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Date of publication : 31/1/2018 6:8
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क्या कुछ इंसानों को जानवरों जैसा कहना उनका अपमान नहीं?

क्या इंसान हो कर जो एक ही समय में बिना किसी कारण सैकड़ों अपराध करके लोगों का चैन छीन लेता है और उन्हें मौत की नींद सुला देता है वह दरिंदे से कम है? या उस से बदतर नहीं है?

विलायत पोर्टल : क्या कुछ इंसानों को जानवरों जैसा कहना उनका अपमान नहीं?
जवाब: जानवरों द्वारा होने वाले लाभों को ध्यान में रखते हुए कुछ इंसानों को अल्लाह की पवित्र किताब द्वारा जानवर अथवा उस से भी बदतर कहा जाना बिल्कुल सही है।
इंसान के लिए क़ीमती कपड़े और रेशम जानवर से बनाया जाता है, इंसान की ख़ातिर महत्वपूर्ण खान पान जैसे दूध, दही, शहद और गोश्त जानवर से लिया जाता है, जानवर बोझ ढ़ोने और हल चलाने योग्य भी होता है, ऊन कताई, चमड़े का व्यवपार, दूध, डेयरी, पोल्ट्री फ़ार्मिंग और पशु पालन जैसे कामों में जानवर काम आता है। कुछ जानवर इंसान को सीख भी देते हैं जैसे कौआ, जिसने जनाब आदम अ.स. के बेटे और उनकी सारी नस्ल को मुर्दे के दफ़्न की सीख दी।
कुछ नबियों की मदद करते दिखाई देते हैं, जैसे हुदहुद ने मुल्के सबा के गुमराह लोगों की शिकायत जनाबे सुलैमान से की।
कुछ ने तो नबी की जान बचाने का भी प्रयास किया, जैसे मकड़ी ने अपने जाले के द्वारा गुफ़ा में पैग़म्बर की जान बचाने का प्रयास किया।
कुछ जानवर को प्रशिक्षित भी किया जा सकता है, और प्रशिक्षित कुत्ते के द्वारा किए गए शिकार का गोश्त हलाल है।
यहाँ तक साँप जैसे ज़हरीले जानवर भी केवल अपनी जान के ख़तरे के समय ही डसते हैं।
ऊपर दिए गए उदाहरणों के अनुसार क्या वह लोग जो दूर से बैठ कर सिर्फ़ दूसरों के जीवन को नष्ट करने के लिए कभी बम धमाका तो कभी मिसाइल का प्रयोग कर के हज़ारो लाखों लोगों का जनसंहार कर के मौत का खेल खेलते हैं इन साँप और दूसरे जानवरों से बदतर नहीं हैं?
क्या इंसान हो कर जो एक ही समय में बिना किसी कारण सैकड़ों अपराध करके लोगों का चैन छीन लेता है और उन्हें मौत की नींद सुला देता है वह दरिंदे से कम है?
 या उस से बदतर नहीं है?
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