐसा फ़ायदा उठाया कि बनी उमय्या के शासन की चूलें हिला दीं।
सीरिया की मस्जिद में इमामे सज्जाद अ.स. ने मिम्बर पर जा कर जब बनी उमय्या की घिनौनी करतूतों को बताना शुरू किया तो इमाम की आवाज़ दबाने के लिए अज़ान शुरू करवा दी गई जिस से इमाम की आवाज़ दब जाए, लेकिन इमाम ने इस मौक़े का भी फ़ायदा उठाया और यज़ीद को ललकार कर कहा कि ऐ यज़ीद यह बता यह मोहम्मद स.अ. जिनका नाम अज़ान में लिया जा रहा है यह तेरे जद्द हैं या मेरे?
इसी तरह जब इमाम काज़िम अ.स. को क़ैद में डाला गया तब आप ने फ़रमाया, अल्लाह की इबादत के लिए यह कितनी अच्छी जगह है। ऊपर दिए गए उदाहरणों से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इंसान कठिन से कठिन परस्तिथियों में भी अगर अल्लाह से मदद माँगते हुए और उस पर भरोसा करते हुए उसके रास्ते पर बढ़ता रहे तो भयानक से भयानक घटनाएँ और कठिनाइयाँ आसान हो जाया करती हैं।
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