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Date of publication : 10/2/2018 15:42
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ईरान का स्वतंत्रता दिवस इमाम ख़ुमैनी र.ह. की निगाह में

हमें पूरी आज़ादी तभी हासिल होगी जब इस्लाम और उसके अहकाम पर पूरी तरह से पूरे ईरान में अमल हो क्योंकि इस्लाम ही सारी इंसानियत के लिए सआदत का स्रोत है।

विलायत पोर्टल : 11 फ़रवरी ईरान में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन 1979 ईरान में इस्लामी क्रांति कामयाब हुई और ईरान की जनता ने इमाम ख़ुमैनी र.ह. के नेतृत्व में अमेरिका के इशारों पर नाचने वाले तानाशाह की सत्ता को उखाड़ फेका।
इस छोटे से लेख में इमाम ख़ुमैनी र.ह. द्वारा इस दिन की अहमियत और ईरानी स्वतंत्रता दिवस के बारे में उनके कुछ जुमले पेश किए जा रहे हैं।
हमें पूरी आज़ादी तभी हासिल होगी जब इस्लाम और उसके अहकाम पर पूरी तरह से पूरे ईरान में अमल हो क्योंकि इस्लाम ही सारी इंसानियत के लिए सआदत का स्रोत है।
आज़ादी को बचाना आज़ादी दिलाने से अधिक कठिन है।
ईरान का इस्लामी इंक़ेलाब पूरे ईरान की जनता की मेहनत का नतीजा है।
इस कामयाबी का मुझ से कोई संबंध नहीं है, मैं एक मामूली सा छात्र हूं इसलिए इस कामयाबी का सेहरा मेरे सर न बांधें, और इस कामयाबी का जनता से भी कोई संबंध नहीं है बल्कि इस कामयाबी का पूरा श्रेय अल्लाह को जाता है।
हमें इस इंक़ेलाब की कामयाबी इस्लाम की बरकत से हासिल हुई और अल्लाहो अकबर के नारे से हम ने तानाशाह को इस देश से बाहर निकाल दिया।
जब तक आपकी आत्मा उस ताक़त और पावर के स्रोत (अल्लाह) से जुड़ी रहेगी तब तक आप कामयाब रहिएगा।
कामयाबी किसी देश पर क़ब्ज़ा या किसी देश को किसी तानाशाह से ख़ाली करवाना नहीं है बल्कि कामयाबी यह है कि अल्लाह की रहमत और मेहरबानी आप पर हो। आप कामयाब केवल इसलिए हुए क्योंकि अल्लाह आपके साथ है और आपकी हिफ़ाज़त कर रहा है।
अगर पूरी दुनिया हमारे विरुध्द खड़ी हो जाए और सब मिल कर हमें मिटा भी डालें फिर भी कामयाब हम ही होंगे।
हम किसी से नहीं डरते क्योंकि हम हक़ पर हैं, और जब तक हक़ पर हैं तो जीतें या हारें हक़ वाले ही कहलाएंगे। हमें हार का कोई डर नहीं है, पहली बात हम कभी नहीं हार सकते क्योंकि अल्लाह हमारे साथ है, और अगर ज़ाहिर में हार भी गए तब भी मानवी और नैतिक रूप से हम कभी नहीं हार सकते क्योंकि नैतिक और मानवी जीत इस्लाम और मुसलमानों ही के साथ है।
आप लोग हक़ पर हैं और बातिल के मुक़ाबले पर खड़े हैं, और जीत हमेशा हक़ ही की होती है। वह देश जिसके हर वर्ग के लोग बलिदान के लिए तैयार हों वह देश हमेशा कामयाब रहेगा।
आप हक़ पर हैं और बातिल से मुक़ाबले के लिए डटे हैं जिसके लिए बहादुरी और सहनशीलता दोनों की ज़रूरत है अगर यह दोनों न हों आप को कभी निर्णायक जीत हासिल होगी। हम लोगों ने ख़ाली हाथ इन सभी साम्राज्यवादी शैतानी ताक़तों पर जीत हासिल की है।
जीत तलवार और असलहों से नहीं इरादे, हौसले और खून दे कर हासिल की जाती है। हम सारी दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि साम्राज्यवादी ताक़तों को भी धूल चटाई जा सकती है अगर ईमान में मज़बूती पाई जाए।
जिस जनता और राष्ट्र के सपोर्ट में ख़ुद अल्लाह हो उसको कोई हरा नहीं सकता।
अगर हमारा मक़सद ख़ुदा के लिए जीत हासिल करना है तो फिर उसे कोई रोक नहीं सकता।
इस्लामी नैतिकता आपकी ताक़त है जिसके कारण आप एक पापी और अपराधी का तख़्ता पलट कर इस्लामी हुकूमत को लाए हैं।
मेरे भाईयों केवल ईमान की ताक़त है जिसके नतीजे में आपको इतनी बड़ी कामयाबी मिली है।
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