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Code : 191840
Date of publication : 30/1/2018 20:2
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मुझे आप से ज़रूरी काम है....

मैंने सोंचा कि शायद इसको छुट्टी चाहिए होगी, फिर मैं दिल में सोंचने लगा कि यह कौन सा मौक़ा है छुट्टी का, लेकिन मैंने देखा वह रो रहा है, मैंने कहा बताओ क्या बात है, उसने कहा कि, यह फ़ौजी जवान जो रात के समय दुश्मन फ़ौज पर हमले के लिए जाते हैं क्या हो सकता है कि मैं भी इनके साथ जाऊं?

विलायत पोर्टल :  ईरान के तत्कालीन रक्षामंत्री शहीद मुस्तफा चमरान के साथ रहने वाले फ़ौजी हर रात छिप कर दुश्मन की फ़ौज पर हमले के लिए जाते थे, कभी कभी मुझे भी साथ ले जाते थे, एक दिन मेरे पास एक फ़ौजी अफ़सर आया जो ख़ुद दो बटालियन का कर्नल था, उसने मुझ से कहा मुझे आपसे कुछ ज़रूरी काम है, मैंने सोंचा कि शायद इसको छुट्टी चाहिए होगी, फिर मैं दिल में सोंचने लगा कि यह कौन सा मौक़ा है छुट्टी का, लेकिन मैंने देखा वह रो रहा है, मैंने कहा बताओ क्या बात है, उसने कहा कि, यह फ़ौजी जवान जो रात के समय दुश्मन फ़ौज पर हमले के लिए जाते हैं क्या हो सकता है कि मैं भी इनके साथ जाऊं? शहीद चमरान कुछ ख़ास फ़ौजियों के साथ रात के अंधेरे में सद्दाम द्वारा हमले के लिए भेजे गए टैंकों को मार गिराने जाते थे, यह कर्नल मुझ से बड़ी विनम्रता से उन लोगों के साथ जाने की अनुमति मांग रहा था, उस समय हमें ऐसे मौक़े देखने को मिलते थे, जो उन लोगों की मानवियत और आध्यात्म को दर्शाते थे, हमारे स्वयंसेवक और फ़ौज के जवानों ने इस तरह की मानवियत दिखा कर महान इतिहास लिखा है।
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