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Code : 193420
Date of publication : 25/4/2018 17:51
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नमाज़ और क़ुर्आन में समानताएं

यह नमाज़ और क़ुर्आन ही हैं जिनसे दिलों को सुकून और मन को शांति मिलती है और यह बात क़ुर्आन ने कही कि याद रखो अल्लाह के ज़िक्र से दिलों को आराम मिलता है (सूरए राद, आयत 28) और जिसने भी अल्लाह की याद और उसके ज़िक्र से मुंह मोड़ लिया उसकी ज़िंदगी में कठिनाईयां भी बढ़ती चली जाती हैं, जैसाकि अल्लाह फ़रमाता है जिस किसी ने मेरे ज़िक्र से मुंह फेरा बेशक उसकी ज़िंदगी सख़्त हो जाती है।

विलायत पोर्टल :  1. दोनों रूह की बीमारियों का इलाज हैं, जैसाकि नमाज़ में पढ़े जाने वाले सूरए हम्द के बारे में हदीस में है कि सूरए हम्द में हर बीमारी का इलाज है इसी तरह क़ुर्आन के बारे में भी आयत मौजूद है जिसमें क़ुर्आन को शिफ़ा कहा गया है। (सूरए इसरा, आयत 82)
2. दोनों से क़रीब होने के लिए वुज़ू की ज़रूरत होती है, जैसाकि नमाज़ के बारे में क़ुर्आन कहता है कि जब तुम नमाज़ के लिए खड़े हो अपने चेहरे को और हाथों को कोहनियों तक धो। (सूरए माएदा, आयत 6) और ख़ुद क़ुर्आन के लिए कहा कि इसे बिना तहारत के कोई नहीं छू सकता। (सूरए वाक़ेआ, आयत 79)
3. दोनों अल्लाह का नूर हैं, जैसाकि नमाज़ के बारे में पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया नमाज़ मोमिन का नूर है, और नमाज़ अल्लाह का नूर है (मुस्तदरक, जिल्द 3, पेज 92) और क़ुर्आन के नूर होने के बारे में अल्लाह ने फ़रमाया बेशक अल्लाह की ओर से तुम्हारे लिए नूर और किताबे मुबीन आई। (सूरए माएदा, आयत 51)
4. दोनों अल्लाह के ज़िक्र हैं, जैसाकि नमाज़ के बारे में अल्लाह ने फ़रमाया मुझे याद रखने के लिए नमाज़ क़ाएम करो (सूरए ताहा, आयत 14) इसी तरह क़ुर्आन के बारे में अल्लाह ने फ़रमाया हम ने ज़िक्र को भेजा और हम ही उसको बचाने वाले हैं। (सूरए हिज्र, आयत 9)
ध्यान देने वाली बात है कि यही नमाज़ और क़ुर्आन ही हैं जिनसे दिलों को सुकून और मन को शांति मिलती है और यह बात क़ुर्आन ने कही कि याद रखो अल्लाह के ज़िक्र से दिलों को आराम मिलता है (सूरए राद, आयत 28) और जिसने भी अल्लाह की याद और उसके ज़िक्र से मुंह मोड़ लिया उसकी ज़िंदगी में कठिनाईयां भी बढ़ती चली जाती हैं, जैसाकि अल्लाह फ़रमाता है जिस किसी ने मेरे ज़िक्र से मुंह फेरा बेशक उसकी ज़िंदगी सख़्त हो जाती है। (सूरए ताहा, आयत 124)
5. दोनों ही के द्वारा अल्लाह की रहमत और उसका करम होता है, जैसाकि इमाम अली अ.स. ने नमाज़ के लिए फ़रमाया नमाज़ रहमत नाज़िल करवाती है (ग़ोररुल हेकम) और क़ुर्आन के रहमत होने के बारे में फ़रमाया यह क़ुर्आन जो मोमेनीन के लिए शिफ़ा और रहमत है उसको हम नाज़िल कर रहे हैं.....। (सूरए इसरा, आयत 82)
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