Wed - 2018 Sep 19
Languages
Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 191825
Date of publication : 28/1/2018 18:3
Hit : 400

हज़रत ज़हरा स.अ. की विशेषताएं

पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया जो भी मेरी बेटी फ़ातिमा स.अ. से मोहब्बत करेगा वह जन्नत में मेरे साथ रहेगा, और जिस ने उन्हे नाराज़ किया उसका ठिकाना जहन्नुम है, ऐ सलमान, फ़ातिमा से मोहब्बत मौत, क़ब्र, मीज़ान, हश्र, सिरात और आमाल के हिसाब किताब जैसी सौ जगहों पर फ़ायदा पहुंचाएगी, ऐ सलमान, जिस से मेरी बेटी फ़ातिमा राज़ी हैं उस से मैं भी राज़ी हूं, और जिस से मैं राज़ी हूं उस से अल्लाह राज़ी है।


विलायत पोर्टल :  इतिहास में हमेशा से इस संसार के सबसे अनमोल रत्न और अल्लाह के छिपे हुए रहस्यों में से महत्वपूर्ण रहस्य हज़रत ज़हरा स.अ. के जीवन के अनेक विषयों पर अनेक किताबें लिखी जा चुकी हैं, जो सुन्नी और शिया दोनों आलिमों की तरफ़ से लिखी गई हैं।
मशहूर लेखक अली मुहम्मद अली दख़ील कहते हैं, 1387 हिज्री में नजफ़ के एक सामान्य पुस्तकालय की प्रदर्शनी में हज़रत ज़हरा स.अ. के विषय पर हर तरह के लेख निबंध और किताब लाने को कहा गया, उस प्रदर्शनी में मैंने 300 लेख, निबंध और किताबों को जमा किया। (आलामुन् निसा .पेज 148)
यह इस बात का संकेत है कि आप के विषय पर बहुत सारे लेख और किताबें लिखी गईं हैं।
इस लेख में आपके जीवन की कुछ अहम विशेषताओं  को बयान कर रहे हैं ।
 आपका जन्म
बहुत सारी रिवायतों में आप के जन्म से पहले पैग़म्बर स.अ. का जन्नत के किसी फल या खजूर को खाने का ज़िक्र मिलता है, जैसा कि अमाली नामी शैख़ सदूक़ की किताब में मौजूद है कि इमाम रज़ा अ.स. ने फ़रमाया, रसूले ख़ुदा फ़रमाते हैं कि जब मैं मेराज पर गया तब जिब्राईल मेरा हाथ थामे हुए जन्नत की तरफ़ ले गए फिर जन्नत के खजूर खाने को दिए जिसके बाद जनाब ख़दीजा अ.स. को ख़ुशी की ख़बर मिली और फिर हज़रत ज़हरा स.अ. का विलादत हुई। (बिहारुल् अनवार, जिल्द 43, पेज 4)
इसी तरह रिवायत में है कि हज़रत ज़हरा स.अ. के नूर से पहले आप को 40 दिन तक अल्लाह की इबादत का हुक्म दिया गया, और आप की प्रतिष्ठा और गरिमा उस समय और भी उभर कर सामने आती है जब हम क़ुर्आन में हज़रत मूसा अ.स. को भी आसमानी किताब तौरात लेने से पहले 40 दिन अल्लाह की इबादत करने का हुक्म प्राप्त करते हुए देखते हैं।
अल्लामा मजलिसी रिवायत बयान करते हैं कि एक दिन पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. अबतह नामी स्थान पर बैठे हुए थे. आप के साथ अम्मार, मुन्ज़िर, अबू बकर, उमर और अब्बास भी थे, तभी जिब्राईल इंसानी रूप धारण करते हुए नाज़िल हुए और कहा, ख़ुदा ने आप को सलाम कहा है और कहा है कि 40 दिन हज़रत ख़दीजा से दूर रहें, फिर 40 दिन बाद जिब्राईल ने नाज़िल होते हुए कहा ख़ुदा ने आप को सलाम कहा है और कहा है कि अब उपहार गृहण करने के लिए तैयार रहें, आप ने पूछा कैसा उपहार, जिब्राईल ने कहा मुझे नहीं मालूम, फिर कुछ ही क्षणों में मीकाईल एक तबक़ ले कर नाज़िल हुए, पैग़म्बर स.अ. ने उसी तबक़ मे लाए गए खाने से रोज़ा इफ़्तार किया, फिर जिब्राईल ने पैग़म्बर स.अ. से कहा ख़ुदा ने अपने वुजूद की क़सम खाते हुए कहा है कि आज आप की सुल्ब से पाक और पाकीज़ा नस्ल की शुरूआत करेगा। (बिहारुल् अनवार, जिल्द 16, पेज 78-80)
 पैग़म्बर स.अ. से समानता
उम्मे सलमा का कहना है, पैग़म्बर स.अ. से चेहरे से हज़रत ज़हरा सबसे ज़्यादा समानता रखती थीं। (बिहारुल् अनवार, जिल्द 43, पेज 55) आयशा का कहना है कि पैग़म्बर स.अ. से बातचीत में समानता सबसे ज़्यादा हज़रत ज़हरा स.अ. रखतीं थीं। (मुसतदरके हाकिम, जिल्द 3, पेज 167)
जाबिर से रिवायत है कि आपके चलने का अंदाज़ पैग़म्बर स.अ. की तरह था । (बिहारुल् अनवार, जिल्द 43, पेज 53)
ईमान और कमाल
रिवायत है कि अबूज़र एक दिन इमाम अली अ.स. के घर जाकर आप को पुकारते हैं लेकिन घर से कोई जवाब नहीं आता जबकि घर से अपने आप चक्की चलने की आवाज़ आती है, अबूज़र पूरे मामले को पैग़म्बर स.अ. के सामने पेश करते हैं, पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं, ख़ुदा ने मेरी बेटी के दिल और पूरे शरीर को ईमान और यक़ीन से भर दिया है, चूंकि ख़ुदा मेरी बेटी के शरीर की दुर्बलता को जानता है इसलिए फ़रिश्ते को भेज कर उनकी मदद करता है।
इब्ने सब्बाग़ अपनी किताब में लिखते हैं, पूर्ण रूप से ईमान रखने वालों में मर्द तो अधिक हैं लेकिन औरतों में चार ही नाम हैं, जनाब मरियम, जनाब आसिया, जनाब ख़दीजा और हज़रत ज़हरा स.अ. इस रिवायत को मुस्लिम, बुख़ारी और तिरमिज़ी ने भी लिखा है। (अल-फ़ुसूलुल मोहिम्मा, पेज 137)
हज़रत ज़हरा स.अ. सब से पहले जन्नत में दाख़िल होने वालों में से हैं। (मुस्तदरके हाकिम, जिल्द 3, पेज 151)
हदीस में मौजूद है कि सबसे पहले जो जन्नत में दाख़िल होंगी वह हज़रत ज़हरा स. अ. हैं। (अल-फ़ुसूलुल मोहिम्मा, पेज 137)
हज़रत ज़हरा स.अ. का इल्म
आप की विशेषताओं में से है कि आप को अतीत और भविष्य का इल्म था। सलमान का बयान है कि एक दिन अम्मार ने मुझ से कहा कि तुम को एक अजीब बात बताऊं, मैंने कहा बताओ, अम्मार ने कहा मैंने एक दिन देखा इमाम अली अ.स. जैसे ही हज़रत ज़हरा स.अ. के पास गए आप ने कहा ऐ अबुल हसन क्या मुझे अनुमति है कि मैं आप को अतीत अथवा भविष्य में क़यामत की कुछ ख़बरें सुनाऊं, अम्मार कहते हैं मैंने देखा उसके बाद इमाम अली अ.स. मस्जिद आ गए पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने देखते ही अपने पास बुला कर कहा ऐ अली तुम बताओगे या मैं बताऊं, इमाम अली अ.स. ने कहा दुनिया मे आप से बेहतर किसकी बातें होंगी, फिर पैग़म्बर स.अ. ने सारी बात बता दी, अम्मार का बयान है कि इमाम अली अ.स. के साथ मैं भी मस्जिद से निकला आप जैसे ही घर पहुंचे हज़रत ज़हरा स.अ. ने आपके और पैग़म्बर स.अ. के बीच होने वाली सारी बातें आपको बता दीं। (बिहारुल अनवार, जिल्द 43, पेज 8)
इमाम काज़िम अ.स. से भी रिवायत है कि हज़रत ज़हरा स.अ. सारे सहाबा में इमाम अली अ.स. के अलावा सबसे ज़्यादा जानती थीं। (ज़िंदगानिए फ़ातिमा, हुसैन एमाद ज़ादेह, पेज 181)
अकसर ऐसा होता कि पैग़म्बर स.अ. लोगों को सवालों के जवाब के लिए हज़रत ज़हरा स.अ. के पास भेज देते थे, क्यों कि आप वह सब जानती थीं जो आम लोग नहीं जानते थे। एक दिन पैग़म्बर स.अ. अपने असहाब के साथ बैठे थे, आप ने उन सब से एक सवाल पूछा कि एक ख़ातून के लिए सबसे क़ीमती चीज़ क्या है, उनमें से कोई जवाब नहीं दे सका, इमाम अली अ.स. ने यह बात हज़रत ज़हरा स.अ. को बताई, आप ने बिना सोंचे जवाब दिया एक ख़ातून के लिए सबसे क़ीमती चीज़ यह है कि ना ही कोई ना महरम उसे देखे और ना ही वह किसी ना महरम को देखे। इमाम अली अ.स. ने उसी समय यह जवाब पैग़म्बर स.अ. को आकर बताया, पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया बेशक वह मेरे बदन का हिस्सा है। (बिहारुल अनवार, जिल्द 43, पेज 54)
जन्नती लिबास
एक दिन कुछ यहूदी पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. के पास आए और कहा हम पड़ोसी होने की वजह से आप से निवेदन करते हैं कि आप अपनी बेटी को हमारे यहां शादी में भेज दें जिस से हमारी महफ़िल में बरकत आ सके, पैग़म्बर स.अ. ने कहा कि इसके लिए अली से इजाज़त लो उन लोगों ने कहा आप ही बात कर लीजिए, पैग़म्बर ने इमामे अली अ.स. से पूछ के हज़रत ज़हरा स.अ. को जाने के लिए कह दिया, यहूदी औरतें यह सोंच के कि आप सादे कपड़ो में आएंगी सब क़ीमती कपड़े और ज़ेवरात पहन कर तैयार होने लगीं ता कि हज़रत ज़हरा स.अ का मआज़ल्लाह मज़ाक़ उड़ा सकें, तभी जिब्राईल जन्नत के ऐसे क़ीमती लिबास और ज़ेवरात लेकर नाज़िल हुए कि जिनको उस से पहले किसी ने नहीं देखा था, आप उन जन्नती लिबास और ज़ेवरात को पहन कर जैसे ही शादी में पहुंची और यहूदी औरतों की निगाहें आप पर पड़ीं वह सब की सब सजदे में गिर पड़ीं और मुसलमान हो गईं। (बिहारुल अनवार, जिल्द 43, पेज 54)
आसमानी दस्तरख़ान
हज़रत ज़हरा स.अ. के लिए आसमान से कई बार दस्तरख़ान आया है जैसा कि एक रिवायत में है कि एक बार पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. हज़रत ज़हरा स.अ. के घर गए, जैसे ही बेटी पर निगाह पड़ी आप ने देखा चेहरे का रंग पीला पड़ गया है, आपके वजह पूछने पर बताया कि तीन दिन से कुछ खाया नहीं है, पैग़म्बर स.अ. ने हसनैन अ.स. को बुला कर दाएं और बाएं ज़ानू पर बिठाया, कुछ ही देर में इमाम अली अ.स. भी आ गए, फिर पैग़म्बर स.अ. ने आसमान की तरफ देखते हुए फ़रमाया, ऐ मेरे आक़ा और मौला यह मेरे अहले-बैत हैं, ख़ुदाया इन से हर तरह की नजासत और गंदगी को दूर कर दे, और इनको इस तरह पाक कर दे जैसे पाक करने का हक़ है।
फ़िर हज़रत ज़हरा स.अ. ने दो रकअत नमाज़ पढ़ कर दुआ के लिए हाथों को उठाया और कहा ख़ुदाया यह तेरे पैग़म्बर स.अ. और उनके चचेरे भाई अली और उनके बेटे हसनैन हैं, ख़ुदाया जिस तरह तू ने बनी इस्राईल के लिए आसमान से दस्तरख़ान नाज़िल किया था उसी तरह हमारे लिए भी नाज़िल फ़रमा। रावी का बयान है कि दुआ पूरी होने से पहले ही आसमान से कई तरह के खाने आ गए। (बिहारुल अनवार, जिल्द 43, पेज 73)
इमाम अली अ.स. से शादी
हज़रत ज़हरा स.अ. की विशेषताओं और महानताओं में से एक इमाम अली अ.स. से शादी का होना है, अगर इमाम अली अ.स. ना होते तो कोई आपकी फज़ीलत और अज़मत का बराबर नही था जिस से आपकी शादी होती। (उसूले काफ़ी, जिल्द 2, पेज 360)
हज़रत फ़ातिमा स.अ. से मोहब्बत
सलमान से रिवायत है कि पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया जो भी मेरी बेटी फ़ातिमा स.अ. से मोहब्बत करेगा वह जन्नत में मेरे साथ रहेगा, और जिस ने उन्हे नाराज़ किया उसका ठिकाना जहन्नुम है, ऐ सलमान, फ़ातिमा से मोहब्बत मौत, क़ब्र, मीज़ान, हश्र, सिरात और आमाल के हिसाब किताब जैसी सौ जगहों पर फ़ायदा पहुंचाएगी, ऐ सलमान, जिस से मेरी बेटी फ़ातिमा राज़ी हैं उस से मैं भी राज़ी हूं, और जिस से मैं राज़ी हूं उस से अल्लाह राज़ी है। (बिहारुल अनवार, जिल्द 27, पेज 116)
..................................


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :